सरकार की उपलब्धियों और जनहित की नीतियों के प्रधानमंत्री व मंत्रियों से संबंध समाचार क्यों नहीं छपने देना चाहते डीएवीपी के अधिकारी, क्या रददी बेचने का काम करने लगे हैं अफसर?

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श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा की केंद्र में बनी सरकार का विभाग

ब्यूरों ऑफ आउटरिच एडं कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) पता नहीं वो कौन से कारण है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और सूचना प्रसारण मंत्री आदि व समय समय पर विभिन्न मंत्रियों द्वारा की गई जनहित की घोषणाओं और सरकार द्वारा बनाई जाने वाली आम आदमी के हित की नीतियों की खबरें पात्र व्यक्तियों तक नहीं पहुंचने देना चाहता इसके पीछे क्या कारण है यह तो इस विभाग के अधिकारी ही जान सकते हैं। मगर मुझे स्पष्ट रूप से लगता है कि अनकहे रूप से इनके द्वारा खुलकर ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं कि केंद्र सरकार की उपलब्धियों की खबरें सीधे जनता से जुड़े लघु और मध्यम समाचार पत्रों में न छपवाएं। और आम आदमी उनका लाभ उठाने से वंचित रहे अथवा उसे अपने हित के लिये सरकार द्वारा किये गए कामों का पता ही नहीं चल पाएं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा केंद्रीय सूचना प्रसार मंत्री राज्य वर्धन राठौर जी मैं यह तो नहीं कहता कि आपकी सरकारों ने केंद्र व प्रदेशों में जनहित के काम नहीं किये। लेकिन यह कहने में कोई हर्ज महसूस नहीं होता है कि जब से केंद्र में भाजपा की सरकार गठित हुई है तब से देश भर के शहरों कस्बों और गांव गली मोहल्लों से निकलने वाले लघु और भाषाई समाचार पत्रों के संचालकों का मानसिक और आर्थिक समाजिक उत्पीड़न करने में सरकार के अखबारों के समबंध विभाग ब्यूरों आॅफ आउटरिच एडं कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) और आरएनआई आदि के अफसर कोई भी मौका चूक नहीं रहे हैं। यह कहने में मुझे कोई हर्ज महसूस नहीं होता कि डीएवीपी के कुछ अफसरों के द्वारा अपने विभाग से संबंध उच्चाधिकारियों और मंत्री को गलत सलाह देकर इन अखबारों व इनके संचालकों के खिलाफ एक माहौल बना गया है और इस क्रम में सर्वप्रथम इनको मिलने वाले विज्ञापनों की संख्या व माप और संख्या नगडीय की गई या करायी गई फिर इस विभाग के अफसरों ने जबरदस्ती की कागजी खानापूर्ति के चक्रव्यहू में फंसाकर आर्थिक समस्याएं झेल रहे इलना समाचार पत्र के संचालकों को परेशान करना शुरू किया। जिसके जीते जागता सबूत इस विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली को देखकर मिल सकता हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका हर स्तर पर निभाने वाले इस वर्ग के समाचार पत्र न तो उस समय बंद हो पाए और न भविष्य में बंद हो पाएंगे। जब इस संदर्भ में सारे प्रयास करके ब्यूरों आॅफ आउटरिच एडं कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) के अफसर फेल हो गए तो उनके द्वारा अब एक नया रस्ता निकालकर सरकार की निगाह में इन समाचार पत्रों को उसके विरोधी दर्शाने के अनकहे दृष्टिकोण से अखबार संचालकों से पूछा जा रहा है कि जो समाचार छप रहे हें उनका स्त्रोत क्या है। और साथ ही अनावश्यक कागाजी खानापूर्ति कराने के अतिरिक्त हर माह ब्यूरों आॅफ आउटरिच एडं कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) में समाचार पत्र जमा होने की व्यवस्था के बावजूद कई माह की फाईले समाचार पत्र संचालकों से मांगी जा रही है। अब सवाल उठता है कि क्या डीएवीपी के अधिकारी रददी बेचने का काम कर रहे हैं और अगर नहीं तो अनावश्यक रूप से अखबारों की काॅपियां क्यों मांगी जा रही है।
माननीय एक बार को इसे भी नजर अंदाज कर दिया जाए तो सवाल यह है कि डीएवीपी लघु व भाषाई समाचार पत्र संचालकों को कोई बडी तादाद में विज्ञापन तो दे नहीं रही है। ऐसे में बडी समाचार एजेंसियों की सेवा हजारों रूपये खर्च कर ली नहीं जा सकती। समाचार पत्र संचालक सक्रिय भूमिका निभाते हुए जोड़तोड के माध्यम से राष्ट व जनहति और सरकार की उपलब्धियों व मंत्रियों की घोषणाओं के समाचार ढूंढकर अपने समाचार पत्रों में प्रकाशित कर जनता तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। लेकिन डीएवीपी के अधिकारियांे को सरकार के हित का यह प्रयास भी पसंद नहीं है। इसलिये पूछा जा रहा है कि बताएं समाचार प्राप्त करने के स्त्रोत क्या है।
माननवर इतना ही नहीं अगर जांच करायी जाए जिन विषयों को लेकर डीएवीपी के अधिकारी जनरल में समाचार पत्र संचालकों को परेशान कर रहे हैं उन्ही बिंदुओं से संबंध कुछ समाचार पत्रों की मान्यता इनके द्वारा रिनूवल भी की जा चुकी है ऐसी खबरे मौखिक रूप से सुनने को मिल रही हैं।
कुल मिलाकर पीएम साहब कहने का आशय सिर्फ इतना है कि जब सरकार से डीएवीपी विभाग विज्ञापन हमे दिलाना नहीं चाहता सुविधा वो कोई देने को तैयार नहीं। लेकिन समाचार प्रकाशन के मामले में हमसे वो सब व्यवस्थाएं बडे अंगे्रेजी उन अखबारों के समान करोड़ो रूपये विज्ञापन के नाम पर इस विभ्ज्ञाग द्वारा दिये जा रहे हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी जी व केंद्र सूचना मंत्री राज्य वर्धन राठौर जी आल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना के राष्टीय उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा द्वारा की गई इस मांग से मैं पूर्ण रूप से सहमत हूं कि ब्यूरों आॅफ आउटरिच एडं कम्यूनिकेशन (डीएवीपी) के अधिकारियों द्वारा लघु और भाषाई समाचार पत्र संचालाकों के विरूद्ध अपनाई जा रही दोहरी नीति को बंद कराया जाए।
तथा सरकार की उपलब्धियों व मंत्रियों की घोषणाओं के जनहित के समाचार प्रकाशन के मामले में विभिन्न प्रकार के अडगे लगाकर परेशान न किया जाए तथा इस विभाग के विज्ञापन वितरण ओर मान्यता देने से संबंध अफसरों की कार्यप्रणाली की बीतीे पांच साल की जांच करायी जाए। और जिन समाचार पत्रों की अभी तक इनके द्वारा मान्यता रिनूवल नही की गई है उनमंे अनुसार वो समाचार प्रकाशित हो रहे हैं और सरकार की नीतियों का पालन कर रहे हैं उन्हे बिना परेशान किये उनकी मान्यता रिनूवल की जाए।
तथा देश की आजादी और विकास से समबंध तथा वाले लघु व भाषाई सामाचार पत्रों को बढावा देने के साथ साथ इनके संचालकों का हर प्रकार का उत्पीड़न डीएवीपी के अधिकारियों द्वारा जो किया जा रहा है वो बंद किया जाए।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल  इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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