पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बैंच, जनप्रतिनिधि, व्यापारी ओर जनता वकीलों से मिलकर !

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नए अधिवक्ताओं को पांच साल तक 10 हजार रूपये मानदेय देने अक्षम होने पर निश्चित मानदेय व मेडिकल क्लेम का लाभ देने की मांग सहित सस्ती दर पर जमीन और मकान बनाने के लिये पैसा दिये जाने की बात वकीलों द्वारा उठायी गई है। और सबसे बड़ी मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बैंच की स्थापना को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजने के साथ आज 11 और 12 फरवरी को अधिवक्ताओं के काम के वक्त रहने के निर्णय के तहत आज पश्चिम के 22 जिलों में वकीलों ने काम नहीं किया।
वैसे तो हाईकोर्ट बैंच की मांग पिछले लगभग चार या पांच दशक से लगातार चल रही है। इसको लेकर बड़े बडे़ आंदोलन, धरना प्रदर्शन और बंद आयोजित हुए। वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र सिंह धामा नरेंद्र पाल सिंह, आदि के समय में तो एतिहासिक आंदोलन हुए और वकीलों के द्वारा इस मांग को पूरा कराने के लिये हर संभव प्रयास भी किये जा रहे हैं। हाईकोर्ट बैंच को एक मिशन के रूप में 2019 में वर्तमान चुने हुए पदाधिकारियों, अध्यक्ष राजेंद्र सिंह जानी, महामंत्री देवकी नंदन शर्मा द्वारा अन्य वकीलों के सहयोग से लिया गया है। तो श्री नरेंद्र शर्मा एडवोकेट ने तो नववर्ष की शुभकामना ही इस आशय के साथ सहयोगियों को दी। इस वर्ष बैंच की स्थापना के लिये हर संभव प्रयास सब मिलकर करें। आंदोलन चल ही रहा है लेकिन पश्चिम बंगाल के जलपाईय गुडडी में कलकत्ता की सर्किट बैंच पांच लाख की आबादी पर दे दिये जाने तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आठ करोड़ नागरिकों की बैंच देने के मामले में की जा रही अवहेलना से अधिवक्ता आक्रोश में है। औश्र उसके परिणाम स्वरूप 22 जिलों के वकील दो दिन की हड़ताल पर 11 और 12 को चले गए। सवाल यह उठता है कि प्रयागराज से थोड़ी सी दूरी पर स्थित लखनउ में हाईकोर्ट बैंच भी मौजूद है। जबकि पश्चिम के 22 जिले यहां से सैकड़ो मिल दूर पड़ते हैं। और यहां के नागरिकों को अपने
मुकदमों की पैरवी के लिये भरपूर प्रयास करने हैं तथा दूरी के चलते समय तथा पैसा दोनों की बर्बादी हो रही है। सरकार हर व्यक्ति को सस्ता और सुभल न्याय दिलाने के लिये वचनवध है उसके बाद भी वो कौन से कारण है कि यहां बैंच नहीं दी जा रही और इन 22 जिलों के नागरिकों का क्या दोष है जो इन्हे महंगा न्याय प्राप्त करने के लिये मजबूर होना पड़ रहा है।
मेरा मानना है कि वकीलों के अंदोलन से हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में कष्ट में है। और खुद कुछ अधिवक्ता भी ज्यादातर जिन दिनों काम नहीं रहता विभागीय कारणों से काफी परेशान रहते हैं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के सभी सांसद और विधायकों तथा राजनीतिक दलों के शहर व जिलों के हर स्तर के पदाधिकारियों को एकजुट होकर अधिवक्ताओं के साथ मिलकर प्रभावी रूप से अपनी आवाज और बात माननीय प्रधानमंत्री और न्याय मंत्री जी तक पहुंचानी चाहिये क्योंकि प्रभावित तो वो भी हो ही रहे हैं। और अगर बैंच मिल जाती है तो व्यापार बढ़ेगा। सबको लाभ होगा।
इसलिये आये दिन की हड़ताल समय की बर्बादी और पैसे की फिजुल खर्ची को ध्यान में रखते हुए अब समय आ गया है कि अधिवक्ता हड़ताल करने के बजाए जनप्रतिनिधियों को गांधीवादी अंहिसक तरीके से सबके साथ मिलकर आंदोलन को धार दे तो मुझे लगता है कि सरकार का ध्यान इधर होगा और एक बार अगर सोचने और विचार की प्रतिक्रिया शुरू हो गई तो बैंच मिलना लगभग तय होगा। अलग अलग लड़ाई लड़ने से शायद वो असर हमारे उन राजनेताओं और सरकार को नजर नहीं आ रहा जो आना चाहिये। जनता वकीलों के साथ है। सब मिलकर इस मांग को एक सुर में बुलंद करें यही सबके हित में और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास तथा उन्नति के लिये आवश्यक है।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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