सांसद और विधायकों के पुतलों की क्यों निकली जा रही शवयात्रा?

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भाजपाई दें ध्यान! पूर्व विधायक जिला, महानगर, मण्डल व वार्ड अध्यक्ष व सत्ताधारी पार्टी के नेता क्या कर रहें है

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा नागरिकों को गड्ढा मुक्त सड़क व गंदगी से मुक्त माहौल उपलब्ध कराने का वादा चुनाव से पूर्व किया गया था। लेकिन जितना दिखाई देता है उसके अनुसार कुछ बड़े अफसरों के घरों के आसपास को छोड़ दें तो आम आदमी की बात तो दूर सांसद और विधायकों के घरों तक जाने वाले मार्ग बाजारों की सड़कें, गली मोहल्लों से लेकर किसी एक की बात तो मैं नहीं कहता मगर हाइवे तक गड्ढों से भरे पड़े है, और कहीं कहीं तो गड्ढों में सड़क भी मिलना मुश्किल है। ऐसे में जनता का उग्र होना कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि जब भाजपा उम्मीदवारों को वोट दी थी तो ये उम्मीद जागी थी की अब साफ सुथरा गंदगी से मुक्त माहौल व गड्ढे मुक्त सड़कें उपलब्ध होंगी।
लेकिन केंद्र सरकार के लगभग चार साल और प्रदेश सरकार के करीब डेढ़ साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी साफ सुथरा प्रदूषण से मुक्त माहौल और गड्ढा मुक्त सड़कें ढूंढने से भीं आम आदमी को नही मिल रही हैं, यह एक सपने जैसा लगने लगा है और कहीं-कहीं तो स्थिति बड़ी खराब है। ऐसे में आये दिन होने वाली बारिश से नाले.नालियों का गंदा पानी सड़कों पर आजाने और सड़क में मौजूद गड्ढों में भर जाना स्वस्थय के लिए तो हानी कारक हैं ही इनसे कई गंभीर बीमारियाँ फैलने का भी खतरा बढ़ा है। तो गड्डों में जो पानी भर जाता है उसमें गिर जाने से पीड़ित आखिर कब तक सयम बनाएँ रखे। अब धीरे-धीरे उनके सब्र का बांध भी टूट रहा हैए इसी का परिणाम है गत 29 अगस्त को जन कल्याण वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले रोहटा रोड के नागरिकों ने बड़ा प्रदर्शन कर क्षेत्र के विधायक व सांसद के पुतलो की बैंड-बाजों के साथ शव यात्रा निकली और चेतावनी दी गई की अगर उनके यहा सड़क सुधार नहीं हुआ तो 8 दिन बाद मुख्य मार्ग बंद कर देंगे तो 30 अगस्त को रोहटा रोड पर रहने वाले बच्चों ने भी प्रदर्शन कर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
मैं कभी भी जाम लगाने या उग्र आंदोलन करने का पक्षधर नहीं रहा, मगर सवाल यह उठता है की आम आदमी करे तो क्या करे । दूसरी तरफ अगर देखें तो पिछले चार दशक में मेरठ हापुड़ लोकसभा के सांसद श्री राजेन्द्र अग्रवाल जैसा दूसरा सांसद शायद ऐसा नहीं हुआ जो हमेशा जनता के लिए उपलब्ध रहते हो। लेकिन लोकसभा का क्षेत्रफल काफी बड़ा होने के कारण वो हर जगह रोज नहीं पहुँच पाते इससे उत्पन्न असंतोष प्रदर्शन व उग्र आंदोलन का कारण बन जाता है।
मगर मुझे लगता है कि यह सब इसलिए हो रहा है की सत्ता धारी पार्टी के नेता व कार्यकर्ताओं में तालमेल की कमी होने के साथ.साथ भाजपा नेता अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझ रहें हैं। लेकिन अगर पूर्व विधायक वार्ड और मण्डल से लेकर महानगर और जनपद अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी तथा प्रमुख नेता, और सांसद व विधायकों के प्रतिनिधि अधिकारियों के यहाँ अपने नीजी और अपने चहेतों के कार्यों के लिए चक्कर काटने के साथ-साथ अपने अपने क्षेत्रों की जनसमस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों से अपने मौहल्लों आदि के नागरिकों के साथ मुलाकात करें और उनकी परेशानी बताएँ तो मेरा मानना है की आधी से ज्यादा समस्याएं जनता की दूर हो सकती हैं, और सरकार व जन प्रतिनिधियों की छवि जो ऊपर दिये गए करणों से धूमिल हो रही है वो भी नहीं होगी उसमे सुधार भी होगा। मेरा मानना है की जनसमस्याओं के समाधान के लिए सांसद और विधायक, पूर्व विधायकों, जिला और महानगर व अपनी पार्टी के मण्डल और वार्ड के अध्यक्षों तथा प्रमुख नेताओं की महीने में एक बैठक कहीं सयुक्त रूप से कर लिया करें और अपने नेताओं व पद अधिकारियों को मोहल्लों में भेज कर जनता से संपर्क की व्यवस्था तय करे तो एक तो जन समस्याएँ दूर होंगी, दूसरे सत्ताधारी पार्टी का जनाधार बढ़ेगाए तीसरे उसे चुनाव के दौरान मतदाताओं को निकालकर बूथ तक ले जाने के लिए कार्यकर्ताओं की कमी नहीं पड़ेगी और सब से बड़ी बात जमीन से जुड़े नेताओं का भी समान व जनता पर पकड़ बनेगी जिससे संगठन मजबूत होगा।

-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

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