गरीब महिलाओं को जबरन सरोगेसी के धंधे में धकेलने से रोकेगा नया कानून, चिकित्सकों ने किया स्वागत

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नई दिल्ली। लोकसभा में ध्वनिमत से पारित Surrogacy (नियामक) विधेयक, 2016 का चिकित्सकों ने स्वागत करते हुए कहा कि व्यावसायिक Surrogacy एक धंधा बन गया है और कुछ गरीब महिलाओं को जबरन इस धंधे में धकेला जा रहा है। इतना ही नहीं Surrogacy (किराए की कोख) कुछ Celebrities के लिए एक शौक बन गई है और जो पहले ही संतान को जन्म दे चुके हैं वे भी सरोगेसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Fertility Solution Medicare Fertility की क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसलटेंट डॉ. ेता गुप्ता ने बताया, आमतौर पर गर्भधारण में परेशानी होने की वजह से दंपति सरोगेसी की मदद लेते हैं। इस प्रक्रिया में पुरु ष के स्पर्म और स्त्री के एग को बाहर फर्टिलाइज करके सरोगेट मदर के गर्भ में रख दिया जाता है।

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हालांकि, Surrogacy का मकसद जरूरतमंद निसंतान जोड़ों की मदद करना था, मगर धीरे-धीरे कुछ लोगों ने इसे पूरी तरह से व्यावसायिक बना दिया है। उन्होंने कहा, अब तो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दर्द से बचने के लिए इस आसान रास्ते का इस्तेमाल करने लगी हैं। सरोगेसी कुछ Celebrities के लिए एक शौक बन गया है और जिनके पास बेटे और बेटियां हैं वे भी सरोगेसी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत में तेजी से बढ़ रहा कारोबार

देश में सरोगेसी के बढ़ते कारोबार के सवाल पर डॉ. गुप्ता ने कहा, पिछले कुछ सालों से भारत में सरोगेसी का कारोबार बहुत तेजी से बढ़ा है। आकड़ों के अनुसार हर साल विदेशों से आए दंपति यहां 2,000 बच्चों को जन्म देते हैं और करीब 3,000 क्लीनिक इस काम में लगे हुए हैं।

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इतना आता है खर्च
भारत में इसका खर्च 10 से 25 लाख रपए के बीच आता है, जबकि अमेरिका में इसका खर्च करीब 60 लाख रुपये तक आ सकता है।

एक बार ही दे सकते हैं जन्म

सरोगेसी के माध्यम से महिला कितनी बार बच्चे को जन्म दे सकती है, इस पर डॉ. श्वेता ने कहा, सरकार ने जो कानून पारित किया है उसके अनुसार एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी। इसके लिए उसका विवाहित होना और पहले से एक स्वस्थ बच्चे की मां होना जरूरी है। उन्होंने कहा, सरोगेसी करवाने वाले पुरुषों की उम्र 26 से 55 के बीच और महिला की उम्र 23 से 50 साल के बीच होनी चाहिए। शादी के पांच साल बाद ही इसकी इजाजत होगी और यह काम रजिस्टर्ड क्लीनिकों में ही होगा।

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नया कानून बनने के बाद नहीं हो सकेगा शोषण

लोकसभा में पारित सरोगेसी विधेयक से सरोगेसी पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या प्रभाव सामने आएंगे?इस सवाल पर गुप्ता ने कहा, नए कानून के बाद मजबूर महिलाओं के सरोगेसी के लिए शोषण की गुंजाइश नहीं रहेगी। सरकार देश में सरोगेसी को रेगुलेट करने के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है। सरोगेसी का प्रावधान केवल नि:संतान दंपतियों के लिए होगा। सरोगेसी के अनैतिक इस्तेमाल पर रोक लगेगी, गरीब महिलाओं की कोख किराए पर लेना गुनाह होगा।

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