कौन बनेगा रालोद की चुनावी नईया का खिवाईया।अपने जन्मदिन पर अजीत सिंह खोल सकतें है चुनावी राजनीति के पत्ते।

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दिल्ली 10 फरवरी।जंहा एक तरफ छोटे बड़े सभी राजनीतिक दल जिस स्तर पर वो है। उसी के हिसाब सें 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मामलें में काफी आगे बढ़ चुके है।मगर एक जमानें में पूर्व पी.एम जन मानस के नेता स्वर्गीय चै0 चरण सिंह साहब की पार्टी ढाई – ढाई दर्जन एमपी जिताकर लानें में कामयाब हो जाती थी वही आज रालोद का ये हाल है। कि अभी तक उसके कितनें उम्मीदवार कंहा कहंा से चुनाव लड़ेगें और वह कौन कौन होगें।बीतें समय में बागपत ,मथुरा ,शामली आदि में इसके सांसद जीततें रहें है। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका चुनावी गणित बिगड़ा तो राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह और उनके सांसद पुत्र जयन्त चैधरी भी चुनाव हार गये।
शायद तय नही हो पाया है बीती 12 जनवरी को सपा बसपा के हुए गठबंधन के नेता पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी और सपा मुखिया अखिलेश यादव दोनो में सें किसी के द्वारा भी अब तक यह स्पष्ट नही किया गया है। कि रालोद को कितनी सीटे दी जाएगी।गठबंधन में परिणाम स्वरूप चै0 अजीत सिंह भी यह स्पष्ट नही कर रहें है। कि वो किस के सहयोग से या अकेले कितनी सीटों पर यूपी और अन्य प्रदेशों में अपनें उम्मीदवार खड़े करेगें । बताते चलें कि बीतें विधान सभा चुनाव में एक उम्मीदवार रालोद का राजस्थान में चुुनाव जीतकर विधायक बना ।इसलिए एक आधे प्रत्याशी तो यहा सें भी रालोद को उतारना ही होगा।और खास कर जाट मतदाताओं वालें लोक सभा क्षेत्रों में भी अपनें कुछ उम्मीदवार खड़े करनें की अजीत सिंह सोच सकतें है। लेकिन यह तभी सम्भव है। जब वो सपा बसपा गठबध्ंान का मोह छोड़ राहुल गांधी का हाथ थामें वैसें सपा मुखिया अखिलेश यादव का रूख थोड़ा नरम है और अजीत सिह मान जाते है। तो मथुरा या बागपत से ज्यन्त चैधरी चुनाव लड़ सकतें है और अजीत सिंह हाथरस , मुजफ्फरनगर यहा और कोई जीताऊ क्षेत्र देखकर वहा जा सकतें है।
होगा क्या यह तो समय ही बतायेगा । लेकिन यह समझा जाता है कि रफी मार्ग स्थित मालवंकर भवन में 12 फरवरी को चै0 अजीत सिंह के जन्मदिन पर आयोजित होनें वाली रालोद की युवा जन सभा में वों अपनें पत्ते चुनावी समीकरण के खोल सकतें है।
वैसे तो जंहा तक स्वर्गीय चैधरी चरण सिंह साहब के जनाधार को देखते हुए और पूर्व में अजीत सिंह और जयंत चैधरी को लोकसभा चुनाव में जीतनें में सफलता मिली थी उसको ध्यान में रखकर सोचें तो बागपत , मुजफ्फरनगर , मथुरा, हाथरस, आदि लोकसभा क्षेत्र ऐसे है जहा सें अजीत सिंह जी के उम्मीदवार अपनें दमपर भी चुनाव लड़े तो अच्छी स्थिति में रहेगें और जीत भी जाए तो कोई आश्चर्य नही है।
लेकिन एक समस्या जो रालोद के समक्ष सबसे बडी नजर आती है। कि 2014 सें अब तक जितनी बड़ी तादात में कार्यकर्ताओं को जोड़कर रालोद को मजबूत बनाया जा सकता था। वो शायद नही किया गया।हमेशा जो गिनती के चेहरे पहलें दिखाई देतें थे वो ही अब नजर आतें है और इनमें सें भी ज्यादातर का कोई विशेष सम्पर्क मतदाताओं सें बताया जा रहा है मीडिया से भी कोई निकटता दिखाई नही देती है तथा वर्तमान समय में सबसे मजबूत सोशल मीडिया जिसका सहारा सभी दल ले रहे है उस पर भी कोई पकड़ रालोद के नेताओं की नजर नही आती है।
सवाल यह उठता है कि कार्यकर्ता और नेता इनके साथ नजर आतें नही है।मतदाताओं सें लगातार बनी हुई है। दूरी सोशल पिन्र्ट और इेलेक्ट्रोनिक मीडिया सहित किसी से भी उनके सीधे सम्बंध बड़ें स्तर पर नजर नही आतें है।ऐसे में अजीत सिंह साहब रालोद उम्मीदवारों की कैसे लगेगी चुनावी नईया पार।यह विषय भी चुनावी रणनीति तय करते समय विशेष रूप से सोचने का होगा।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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