तीन करोड़ का हुआ भुगतान, नाला बना नहीं कैसे हो पानी की निकासी?

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रोहटा रोड के आंदोलनरत व्यापारी व निवासी तथा छात्र नेता दें ध्यान!

सवा लाख की आबादी वाले रोहटा रोड की गड्डो में बनी सड़क और जरा सी बारिश में वहां बन जाने वाले तालाब से उत्पन्न परेशानियों से छुटकारा हेतु आये दिन यहां के निवासियों बच्चों से लेकर बड़ों तक आंदोलन धरने प्रदर्शन तो किये ही जा रहे हैं पिछले दिनों कुछ जनप्रतिनिधियों की शवयात्रा भी निकाली गई और चेतावनी दी गई थी कि आगे बड़ा धरना प्रदर्शन किया जाएगा अगर समस्या का समाधान न हुआ तो।
गत दिवस 12 सितंबर को डीएन कालेज छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष सम्राट मलिक तथा पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष जयराज चपराणा आदि के नेतृत्व में शबाब आलम, मनीष कुमार, अनमोल त्यागी, अभिनव जावला, शुएब अली के अलावा काफी संख्या में नागरिकों ने प्रदर्शन कर अपने क्षेत्र की समस्या के समाधान की मांग की। जिम्मेदार अफसर उधर से जाते हैं या नहीं यह तो नहीं कहा जा सकता मगर जिस तरह से आंदोलन चलाया जा रहा है उसके बाद भी कोई पुख्ता व्यवस्था इस परेशानी का हल निकालने की नहीं की जा रही है उससे यह साफ जाहिर होता है कि या तो क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारी को निभाने में सफल नहीं या फिर उन्हे अपने विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों की समस्याओं की खबर नहीं बरहाल जो भी हो। मैं उधर से सप्ताह में दो चार बार निकलता हूं। कम बारिश में ही छावनी स्थित फलाई ओवर तथा वापिस फ्लाईओवर के बीच की सड़क एक तालाब सी बन जाती है। पानी भरा होने से इस सड़क पर नए आने वालों को गड्डों की जानकारी नहीं होती परिणाम स्वरूप यहां हादसे होना अब आम बात हो गई है। ओर यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि इस सड़क में इतने गड्डे हैं कि गडडो में सड़क ढूंढने से भी सही सलामत मिल पाना मुश्किल है। यह कहना भी न्याय उचित है कि अगर इस सड़क पर गर्भवती महिला को रिक्शा या चैपहिया वाहन में लेकर समय से पहले घुमा दिया जाए तो शिशु जन्म या गर्भपात बिना किसी चिकित्सा मदद के हो सकता है।
कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि रोहटा रोड के नागरिक वाकई में संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के चलते नरकीय जीवन व्यतीत करने पर मजबूर है अगर यही स्थिति रही तो इस क्षेत्र में महामारी और घातक बीमारियां भी पैदा हो सकती है जिनकी ओर निरंतर व्यापारी, छात्र नेता, बच्चे ओर यहां के निवासी सबका ध्यान दिला रहे हैं लेकिन चैकाने वाली बात तो यह है कि लगभग 6 माह से इस सड़क की स्थिति बद से बदतर हो गई है और सुधार पूरी तरह शून्य ही दिखाई दे रहा जिससे नागरिकों को जलभराव आदि की समस्या से छुटकारा मिल सकें।
मैं किसी भी प्रकार की हिंसा अथवा उग्र प्रदर्शन का समर्थक तो नहीं हूं। लेकिन मुझे इस क्षेत्र से संबंध अधिकारियों की उदासीनता के चलते यह लगता है कि शांति प्रिय नागरिकों की बात उनके कानों तक नहीं पहुंच रही है शायद वह किसी बड़ी घटना के इंतजार में हैं।
पिछले दिनों माननीय न्यायालय द्वारा माॅबलांचिंग के दौरान होने वाली घटना को रोकने के निर्देश और आदेश स्पष्ट रूप से दिये गए। मगर सवाल यह उठता है कि ऐसे मामलों के लिये जिम्मेदार कौन है इसकी भी जांच करायी जानी चाहिये? क्योंकि कोई भी नागरिक न तो अपनी जान को बवाल लेना नहीं चाहता है और न हीं ऐसा कोई बवाल जिससे उसे कोई परेशानी हों।
मगर उसे नजर अंदाज कर माॅबलांचिंग जैसे मामलों के लिये एक प्रकार से अनकहे रूप में उसकी बात न सुन नागरिकों को प्रेरित किया जा रहा है। मेरी निगाह में यह बात सही नहीं है। जनप्रतिनिधि व अधिकारियों को रोहटा रोड के नागरिकों की इस समस्या की ओर ध्यान देकर सड़कों का निर्माण कराना चाहिये। अगर कोई समस्या आ रही है तो कम से कम उनके बीच जाकर उन्हे एक ठोस समाधान कराने का आश्वासन तो दिया ही जाना चाहियें। एक आग्रह मेरा रोहटा रोड के शांति प्रिय आंदोलनरत नागरिकों से भी है कि सड़कें अपने आप नहीं टूटती जलभराव या पानी की निकासी न होने से यह जल्द ही खराब हो जाती है और फिर सड़क कम गड्डे ज्यादा नजर आते हैं। इसके लिये हम लोगों को भी अपने अधिकार के प्रति जागरूक बरते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मिलाकर उनका ध्यान ऐसे मामलों के लिये पूर्ण जिम्मेदार सरकारी अफसरों की ओर दिलाकर अपना काम पुरा कराने के साथ साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी करानी चाहिये।
बताते चले कि पिछले वर्ष एमडीए में रोहटा रोड पर नाला बनाने का प्रस्ताव पास हुआ। एमडीए द्वारा उसका ठेका छोड़ा गया। चोकाने वाली बात तो यह है कि नाला बना नहीं जो थोड़ा बनाया गया तो उसके पानी की निकासी कहीं से नहीं दी गई परिणाम स्वरूप 10 प्रतिशत व विकसित नाले का निर्माण होने के बाद ही एमडीए के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलीभगत कर ठेकेदार का पूर्ण भुगतान तीन करोड़ से ज्यादा करा दिया और नाला बना नही। इसलिये पानी के निकासी की व्यवस्था इस सड़क पर नहीं है। मगर आंदोलनरत नागरिकों को पहले मंडलायुक्त या डीएम से मिलकर एमडीए द्वारा बिना नाला बनवाए तीन करोड़ के उपर तक का भुगतान किये जाने की जांच जो पूर्व कमिश्नर डा प्रभात कुमार द्वारा शुरू करायी गई थी उसकी फाईल को खुलवाकर अपने नाले का निर्माण पूरा कराने और दोषी अधिकारियों तथा दोषियों को बचाने के लिये जिम्मेदार अफसरों के विरूद्ध कार्रवाई कराए जिससे भविष्य में कोइ्र भी किसी भी क्षेत्र के विकास के लिये आए पैसे की बंदरबांट न कर पाए।
-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

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