बड़ा गंभीर है सेवानिवृत्ति आयु का मामला, बहुत समझकर लिया जाए निर्णय

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28 नवंबर 2001 को राज्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 साल से बढ़ाकर 60 वर्ष किये जाने संबंधित अधिसूचना को कानून समिति अदालत द्वारा नहीं माना गया है। इस संदर्भ में भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सहायक आरके टेक की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिये गए फैसले के विपरीत शासन ने न्याय विभ्ज्ञाग को भेजने का फैसला किया है। अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल का कहना है कि आदेश की प्राति गत बुधवार को भेजी है जिसका अध्ययन कराया जा रहा है। न्याय विभाग के बाद आने के बाद कोई फैसला लिया जाएगा। दूसरी ओर कुछ लोगांे का कहना है कि यह आदेश सिर्फ भदोही औघोगिक विकास प्राधिकरण के संदर्भ में है। सभी विभागों के लिये नहीं।
मुझे लगता है कि माननीय न्यायालय जब कोई आदेश करता है तो उससे संबंध सभी मामलों पर शाायद लागू होता है। सही क्या है गलत क्या यह कानून विदों व सरकार के देखने का काम है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा सेवानिवृति की आयु 60 साल करने के आदेश को अवमाननीय घोषित कर 58 किये जाने के उच्च न्यायालय इलाहाबाद के फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार से इस प्रकरण में नयायालय के सामने विशेष अनुमति याचिका एसएलपी दायर करने की मांग की गई है। और पूरे तथ्य इस संदर्भ में रखने की वकालत की गई है। इसी क्रम में 18 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानमंडल के सत्र में एक विधेयक लाकर कर्मचारियों की सेवा नियुक्ति आयु पर स्थिति स्पष्ट करने की भी मांग राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी और महामंत्री वरण सिंह यादव ने की है। इनका कहना है कि सरकार ने न्यायालय के समक्ष समक्ष तथ्य नहीं रखें। सही क्या है गलत क्या है यह देखना सरकार औश्र कर्मचारी के नेताओं का काम है।
मगर मुझे लगता है कि बढती बेरोजगारी और तमाम परिवारों में हाथ पर हाथ काम ना होने के कारण धरे बैठे काबिल नोजवानों के हित को ध्यान में रखी जाए तो माननीय न्यायालय का आदेश न्यायपूर्वक है। हो सकता है है कि मेरी बात से कुछ कर्मचरी नाराज हो जाए। लेकिन हमे अपने हितों के साथ साथ हर परिवार में मोजूद काम योग्य युवकों जो कोई रोजगार न होने से गलत रास्तो पर पढ सकते है या हीनभावनाआंे का शिकार हो सकते हैं के बारे में भी सोचना होगा और उनहे रोजगार तभी मिलेगा जब पुराने सेवानिवृत्ति होगें।
मेरा मानना है कि सरकार द्वारा चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति उम्र जो 62 वर्ष की गई है उसे भी समाप्त कर 58 साल किया जाए। दूसरी ओर कर्मचारी नेताओ का यह तर्क तथ्य परक है कि अब कर्मचारी अब लोग 40 से 45 उम्र में सरकारी नौकरियांे में आ रहे हैं ऐसे में 58 साल में सेवानिवृत्त होने से मात्र 13 से 18 वर्ष ही नौकरी कर पाएंगे। तो मुझे लगता है कि जिन लोगों को 40 साल के बाद नौकरियां प्राप्त् ा होती ैं अगर न्याय संगत हो तो उनकी सेवानिवृत्ति उम्र 60 साल और समय से सरकारी नौकरी में आने वालों की 58 साल होनी चाहिये।
रही बात पहलेआम आदमी की उम्र औसतन 63 वर्ष हुआ करती थी मगर अब 77 वर्ष होने लगी है। तो इसमे तो यही कहा जा सकता है कि सेवानिवृतित्त के बाद आदमी अपने अनुभव का लाभ अपने बच्चांें को विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढाने और पोते पोती और देवते देवती को पढाने औश्र खिलाने के साथ साथ उन्हे स्वस्थ्य बनाने के अतिरिक्त इस बात में ध्यान लगाए गए की वो गलत मार्ग पर ना निकल पाएं।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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