क्यों गिर रही है भारतीय रूपए की कीमत? जरा सोचे!

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आखिर हम क्यों भूल गए स्वदेशी को, संघ प्रमुख, प्रधानमंत्री व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष दे ध्यान!

डाॅलर के मुकाबले रूपये के मुल्य में निरंतर आ रही कमी के पीछे क्या कारण है और उन्हे दूर क्यों नहीं किया जा रहा है यह देखना तो केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय का काम है। मगर 2014 में जब भाजपा ओर उसके सहयोगी दलों कि केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनी और तमाम प्रदेशों में इन्हे ही सत्ता मिल गई तब किसी ने यह सोचा भी नहीं था कि स्वदेशी को बढ़ावा देने वाले भाजपा सरकार में भी रूपए का मूल्य कम हो सकता है।
क्योकि पूर्व में जनसंघ और फिर उसका बदला हुआ रूप भारतीय जनता पार्टी के नेता व कार्यकर्ता शुरू से ही इंग्लिश व विदेशी सामानों का विरोध करते चले आ रहे है थे। इस क्रम में लगभग 1 दशक पूर्व तक हिंदी और अंग्रेजी के लगे बोर्ड इनके द्वारा तोड़े जाते थे तो विदेशी सामानों की होली जलाई जाती थी। इसलिये जब जमीन से जुड़े तथा भाजपा की नीतियों को पूर्ण रूप से जानने वाले नेता श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री जी बने तो यह लगा था कि अब विदेशी समान के इस्तेमाल में बढ़ोतरी होगी जिससे रूपए की कीमत बढेगी।
वर्तमान समय में कुछ प्रदेशों को छोड़ कर लगभग देशभर में भाजपा का ढंका पूज रहा है। और परचम लहरा रहा है। संघ परिवार भी मजबूत हुआ है। और हिंदू संगठन जो स्वदेशी के समर्थक थे उनका भी बोल बाला है। लेकिन स्वदेशी सामान का उपयोग कम विदेशी वस्तुओं की बिक्री निरंतर बढ रही है। जबकि होना यह चाहिये था कि संघ परिवार से जुड़े या उस जैसी विचार धारा रखने वाले संगठन एकत्रित होकर अपने नौ जवानों को विशेष तौर पर एक अभियान चलाकर वैचारिक क्रांति के माध्यम से यह समझाते की स्वदेशी का उपयोग हमारे लिये अपनी परम्पराओं को जीवित रखने और संस्कारों को बढ़ावा देने के साथ साथ राष्ट्रहित में स्वदेशी का उपयोग विदेशी वस्तुओं के मुकाबले किया जाना चाहिये और उसके लिये स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार प्रसार जो खासकर हमारे युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है को बढ़ावा दिया जा सकता था।
मैं वैसे तो आर्थिक नीति का मुझे कोई विशेष ज्ञान नहीं मगर मुझे लगता है कि अगर ऐसा होता है तो देश में स्वदेशी वस्तुओं का डंका पूज रहा होता क्योंकि अनेक समारोह और कार्यकमों में हमारे देशवासी बुजुर्ग महिला व नौजवान तथा बच्चे सब खादी के वस्तुओं को धारण किये और पूरे तौर पर हिंदूस्तानी परम्परा में रंगे नजर आते हैं तो ऐसे में सिर्फ थोड़ा सा बढ़ावा देने की आवश्यकता इन्हे थी। कमी कहां रही और उसके लिये दोषी कौन है? इस समय इस विवाद में पढने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जिस प्रकार से हमारे देश के रूपये का मुल्य घट रहा है ऐसे में सोचने की सबसे बड़ी बात तो यह है कि डाॅलर के मुकाबले इसका मुूल्य कैसे बनाए रखा जाए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी तथा संघ प्रमुख मोहन भागवत जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आदि प्रमुख स्वदेशी समर्थकों को इस ओर ध्यान देना होगा
मुझे लगता है कि अगर थोड़ा सा प्रयास किया जाए तो जिस प्रकार योग गुरू बाबा रामदेव द्वारा पंतजलि की निर्मित वस्तुएं जो हर क्षेत्र में पकड़ बना रही हैं चावल से लेकर तेल, टूथपेस्ट से लेकर दवाईयां, बिस्कुट व नमकीन की मांग सहित पतंजलि के उत्पादों का बाजार निरंतर बढ़ रहा है जो इस बात का प्रतीक है कि भारतीय नागरिक स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने में भी पीछे नहीं हैं।
ऐसे में मुझे लगता है कि भारतीय रूपए की शान को बनाए रखने और अपनी अर्थ व्यवस्था को सुद्रड़ करने वाले अन्य हमारे देश की सरकार को बाबा रामदेव जेसी सोच रखने हेतु उद्योगपतियों व खासकर सरकार के द्वारा संचालित फैक्ट्रियों में जो सामान किसी भी प्रकार के उपयोग के बनते है। उनकी गुणवता को बनाए रखने के साथ साथ अगर प्रचार प्रसार किया जाए तो स्वदेशी की मांग को बढ़ने से रूपए का मुल्य भी सुधर सकता है। वर्तमान समय में युवा हो या बुजुर्ग, महिला हो या बच्चे। खाने पीने की चीजों से लेकर कपड़े जूते व अन्य वस्तु भी ब्रांड और वो भी विदेशी कंपनियों की ज्यादा पंसद कर रहे हैं। और शायद यही कारण है कि हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले रूपए का मुल्य गिरने का हो सकता है। सरकार को इस ओर सबके हित में ध्यान देते हुए अगर उचित लगे तो देशभर के गांव देहातों व शहरों के स्कूलों में स्वदेशी के संदर्भ में विचार गोष्ठियां आदि आयोजित कर उसके लाभ ओर देश के हित में बताया जाए तो एक अच्छा माहौल वैचारिक कां्रति से बन सकता हैं
एक भारतीय देशभक्त नागरिक होने के लिये यह मैरी भी जिम्मेदारी है कि मैं जितना सहयोग इसमे कर सकता हूं मैं करू और इसलिये जो मुझे उचित लगता था वो मैं यहां दे रहा हूं। हो सकता है कि मेरे विचार में कुछ कमी हो या सही प्रकार से अपनी बात न रख पा रहा हूं।
मगर सीधी साधी गांव की भाषा में तो यही कहा जा सकता है कि जब हमारे देश में बने उत्पादों का स्तर बढ़ेगा तो पूरी दुनिया में रहने वाले भारतीय भी उनका उपयोग करेंगे परिणाम स्वरूप जिस प्रकार आज पूरे देश में विदेशी वस्तुएं बिक रही है हमारे स्वदेशी उत्पादों की बिक्री भी उसी प्रकार दिनया बढ़ सकती है जब ऐसा होगा तो हमारे रूपए का मुल्य जिस प्रकार डालर के मुकाबले कम हो रहा है उसी प्रकार बढ़ता चला जाएगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए संघ प्रमुख और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा प्रधानमंत्री को देशभर में एक संघन अभियान इस संदर्भ में चलाना चाहिये। क्येांकि पूरानी नीति भी उनकी यही रही है और उसके चलते सत्ता भी प्राप्त हुई। ऐसे में इस संदर्भ में प्रयास करने में कोई बुराई इस प्रकार से नजर नहीं आती है।

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-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

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