Smartphone और Computer चलाते समय आपके सिर में हो रहा है दर्द तो हो जाएं चौकन्ने!

21
loading...

वाशिंगटन। वैज्ञानिकों को यह पता लगाने में सफलता हासिल हुई है कि स्मार्टफोन एवं कंप्यूटर से निकलने वाली कृत्रिम रोशनी कैसे आपकी नींद को प्रभावित करती हैं। अब इन परिणामों के जरिए माइग्रेन, अनिद्रा, जेट लैग और कर्काडियन रिदम विकारों के नये इलाज खोजने में मदद मिल सकती है।

अमेरिका के साल्क इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि आंखों की कुछ कोशिकाएं आस-पास की रोशनी को संसाधित करती हैं और हमारे बॉडी क्लॉक (कर्काडियन रिदम के तौर पर पहचान पाने वाली शारीरिक प्रक्रियाओं का रोजाना का चक्र) को फिर से तय करती हैं।

इसे भी पढ़िए :  पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को थायरॉयड होने का खतरा है ज्‍यादा, आज ही कराएं टेस्‍ट

ये कोशिकाएं जब देर रात में कृत्रिम रोशनी के संपर्क में आती हैं तो हमारा आंतरिक समय चक्र प्रभावित हो जाता है नतीजन स्वास्य संबंधी कई परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। अनुसंधान के परिणाम ‘‘सेल रिपोर्ट्स’ पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

इसे भी पढ़िए :  बेबी फिल्टर में बेहद क्यूट लगीं दीपिका, रणवीर सिंह ने शेयर की तस्वीर

इनकी मदद से माइग्रेन (आधे सिर का दर्द), अनिद्रा, जेट लैग (विमान यात्रा की थकान और उसके बाद रात और दिन का अंतर न पहचान पाना) और कर्का-डियन रिदम विकारों (नींद के समय पर प्रभाव) जैसी समस्याओं का नया इलाज खोजा जा सकता है। अनुसंधान-कर्ताओं के मुताबिक इन विकारों को संज्ञानात्मक दुष्क्रिया, कैंसर, मोटापे, इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध, चयापचय सिंड्रोम और कई अन्य बीमारियों से जोड़ कर देखा जाता रहा है।

इसे भी पढ़िए :  खाना खाते ही सो जाते हैं आप, तो हो सकते हैं गंभीर रूप से बीमार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

one × one =