भगवान की जाति को लेकर बवाल क्यों?

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महापुरूषों की कोई जाति नहीं होती ईष्ट देव तो सभी के अराध्य हैं जहां तक मैं जानता हूं राजा हो या रंक। भिखारी हो या उद्योगपति किसान हो या व्यापारी दलित हो या सवर्ण। सबके लिये भगवान एक है। उनकी निगाह में भी वर्ग और जाति का कोई महत्व नहीं है। हमारी धार्मिक भावनाओं से जुड़े भगवान कोई भी हों वो सबको अपना आशीर्वाद एक समान देते हैं। कुछ दिन पहले तक तो यही सुनने को मिलता था वो बात और है कि कुछ धार्मिक संस्थानों में कार्यरत बड़े लोगों से संपर्क बनाने या धनवानों को सम्मान देने के लिये सारी धार्मिक भावनाओं को त्याग कर कुछ नियम ऐसे बना दिये गए हैं जिनसे दुराब और अलगाव की भावना पैदा होती है।
खैर इसमे क्या होना चाहिये क्या नहीं। यह देखना समाज और उसके प्रमुख चाहे वो किसी भी वर्ग या जाति के हो नागरिकों का देखना है मैं तो सिर्फ यह कह सकता हूं कि वीर बजरंग बली संकट मोचन हनुमान जी महाराज को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है वो नहीं होना चाहिये था। तथा धर्म और ईष्ट देवों की गरिमा बनाए रखने हेतु सभी राजनीतिक दलों और संगठनों चाहे वो किसी भी क्षेत्र में सक्रिय क्यों न हों को चाहिये कि वो स्वयं अपने कार्यकर्ताओं से कहे कि वो ऐसे मुददे को उछालने से दूर रहें।

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उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा दूसरे प्रदेश में जाकर संकट मोर्चन हनुमान जी महाराज को दलित क्यों बताया गया यह तो वही जान सकते हैं। लेकिन उसके बाद जो अब विवाद खड़ा हो रहा है उसे ठीक नहीं कहा जा सकता। मुख्यमंत्री जी एक बयान देकर स्पष्ट करें कि उन्होंने हनुमान जी को दलित किस संदर्भ में कहा और आदेश करे कि कोई भी अब भगवान चाहे हनुमान जी हो या महर्षि वाल्मीकि कृष्ण हो या राम। शिवजी हो या हनुमान अथवा किसी और जाति संप्रदाय के धार्मिकजनों के बारे में कोई भी गलत बात ना कही जाए और अगर कोई कहता है तो सरकार की तरफ से देश हित और शांति तथा भाईचारा औश्र सदभाव बनाए रखने के लिये उस पर रोक लगाई जाए और भगवान के बारे में गलत संदेश देने वाले की बात को प्रतिबंधित की जाए।

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कथन के बाद उनके ही प्रदेश के एक जिला मुजनगर में सिद्धपीठ संकट मोचन हनुमान मंदिर को लेकर जो हुआ वो किसी से छुपा नहीं है। मगर इससे भी आगे जाकर बहराइच से भाजपा सांसद सवित्री बाई फूले के द्वारा फोन पर पत्रकारों से कहे गए शब्द जो उनके हवाले से अखबारों में छप रहे हैं कि हनुमान दलित थे और मनुवादियों के गुलाम। से नागरिकों की भावनाएं आहत हो रही है। भाजपा नेतृत्व को चाहिये कि वो ऐसे बयानों को देने से पहले अपने सांसदों व विधायकों को जनहित में रोके क्यों कि कभी भी यह बातें बवाल का कारण बन सकती है। इस बात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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