राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसने का लें संकल्प

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देश में नववर्ष अप्रैल माह में मनाने के पक्षधर लोगों की देश में सरकार है। उसके बावजूद हर जगह अंग्रेजी के हिसाब से मनाए जाने वाले नववर्ष 2019 का स्वागत और बीते वर्ष 2018 की विदाई की जोरदार तैयारी चल रही है। इसे हम केंद्र व प्रदेशों की सरकारों के उद्धारवादी रवैये के रूप में भी देख सकते हैं।
ग्रामीण कहावत बैंगल किसी को पच किसी को कुपच के सामान वर्ष 2018 में  राजनीतिक सामाजिक धार्मिक आदि के क्षेत्र में कुछ घटनाएं महत्वपूर्ण घटी और कुछ होने की तैयारियों में थी को भी इसी प्रकार से देखा जा सकता है। क्योंकि अगर कुछ प्रदेशों में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को नुकसान हुआ तो कांग्रेस को फायदा। इसलिये खटटी मिटटी घटनाओं के बीच बीता वर्ष फिर भी कुल मिलाकर अच्छा कहा जा सकता हैं क्योंकि हम भारतवासी हर क्षेत्र और मामले में आसावान होते हैं। उस दृष्टि से अगर हमारे साथ कुछ हुआ तो उसमे भी हम अच्छा ही ढूंढ लेते हैं और आगे जो होगा वो अच्छा होगा की सोच को आत्मसार करते हुए बीते वर्ष की विदाइ्र और आगामी वर्ष का स्वागत जोरदार तरीके से इस आशा के साथ कर रहे हैं कि हमारे जीवन में उपर वाले ने जो लिखा है उस हिसाब से सबकुछ अच्छा ही अच्छा होगा। क्योंकि बुरा सोचने की गुंजाईश नहीं है और रचनात्मक उर्जा भरी सोच लेकर चलेंगे तो सब अच्छा ही होगा।
लेकिन मैं खासकर देश की सरकार चला रही पार्टी और उसके नेताओं से एक बात जरूर कहना चाहता हूं कि वों राष्ट समाज और अपने हित में सक्रिय हों तथा सरकार जो जनहित की योजनाएं बना रही हों उनका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करने के साथ साथ अपने अधिकारों के लिये भी सक्रिय हों। और शासन की योजनाएं पात्र व्यक्ति तक संबंधित विभाग के अफसर समय और सरलता से पहुंचाए इस बात का ध्यान रखते हुए ईमानदार और अच्छी छवि के अधिकारियों को पूर्ण सम्मान और आदर देते हुए सरकार की ईमानदार शासन और प्रशासन देने की नीति के विपरीत जाकर भ्रष्टाचार व बेईमानी को बढ़ावा देते हुए सरकारी पैसे का दुरूपयोग और शासन की नीति व नियमों को तोड़ मरोढ़कर अपने हित में उनका उपयोग करने वालें नौकरशाहों के खिलाफ आवाज बुलंद करने में कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिये। केंद्र व प्रदेश की सरकार तथा भाजपा और उसके सिपे सलाहाकारों एवं कार्यकर्ताओं के लिये यह बात अत्यंत जरूरी है।

मेरा मानना है कि जब तक राजनीतिक दलों के स्थानीय नेता व कार्यकर्ता सक्रिय नहीं होगे तब तक कोई भी सरकार जनहित के वादे और इरादे आसानी से पूरे कर सकती है इसलिए पार्टी को जीताने वाले रातदिन कार्य करने वाले जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की कोई सुनने वाला नही। इसलिये आओ 2018 में जो विफलताएं हुई उससे सीख लेकर अपने देश और सरकार की छवि को उज्जवल और जनहित की बनाए रखने का इरादा लेकर भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसने के संकल्प के साथ नववर्ष 2019 का स्वागत करें यही वक्त की मांग है और हमारी आवश्यकता भी है।

– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – ऑल  इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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