कांग्रेस अकेले दम पर लड़े चुनाव, राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर

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राष्ट्रीय लोकदल प्रगतिशील समाजवादी लोहिया व जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी से किया जाये गंठबंधन

2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की अभी तारीख तो तय नहीं हुई मगर जैसे जैसे समय नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राजनीतिक माहौल भी गरमाने लगा है। राजनीतिक दल अपनी अपनी तैयारियों में मजबूती से लग गए हैं। कांग्रेस यूपी में 12 रैलियां करने का प्रोग्राम बना चुकी है। तो भाजपा ने भी बीते दिवस दिल्ली मंे अपनी पार्टी के नेताओं के साथ विस्तार के साथ विचार विमर्श किया और चुनावी तैयारियों की रणनीति पर चर्चा की।आज समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा उप्र की राजधानी लखनउ में पत्रकार सम्मेलन आयोजित कर 38/38 सीटो पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी गई। 4 सीटे शायद वक्त जरूरत के अनुसार अन्य दलों से होने वाले सहयोग व होने वाले गठबंधन के लिये छोड़ी गई है। इसने से भी राहुल गांधी व सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र में शायद उम्मीदवार खड़े नहीं किये जाएंगे इनके द्वारा।
राजनीति में कब कौन किसके साथ होगा और कब विरोधी यह तो कोई नहीं जान सकता। इसलिये चुनाव की तारीख घोषित होने से पूर्व अभी कई ओर बदलाव हो सकते हैं। यह बात विश्वास के साथ कहीं जा सकती है।
लेकिन अब कांग्रेसियों के मनोबल में बढ़ोतरी होगी और मुझे लगता है कि वो मजबूती से अपनी पुरानी प्रतिष्ठा कायम करने के लिये पूरी ताकत लगा देंगे। और यह बात विश्वास के साथ कहीं जा सकती है कि कांग्रेस अगर अकेले दम पर चुनाव लड़ती है तो 2014 में दो सीटो पर मिली विजयी से इस बार उसकी स्थिति काफी मजबूत होकर उभरेगी।
1993 के बाद सपा-बसपा का गठबंधन हुआ है। कितना सफल होगा और उस समय की कड़वी यादों को कितना दोनों दलों के नेता व कार्यकर्ता भूला पाएंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
मगर पिछले वर्ष 5 प्रदेशों के हुए विधानसभा चुनावों पर कांग्रेस अकेले दम पर राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सरकार बनाने में सफल हो गई जिससे यह साफ हो गया कि वहां सपा बसपा कोई ज्यादा असर नहीं दिखा पाई जबकि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी भी बसपा के साथ थे।

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यूपी में पूर्व में हुए लोकसभा उपचुनावों में सपा और रालोद को विजय प्राप्त हुई। इसलिये यह बात तो कहीं जा सकती है कि उन तीनो प्रदेश जैसी स्थिति तो बसपा-सपा गठबंधन की नहीं होगी। मगर कांग्रेस अकेले दम पर अच्छा खासा बहुमत जुटा सकती है। और अगर सपा से अलग हुए राजा भैया की पार्टी जनसत्ता लोकतांत्रिक व शिवपाल सिंह यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी (लोहिया) और चैधरी अजित सिंह की पार्टी रालोद से कांग्रेस जहां जहां इन दलों के असर हैं और पूर्व में कांग्रेस को वहां कोई बड़ी सफलता नहीं मिली उन लोकसभा क्षेत्रों में इन दलों को सम्मानजनक रूप से सीटो का बंटवारा कर चुनाव लड़ने से कांग्रेस मजबूत होगी।
बताते हैं कि लगभग 20 लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस अपने उम्मीदवार भी लगभग तय कर चुकी है जिसमे मुरादाबाद से संजय दत्त का नाम चर्चा में है तो मेरठ हापुड़ लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्त विपुल महेश्वरी चुनाव मैदान में करने को तैयार है। पीएल पुनिया, श्री प्रकाश जायसवाल, सुरेंद्र गोयल, पूर्व सांसद जैसे नेताओं के नाम तय उम्मीदवारों में शामिल बताए जा रहे हैं और यह सभी करिश्माई नेता कहलाए जाते हें। काम भी इनके द्वारा कुख्ब किये गए हैं।
अपने समय में और सबसे बड़ी बात यह है कि 11 जनवरी को दिल्ली के रकाब गंज क्षेत्र में कांग्रेस के यूपी के छह जिलों के प्रमुख नेताओं की गुलामनबी आजाद, प्रमोद तिवारी, राजबब्बर, यूपी में कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता लल्लू जी आदि की मौजूदगी में हुई बैठक में मौजूद लगभग 200 प्रमुख नेताओं द्वारा स्पष्ट किया गया बताते हैं कि हमे कांग्रेस को अकेले यूपी में चुनाव लड़ना चाहिये। सूत्रों की माने तो उप्र कांग्रेस के पूर्व सेकेटरी व पार्टी के आस्थावान जाट नेता चैधरी यशपाल सिंह द्वारा मिटिंग में खड़े होकर सुझाव दिया गया कि कांग्रेस को अकेले दम पर चुनाव लड़ना चाहिये। और अगर गठबंधन करना है तो रालोद के चैधरी अजित सिंह व जयंत चौधरी के साथ किया जाए इससे जाटों के साथ साथ मुस्लिम मत भी कांग्रेस को मिलेंगे क्योंकि जो दल भाजपा के मुकाबले मजबूती से चुनाव लड़ता नजर आएगा मुस्लिम मतदाता यूपी में उसके साथ जाएंगे।
इस बैठक में पूर्व सांसद सुरेंद्र गोयल, पूर्व विधायक पंकज मलिक, पूर्व विधायक दामोदर शर्मा, उप्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष स्वतंत्रता यादव तथा पउप्र में मुस्लिमों के दमदार सैकुलर छवी के नसीब पठान, नेता मौजूद रहें। जितना पता चला है उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेसी कार्यकर्ता यूपी में आत्मविश्वास अपने अंदर पैदा कर रहा है ओर चाहता है कि अेकेले दम पर कंांग्रेस चुनाव लडे उसका राहुल गांधी जी में पहले के मुकाबले आत्मविश्वास मजबूत होकर उभरा है और सबको लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल जी अपने दम पर भाजपा को कडी टक्कर दे सकते हैं। और भविष्य में क्या होगा यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन कांग्रेस अच्छी स्थिति में उभरकर आयेगी और सहयोगी दलों से मिलकर केंद्र में सरकार भी बना सकती है और कांग्रेसियों के इस कथन में दम नजर आता है कि पार्टी राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लडे मतदाता कांग्रेस के प्रति आकर्षित होगा क्योंकि पिछले एक साल में जो कराई माई राजनीति राहुल गांधी जी द्वारा की गई है उसमे डबडे बडे दिग्गज विपक्षी के हौंसले पस्त किये और पूर्व में जो उन्हे पप्पू बताते थे अब अपनी हर मिटिंग में राहुल गांधी का नाम लेकर आलोचना करते हैं जो इस बात का प्रतीक है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब मजबूती से अपनी पार्टी को आगे लाने और छवि निखारने में सफल रहे हैं और विपक्ष के लिये राजनीतिक रूप से काफी अहमद भी बन गए हैं। इसलिये अगर आवश्यकता पडी तो अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी राहुल गांधी के साथ आकर खड़े हो सकते हैं सरकार बनाने में सहयोग देने के लिये।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल  इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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