विश्व की 18 करोड़ महिलाओं की नौकरियां पर मंडरा सकता है खतरा

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दुनिया की आधी आबादी महिलाएं आज पुरूषों से कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में चल रही हैं। तथा विकास और अन्य हर क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका इनके द्वारा निभाई जा रही है। सरकारें और जागरूक नागरिक हर तरह से इन्हे बढ़ावा देने और आगे आने का मौका उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में यह खबर काफी सोचनीय है कि विश्व में 18 करोड़ महिलाओं की नौकरी पर खतरा उत्पन्न होता दिखाई दे रहा है।
वाशिंगटन डेट लाईन से जारी खबर के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि स्वचालन यानी आटोमेशन जैसी नई प्रौद्योगिकियों से नियंत्रण स्तर पर महिलाओं से जुड़ी लगभग 18 करोड़ नौकरियां जोखिम में हैं। बीते दिनों आईएमएफ ने दुनियाभर के नेताओं से गुजारिश है कि वह महिलाओं को जरूरी कौशल प्रदान करें। ऊंचे पदों पर लैंगिक अंतर को कम करें, साथ ही कामगारों के लिए डिजिटल अंतर को पाटने के लिए भी काम करें। आईएमएफ और विश्व बैंक की होने वाली सालाना बैठक के दौरान जारी एक नोट में कहा गया है कि 30 देशों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बड़े पैमाने पर महिलाओं की नौकरियां जाने का अनुमान है।
इन 30 देशों में आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के 28 देश और साइप्रस एवं सिंगापुर शामिल हैं। नोट में कहा गया है कि नई प्रौद्योगिकी मांग को कम कर सकती है। इससे महिलाओं को रोजमर्रा के कार्याें के लिए कम पारिश्रमिक मिल सकता है जो श्रम बाजार में उनकी भागीदारी कम करने के दिनों को लौटा देगा। यह रपट प्रौद्योगिकी की मौजूदा स्थिति पर आधारित है। इससे पता चलता है कि अगले दो दशकों में नई तकनीक की वजह से इन 30 देशों के कुल 5.4 करोड़ श्रमिकों में 10 फीसद महिला और पुरुष की नौकरी पर सबसे ज्यादा खतरा बना रहेगा।
वैसे तो जिम्मेदार मंत्रालय और देश चला रहे जनप्रतिनिधि इस ओर से अनभिज्ञ नहीं होंगे मगर आम जनता में इस बात को लेकर चिंता उत्पन्न हो सकती है। और निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर आदी आबादी महिलाएं में खबर को लेकर किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न हो सकती है। देश के सवर्णिम विकास और हर परिवार में खुशहाली की व्यवस्था में लगी सरकारों के मुखियाओं कों जल्द से जल्द भविष्य में अगर ऐसी समस्या उत्पन्न होती है तो उसकी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के उज्जवल भविष्य आत्म सम्मान कायम रखने और उन्हे स्वलंबी बनाने के लिये ध्यान देकर कुछ ऐसी नीतियां बनानी चाहिये जिससे अगर ऐसी परिस्थिति आती है समाधान पहले से ही हो और किसी को परेशान न होना पड़ें।

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-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

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