रोम जल रहा था निगरो बंसी बजा रहा था से बाहर निकलकर एमडीए के अधिकारी अवैध निर्माणों के खिलाफ करे कार्रवाई

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कमिश्नर और डीएम ने अपनाया सख्त रूख, मानचित्र के विपरीत
बने होटल होंगे सील, एमडीए के अधिकारी भी दें ध्यान!

अलीगढ़/लखनउ/मेरठ 6 दिसंबर। अवैध व मानचित्र के विपरीत सामदाम दंड भेंड की नीति अपनाकर विकास प्राधिकरण के अवैध निर्माण से संबंध अफसरों की मिलीभगत से जो मानचित्र में फर्जीवाड़ा कर होटल और काॅमर्शियल काॅमपलैक्स बनाने का सिलसिला जारी है उसका एक बड़ा खुलासा अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में नक्शों में फर्जीवाड़ा कर बनाए गए होटलों आदि के रूप में खुलकर सामने आया है। यहां के कमिश्नर और जिलाधिकारी ने मामले केा गंभीरता से लेते हुए इन्हे तुरंत सील और ध्वस्त करने के फरमान जारी कर दिए है।
मगर यह कितने ताज्जुब की बात है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के ज्यादातर अधिकारी अवैध निर्माणकर्ताओं को बचाने और मानचित्र के विपरीत होटल और व्यावसाियक काॅम्पलैस व नर्सिंग होम बनाने तथा कच्ची कालोनियों को काटने वालो को बचाने के लिये ऐढ़ी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं। ऐसा नहीं हे कि इन गलत निर्माणों की जानकारी वीसी एमडीए को न हों। मगर आये दिन समाचार पत्रों में खबर छपने के बावजूद वो इस ओर से आंखे मूदे क्यों बैठे हैं और जो शिकायतें आती है उन पर कार्रवाई की खानापूर्ति करने के लिये आदेश कर भूल जाते हैं जिस कारण अवैध निर्माण और अतिक्रमण तथा कच्ची कालोनियां काटने ओर मानचित्र के विपरीत निर्माणों का सिलसिला यहां युद्ध स्तर पर चल रहा है इसके उदाहरण के रूप में थाना लालकुर्ती के क्षेत्र पीएल शर्मा रोड पर स्थित किंग ब्रेकरी पर हुए और इस सड़क पर हो रहे अवैध निर्माणों के साथ ही शहर के तमाम गली मोहल्लों में इसके उदाहरण देखने को मिल सकते हैं।

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नागरिकों का कहना है कि मानचित्र के विपरीत और अवैध निर्माण तथा सरकारी भूमि पर कब्जे का काम एमडीए के अधिकारियों के लिये बैंक बैलेंस बढाने का साधन बन गया है। एक सज्जन जो मेरठ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली से बुरी तरह पीड़ित आए का मौखिक रूप से यह कहना कि समय अनुकूल नजर आया कि एमडीए के अफसरांे का हाल उस कहावत जैसा हो गया है। कि रोग जल रहा था निगरोह बंसी बजा रहा था। इस संदर्भ में थोड़ा विस्तार से चर्चा करते हुए एक अन्य सज्जन का कहना था कि वीसी साहब! गाना बजाने को प्रोत्साहन देने और कार्यालय में बैठक कर बतियाने में लगे हैं और शहर अवैध निर्माणों का अड्डा बनता जा रहा है।

दूसरी ओर इसी प्रकार अलीगढ़ महानगर में कई होटल संचालकों ने एडीए से साठगांठ कर नर्सिग होम व आवास के नाम पर नक्शा पास कराकर होटलों का निर्माण करा लिया गया है, जो नियम विरुद्ध अवैध है इसकी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को हुई तो एडीए ने शहर के 24 होटलों को सीज करने के लिए इन के संचालकों को नोटिस तामील करा दिए हैं। इस से होटल संचालकों में खलबली मच गई है। होटल संचालकों ने एक कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री को बुलाकर प्रशासन और एडीए पर दबाब बनाने का भी प्रयास किया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हुए। तो डीएम ने भी तल्ख तेवर दिखाते हुए अवैध होटल के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। अलीगढ़ को स्मार्ट सिटी घोषित किए जाने के बाद शहर को सुन्दर बनाने के उद्देश्य से मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी के अलावा विकास से सम्बन्धित अन्य अधिकारियों व नगर निगम और एडीए द्वारा मंथन किया गया। जाम की स्थिति को देखते हुए।

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अलीगढ़ मंडल के कमिश्नर और डीएम द्वारा इस संदर्भ में उठाए गए सख्त कदमों और लिये गए निर्णयों के बाद अब यह कहा जा सकता है कि मिल रही शिकायतों के आधार पर मेरठ मंडलायुक्त और जिलाधिकारी भी अपने यहां फर्जी और गलत तरीके से बने विवाह मंडपों, होटलों व स्कूलों तथा अन्य व्यावासियक इमारतों की जांच कराकर कार्यवाही हेतु प्रयास शुरू करायेगें।

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क्योंकि अलीगढ़ के मामले में प्रदेश सरकार से भी नक्शे के विपरीत और अवैध निर्माण करने वालों को कोई राहत नहीं मिल पाई हैं तथा जिले के प्रभारी मंत्री ने भी इस संदर्भ में अवैध निर्माणकर्ताओं को कोई आश्वासन नहीं दिया जो इस बात का सबूत कहा जा सकता है कि सरकार भी अवैध निर्माणर्ताओं या मानचित्र के विपरीत निर्माण कर्ताओं को बढ़ावा देने के मूंड में नहंी है। रही बात विभिन्न निस्वार्थाें के लिये कुछ स्थानीय नेताओं के द्वारा फर्जीवाड़ा कर अवैध रूप से नित स्वार्थो के लिए भवन बनाने वालों को समर्थन देने की तो वो सरकार से बडे नहीं है। अधिकारियों को नियम और निति अनुसार शहरहित में काम करना होगा। क्योंकि शहर में लगने वाले जाम के लिये सबसे बड़ी समस्या अवैधनिर्माण ही बताए जाते हैं अफसरों को सांठगांठ कर इनके संचालकों को बचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अब मेरठ में भी करनी होगी।

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