अखिलेश जी आपका कथन जम नहीं रहा है राहुल गांधी को आगे लाए और चुनावी मैदान में उतार जाईये!

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2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में सत्ता प्राप्ति के लिये भाजपा और उसे हटाकर खुद सरकार बनाने के लिये प्रयासरत कांग्रेस अन्य क्षेत्रीय दलों में एकता के नाम पर महामैराथन जारी है। वर्तमान में सत्ताधारी पार्टी में प्रधानमंत्री के पद को लेकर शायद कोई विवाद नहीं है। क्यांेकि पीएम नरेंद्र मोदी और उनके सर्वमाननीय उम्मीदवार हैं और अगर कुछ बदलाव होता है तो उनकी पूर्ण सहमति से होगा इससे इंकार नहीं किया जा सकता रही बात कांग्रेस की तो सबसे बड़ा दल इस समय विपक्ष में होने के चलते प्रधानमंत्री के रूप में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिये। लेकिन यह जानते हुए कि उस समय के मुकाबले इस बार भाजपा की वो लहर नहीं है और ऐसे में कांग्रेस के जीतकर आने वाले सांसदों की संख्या में बढोतरी होगी। के बाद भी गठबंधन में शामिल होने के इच्छुक दल प्रधानमंत्री के रूप में राहुल गांधी को चुनाव में सामने रखकर वोट मांगने के लिये तैयार नहीं है। और कांग्रेसी भी कुछ ऐसी ही राय व्यक्त कर रहे हैं। तो सवाल यह उठता है कि सत्ताधारी दल जो बार बार एक बात कह रहा है कि जिनके पास प्रधानमंत्री के रूप में पेश करने के लिये उम्मीदवार नहीं है उन पर क्या विश्वास किया जा सकता है का जवाब आखिर विपक्ष कैसे देना चाहता है।
जबकि अभी तक किसी भी विपक्षी दल के मुखिया द्वारा पूर्ण विश्वास के साथ यह नहीं किया गया कि वो पीएम के उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच जाने को तैयार है जबकि राहुल गांधी यह कह चुके हैं कि अगर मुझे प्रधानमंत्री के रूप में जनता के बीच भेजे जाने पर सब सहमत है तो मुझे एतराज नहीं होगा ।
हमारे हर दिल अजीज युवा तुर्क नेता यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री सपा मुखिया अखिलेश यादव कह रहे हैं कि मुझे पीएम बनने की कोई महत्वकांक्षा नहीं है अब सवाल यह उठता है कि जब किसी को महत्वकांक्षा नहीं है और किसी में इतना आत्मबल नहीं है कि वो स्पष्ट रूप से कह सके कि वो पीएम बनना चाहता है तो गुगली घुमाने की बजाए और अपने मकसद में सफल होने के लिये सभी विपक्षी दल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को मुखिया मानकर यह तय करते हुए कि प्रदेशों में उनके हिसाब से सीटो के बंटवारे और मुख्यमंत्री तय हो तथा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने समीकरण के तहत टिकट बांटे और राहुल गांधी को प्रधामनंत्री के रूप में प्रस्तुत करे यह क्यों नहीं तय कर रहे हैं। अखिलेश जी जब आप प्रधानमंत्री बनने की इच्छा नहीं रखते तो है आगे बढकर सभी दलों को एक झंडे के तले लाकर महागठबंधन की घोषणा कराने में देर क्यों की जा रही है। और अगर कोई साथी आपकी बात नहीं मानता है तो आप कांग्रेस के साथ मिलकर अपने उम्मीदवार घोषित कर दें। चुनाव में अच्छे परिणाम 2019 में आपके समर्थन में खुलकर आने से कोई नहीं रोकता। मेरा उन दलों और नागरिकों से स्पष्ट कहना है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को अब कमजोर समझना छोडकर एक मजबूत विपक्ष की आधारशिला ररखने में सब सहभागी बनें। और गठबंधन एकता को अपनी व्यंगवाणों और बयानों से छिन भिन्न करने में लगे नेताओं की हर बात को नजर अंदाज कर अपना एक मुखिया घोषित कर आगे बढें तो पता चलेगा की कुछ माह में जीएसटी और नोटबंदी तथा केंद्र सरकार के कुछ मंत्रालयों के निर्णयों से परेशान जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कार्यप्रणाली से संतुष्ट होने के बावजूद भी आपके साथ आकर खडी होगी। और चुनाव लडाने तथा वोट देने में और दिलाने में भी वो सहयोगी भूमिका निभाने में पीछे नहीं रहेंगे।
और अच्छा तो यह है कि आपातकाल के दोरान की घटनाओं को याद कर सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी को नेता मानकर सभी दल अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करने में देर न करें। सत्ता आपके इर्द गिर्द घूम रही लगती है। और अगर ऐसा नहीं है तो अखिलेश जी आपका यह कथन पीएम बनने की महत्वकांक्षा मुझे नहीं है ना तो गले उतर रहा है और ना ही जम रहा है।

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– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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