‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ से हटाए जा रहे 300 मगरमच्छ, भड़के लोग तो सरकार ने बताई ये वजह

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नर्मदाः गुजरात के नर्मदा में स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी का नजारा देखने के लिए रोज 15 हजार प्रवासी पहुंचते हैैं. स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी के बनने के बाद नर्मदा जिले की यह जगह पर्यटकों के बीच काफी प्रख्यात हो चुकी है. और रोज पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही है. प्रशासन द्वारा पर्यटकों के लिए स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी आकर्षण का केंद्र बना रहे इसके लिए कई प्रकार की सुविधाएं बढ़ाई जा रही है और इनमे इजाफा किया जा रहा है. विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा को देखने के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए यहां तक पहुंचाने वाले सभी मार्गों को तैयार किया जा रहा है.

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कुछ समय पहले ही यहाँ हवाई मार्ग के साथ साथ जल मार्ग प्रोजेक्ट का आरम्भ भी हो गया है. दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्टस के अनुसार वाइल्डलाइफ बोर्ड के सदस्य प्रियाव्रत गढ़वी ने कहा कि मगरमच्छों को दूसरी जगह ले जाने के फैसले से पहले प्रशासन को वैज्ञानिक विश्लेषण कर लेना चाहिए था. जबकि अधिकारियों का कहना है कि नर्मदा जिले में स्थित प्रसिद्ध ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास दो तालाबों के मगरमच्छों को यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर स्थानांतरित किया जा रहा है.

यहां पर्यटकों के लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा पहले ही है, जिसका पर्यटक उत्साह पूर्वक आनंद ले रहे है और इससे स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी फ्लावर वेली का सामने से ही नहीं बल्कि आसमान से भी पूरा नजारा देखने मिल रहा है. अब आकाशीय मार्ग के बाद जल-आकाशीय मार्ग के लिए सी -प्लेन उतरने का प्रोजेक्ट भी आरम्भ कर दिया गया है. यह सी-प्लेन तालाब नंबर -3 में उतारा जायेगा. लेंकिन इस तालाब में 300 से ज्यादा मगरमच्छ रहते है. जिन्हे इस प्रोजेक्ट के लिए दूर करना जरुरी है.

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पर्यटकों और मगरमच्छों की सुरक्षा को देखते हुए वनविभाग नर्मदा द्वारा इन मगरमच्छों को पकड़ने की कवायद शुरू की गई है. इसके तहत तालाब के किनारे मगरमच्छ को पकड़ने के लिए पिंजरे रखे गए है. इस कार्य में वनविभाग को सफलता भी मिल रह है और अब तक 10 मगरमच्छ पिंजरे में आ चुके है.

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इन मगरमच्छों को नर्मदा बांध के मुख्य सरोवर में छोड़ा जा रहा है. इसी तरह वनविभाग द्वारा बाकि के सभी मगरमच्छों को भी यहां से हटाया जायेगा. जिस तालाब नंबर -3 में सरकार द्वारा सी-प्लेन उतारने प्लान है इसमें सबसे बड़ा जोखिम मगरमच्छ ही है और वनविभाग द्वारा युद्ध स्तर पर इन मगरमच्छों को हटाने का काम किया जा रहा है.

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