मुख्यमंत्री जी एसएसपी नोएडा के आदेशो पर लगाए रोक ,लाईसेंस देने के नाम पर मुखबिर बनाने की कोशिश उचित नहीं

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कई साल बाद माननीय न्यायालय के आदेश पर प्रदेश में शस्त्र लाईसेंस खोले गए। परिणाम स्वरूप नागरिकों ने जरूरतों के अनुसार असलाह लेने और लाईसेंस प्राप्त करने के लिये आवेदन करना शुरू कर दिया तो हमेशा ही जिस प्रकार ज्यादातर मामलों में पुलिस अपनी कमियां छिपाने और सभी सुविधाएं भोगने के बाद भी काम जनता से कराने की सोच बनाकर रखते हैं। मुझे लगता है कि इसी क्रम में एसएसपी नोएडा डा अजय पाल शर्मा और उनके सहयोगी शस्त्र प्राप्त करने के इच्छुक व्यक्तियों को दबाव डालकर उन्हे एक प्रकार से मुखबिर बनाने का भरपूर प्रयास कर रहे बताए जाते हैं। एक खबर के अनुसार शस्त्र लाईसेंस का आवेदन करने वालों से नोएडा के सीओ सिटी 2 राजीव कुमार आवेदकों से जो साक्षत्कार ले रहे हैं और उनमे पूछ रहे हैं कि इसका दुरूपयोग तो नहीं करोंगे। तथा पुलिस प्रशासन के पक्ष में रहने और समाजहित में कार्य करने के नाम पर कहीं भी कोई घटना अगर होती है तो पूछने पर पुलिस को पूरी सूचना देने के लिये राजी है तो प्रार्थना पत्र को आगे बढाया जाएगा वरना नहीं।
मेरा मानना है कि लाइ्रसेंस का दुरूपयोग न हो यह पूछा जाना बहुत अच्छा है। समाजहित में हर व्यक्ति हमेशा ही प्रशासन और पुलिस के साथ साथ जनप्रतिनिधियांें तथा पात्र व्यक्तियों के साथ खडा रहने के लिये तत्पर रहता है मगर लाईसेंस देने के नाम पर जो दबाव बनाने की कोशिश की जा रही बताई जाती है वो किसी भी रूप में उचित नहीं कहीं जा सकती। उससे ऐसा लगता है कि पुलिस एक प्रकार से अनकहे रूप में आवेदक को मुखबिर बनाने की कोशिश कर रही है। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी नागरिकों से सरकार और जनता के हित में हर प्रकार का सहयोग लेना और दिया जाना समाजहित और समय की मांग भी है इसमे किसी को पीछे नहीं रहना चाहिये और शायद ना ही आम नागरिक रहते हैं मगर जिस प्रकार से नोएडा के पुलिस अधीक्षक आवेदकों का रजिस्टर बनवाकर उसे सीओ और इंस्पेक्टर के आफिस में पूर्ण जानकारी के साथ रखवाकर यह तय कर रहे हैं कि हर व्यक्ति जो आवेदन कर रहा है जरूरत पड़ने पर वो सारे काम छोडकर पुलिस को सूचना देगा मांगने पर अगर किसी वजह से वो गलत होती है तो उसको बैड एंट्री मिलेगी।
कोई एसएसपी नोएडा साहब से पूछे आपको तो सारी सुविधा मिल रही है तब आपके सहयोगी पूर्ण रूप से जिस काम के लिये यह सब उपलब्ध है वो नहीं कर पा रहे है एक शस्त्र लाईसेंस देने के नाम पर आप आम आदमी को कैसे प्रतिबंधित कर सकते हैं किसी भी बात के लिये। उप्र के डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह को इस संदर्भ में ध्यान देना चाहिये और जनप्रतिनिधियों को भी मेरी निगाह में एसएसपी नोएडा डा अजय पाल शर्मा के द्वारा इस बारे में किये गए लिखित या मौखिक आदेशों की पूर्ण जानकारी प्राप्त कर अगर छपी खबर की बात सही है तो माननीय मुख्यमंत्री जी के समक्ष यह तथ्य रखकर लागू होने जा रही है इस व्यवस्था को रोकने का प्रयास शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिये।
हां शस्त्र लाईसेंस दिये जाने से पूर्व आप आवेदक का फिजिकल टैस्ट अपराधिक इतिहास भी पता करे इसमे किसी को शायद कोई एतराज नहीं है मगर सूचना प्राप्त करने के लिये जबरदस्ती उससे हामी भरवाना किसी भी रूप में ठीक नहीं। जागरूक नागरिक तो पहले ही सरकार शासन और पुलिस प्रशासन के आंख कान की भूमिका जनहित में निभाते ही हैं। तो फिर ऐसा दबाव क्यों?
मुख्यमंत्री जी अगर पुलिस को लगता है कि उनका तंत्र पूरी तौर पर काम नहीं कर रहा है तो वो पूर्व समय के अनुसार हर थाना क्षेत्र के गली मोहल्लों में अपने मुखबिर पैदा करें हर व्यक्ति को ऐसा बनाने की कोशिश उचित नहीं है।

 

– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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