मानचित्र के लिए नही है कोई एक नीति, रोम जल रहा था निगरो बंसी बजा रहा था जैसी स्थिति हो गयी है एमडीए और बीडीए की

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सरकार की छवि धूमिल कर रहे सुनियोजित विकास से सबंध अधिकारी के विरूद्ध हो कार्यवाही
मुख्यमंत्री जी भ्रष्टाचार और लापरवाही तथा सरकार की निर्माण नीति के विरूद्ध
अवैध निर्माण कराने का मुख्य केन्द्र बन गये है प्रदेश के प्राधिकरण

प्रदेश की भाजपा सरकार जनहित में काफी काम कर रही है मगर पता नही वो कौन से कारण है की तमाम योजनाओं और सरकार द्वारा निधारित नीतियों का उल्लघन कर रहे कुछ सरकारी विभागों के उन अधिकारियों के विरूध कार्यवाही क्यो नही हो पा रही जिनकी करतूतों से आम नागरिक सरकार के विरूद्ध अपनी विचार धारा तेजी से तय करते जा रहे है।
इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में गांव से लेकर शहरों तक के सुनियोजित विकास सौन्दर्यकरण और गरीब जरूरतमंद को घर उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से प्राधिकरणों और आवास विकास का गठन किया गया। लेकिन यह कितना ताज्जुब की बात है की इनमें तैनात अफसर शासन की नीति और नियमों को ताक पर रख अपने मनमाने तरिकें से जेबे भरने के लिए काम कर रहे बताये जा रहे है ऐसे आरोप आये दिन लगते है लेकिन ताज्जुब इस बात का है की जनता और सरकार तथा सत्ता चला रही पार्टी के प्रतिनिधि द्वारा जिन कुछ भ्रष्ट अफसरों के कारण सरकार की छवि धुमिल हो रही है उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही सरकार को इनकी कार्यप्रणाली की सूचना देकर क्यो नही करायी जा रही है।
सरकार की निर्माण नीति की तो अवैध निर्माण कराकर ऊपर दिये गये विभागों के अधिकारी धज्जियां उड़ा ही रहे है स्थिति यह हो गयी है की आम नागरिक यह कहने लगा है की विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को अवैध निर्माण रोकने की बजाय, अवैध निर्माण कराने का ठेकेदार घोषित कर देना चाहिए क्योकि आजकल इन विभागो के ज्यादातर अफसर सरकार को मानचित्र और कम्पाउड शुल्क के रूप में मिलने वाले राजस्व का खुलकर नुकसान पहुंचा रहे है।
माननीय मुख्यमंत्री जी ज्यादातर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में तैनात नौकरशाह सरकार की नीतियो को जेब में डाल निर्माण मानचित्र पास करने और कौन कितनी मंजिल बनायेगा यह काम नियमनुसार ना कर नोटो के वजन के हिसाब से तय करने में लगे है मुख्यमंत्री जी इसके जीते जागते अनेक उदाहरण बनारस व मेरठ आदि विकास प्राधिकरणों की अगर जांच करायी जाये तो अनेकों प्रकरण खुलकर सामने आ सकते है।
कहने का मतलब सिर्फ इतना है की प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में अंधेरनगरी चैपट राज वाली कहावत को चित्रार्थ करते हुए चांदी के जूते और नोटो की चमक दमक और दवाब में हर काम हो रहा है नियमों की परवाह चाहिए किसी को नजर नही आती है। इतना ही नही ज्यादातर विकास प्राधिकरणों में अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्यवाही करने स्थिति तो रोम जल रहा था निगरो बंसी बजा रहा था जैसी हो गयी है।
क्योकि यहां तैनात अधिकारी नागरिको के अनुसार नियमों के तहत कार्यवाही कर और जनता को राहत देकर सरकार की उज्जवल छवि बनाने को किसी भी रूप में तैयार नजर नही आते है।
मुख्यमंत्री जी जनहित में सारे विकास प्राधिकरणों और विकास से सबंध कार्यालयों की गोपनीय जांच कराई जाये तो ऐसे ऐसे तथ्य सामने आयेगे जिसकी कल्पना भी नही की जा सकती।
शासन, सरकार और जनहित मे जल्द से जल्द करायी जाये इन विभागों में तैनात अफसरो की कार्यप्रणाली कमायी तथा भ्रष्टाचार के विरूद्ध अपनायी जा रही लापरवाह नीति की जांच। – शासन व जनहित में मौखिक चर्चा व सूत्र पर आधारित

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