45 की उम्र के बाद हर चौथी महिला की हड्डियों में पड़ रही जाली

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नई दिल्ली। दुनिया में तीन महिलाओं में से एक ओस्टियोपोरोसिस से पीड़ित है। भारत में अनुमान लगाया जाता है कि लगभग 50 मिलियन लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस होता है या कम हड्डी घनत्व द्रव्यमान होता है। देश में बढ़ते हड्डी रोग का बोझ तत्काल इलाज की मांग करता है। ऑस्टियोपोरोसिस के साथ रहना मुश्किल है। सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन (चीफ फुट एंड एंकल यूनिट, कोऑर्डिनेटर स्पोर्ट्स इंजेरी यूनिट, इंडियन स्पाइनल इंजेरीज सेंटर) डॉ. मनिंदर शाह सिंह कहते हैं कि जीवनशैली में परिवर्तन के साथ इससे लड़ने में आसानी होती है।

पौष्टिक आहार : विटामिन डी और कैल्शियम समृद्ध खाद्य पदार्थ हड्डी के लिए आश्र्चयजनक काम करते हैं। डेयरी उत्पादों, गहरे हरी रंग की सब्जियां- जैसे ब्रोकोली, हरी शिमला मिर्च, ओखरा इत्यादि, सोया उत्पाद, जैसे सोया दूध, टोफू 1 9-50 साल के आयु वर्ग में कैल्शियम वयस्क महिलाओं का बड़ा स्रेत हैं। कैल्शियम खायें- 1 9 -70 साल के पुरु षों को 1000मिलीग्राम कैल्शियम प्रति दिन होना चाहिए। 50 साल से ऊपर की उम्र के महिलाओं और 70 से अधिक पुरु षों को प्रति दिन 1200 मिलीग्राम कैल्शियम लेने की सलाह दी जाती है।

शारीरिक गतिविधि : वजन उठाने का अभ्यास युवाओं में हड्डी द्रव्यमान और खनिज सामग्री में सुधार कर सकता है। वृद्ध व्यक्तियों में हड्डी के द्रव्यमान को बनाए रखने में मदद करता है। ओस्टियोपोरोसिस उपचार विकल्पों के रूप में ताकत प्रशिक्षण, एरोबिक व्यायाम और मुद्रा जागरूकता की भी सिफारिश की जाती है।

सूरज की रोशनी का सेवन : सूर्योदय विटामिन सी का महान स्रेत है। कम से कम सुबह 5-10 मिनट के लिए सूरज की रोशनी में बैठें। धूप तेज होने से पहले यह हड्डी के स्वास्य में सुधार कर सकती हैं ।

धूम्रपान से बचें : किसी को धूम्रपान नहीं करना चाहिए, इसका स्वास्य और हड्डियों पर कई प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं।

शराब और कैफीन को न कहें : अल्कोहल और कैफीन दोनों हड्डी पर बुरा प्रभाव डालते हैं। ये जीवन शैली में परिवर्तन ओस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम कर सकते हैं और अच्छे स्वास्य को बढ़ावा दे सकते हैं।

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