नेता जी आप हमें आलसी और मुफ्तखोरा क्यो बना रहे हैं?

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यह किसी से छिपा नहीं कि किसानों का कर्ज बिजली के बिल माफ करना और मुफ्त सामान बांटना कोई आसान काम नहीं है और कोई भी सरकार हो या नेता। सब जानते हैं कि यह संभव भी नहीं है। उसके बावजूद ज्यादातर राजनीतिक दल जब जब चुनाव आते हैं तो जनता को आकर्षित करने के लिये कर्ज माफ करने और मुफ्त अनेक प्रकार का सामान उपलब्ध कराने की बातें करते हैं। इनका कथन कितना सही होता है इसका अंदाजा तो मतदाता पिछले पांच दशक में जो घोषणाएं इन नेताओं द्वारा की गई उनको याद कर लगा सकते हैं कि कितनी पूरी हुई और कितनी नहीं।
देशभर में अनेक प्रदेशों में भाजपा की सरकार है तो कहीं कांग्रेस की । कहीं तृणमुल कांग्रेस की है मगर जहां तक सुनने और पढ़ने को मिलता है वहां तक यही पता चलता है कि चुनाव के दौरान लोक लुभावने नारे और झूठे वादे कर राजनीतिकों द्वारा वोटरों को आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है जो सही नहीं है।
क्योंकि एक तो यह वादे पूरे नहीं हो सकते हैं दूसरे हम अपने नागरिकों को स्वालंबी और स्वाभिमानी बनाने के बजाए मुफ्तखोर और आलसी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। और यह बात किसी भी रूप में आम नागरिकों या देश के हित में नहीं है।
मुझे लगता है कि राष्ट्र और मानव हित में राजनीतिक दलों को जो वादे और घोषणाएं वो पूरे नहंी कर सकती है वो नहीं करने चाहिये। और अगर चुनाव या उससे एक दो माह पूर्व ऐसे वादे कोई भी पार्टी करती है तो भारत निर्वाचन आयोग को उसके विरूद्ध करनी चाहिये सख्त कार्यवाही।
नेता जी आप हमें रोजगार और रोटी के लिए व्यापार देने के बजाय मुफ्तखोरा और आलसी क्यो बना रहे है।

– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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