वाहन निर्माता कंपनी वापस लें, प्रतिबंधित डीजल और पैट्रोल के वाहन!

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बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने की वर्तमान समय में अत्यंत आवश्यकता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा जो प्रयास इस संदर्भ में किये जा रहे हैं वो भी अत्यंत जरूरी हैं। इसलिये दस साल पूराने पेटोल और 15 साल पूराने डीजल वाहनों के प्रचलन पर रोक लगाने का आदेश पूरी तौर पर सही नजर आता है।
बताते चले कि 26 अप्रैल 2014 को ऐसा आदेश एनजीटी द्वारा जारी किया गया था। 7 अप्रैल 2015 को फिर प्रतिबंध लगाया गया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मगर सुनवाई के बाद डीजल चलित 10 साल और पेट्रोल चलित 15 साल पुराने वाहन पर पूर्णतः प्रतिबंद लगाने का आदेश जारी हुआ, लेकिन शायद इसका पालन नहीं हो रहा था। मगर अब जस्टिस मदन लोकुर, एस अब्दुल नजीद और दीपक गुप्ता की बेंच द्वारा दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति को बहुत चिंताजनक बताते हुए 10 साल पूराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाले वाहनों की सूची केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड व परिवहन विभाग की वेबसाइड पर प्रकाशित कराये जाने की बात सामने आयी। इन आदेशों का तुरंत पालन सुनिचित होना चाहिये और इसमे कोई कोतवाही न हो पाए इसके लिये जिम्मेदार विभागों की लगाम भी कसी जाए। और ऐसे वाहनों का विवरण सोशल मीडिया पर भी हो जिससे अगर यह कहीं चलते दिखाई दे तो जागरूक नागरिक इसकी सूचना एनजीटी व अन्य विभाग के अधिकारियों को दे सकें।
मगर इसी के साथ एक प्रशन यह भी सुरसा के मंुंह की भांति सामने है कि आखिर प्रतिबंधित वाहनों का होगा क्या और यह कहां जाएंगे। इस बात को दृष्टिगत रखते हुए एनजीटी और केंद्र सरकार को चाहिये कि वो वाहन निर्माता कंपनियों को राजी करें की जो वाहन प्रतिबंधित हो रहे हैं उन्हे वो उचित कीमत पर वापस ले। और मालिक को उसकी इंच्छा अनुसार अगर वो नया वाहन चाहता है तो पुराने वाहन की कीमत काटकर तथा अतिरिक्त पैसा लेकर नया वाहन दिया जाए और नहीं लेना चाहता है तो पुराने की कीमत उसके मालिक को दे दी जाए और वो अगर यह कंपनियां उन वाहनों के काम आने वाले पुर्जाें का उपयोग करें और बाकी को नष्ट कर दें जिससे भविष्य में इनसे प्रदूषण होने की संभावना पूरी तौर पर समाप्त हो जाए। जनहति में सरकार को वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के साथ साथ यह व्यवस्था भी हाथों हाथ तय करनी चाहिये जिससे भविष्य में कोई परेशानी खड़ी न हो और लोग अदालतों में जाकर न्यायालय और अपना दोनों का समय और पैसा नष्ट करने के लिये मजबूर न हों।

– रवि कुमार बिश्नोई
संस्थापक – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय समाज सेवी संगठन आरकेबी फांउडेशन के संस्थापक
सम्पादक दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम, मेरठरिपोर्ट.काॅम

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