बढ़ रहा है गोद लेने का चलन, 1,991 बच्चों के लिए 20 हजार भावी माता-पिता

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नई दिल्ली। देश में गोद लेने का परिदृश्य यह है कि 1,322 लड़कियों सहित कुल 1,991 बच्चों के लिए 20 हजार से ज्यादा भावी माता-पिता हैं।सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगे गए एक जवाब के अनुसार गोद लेने के लिए सबसे ज्यादा बच्चे 376 महाराष्ट्र में उपलब्ध हैं। वहीं ओडिशा में 299 बच्चे गोद लेने के लिए उपलब्ध हैं। वर्ष 2017-18 में इन बच्चों की संख्या के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा गया कि यह संख्या 1,991 है जिनमें 1,322 लड़कियां शामिल हैं।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव राकेश श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों की कम संख्या होने का मुख्य कारण यह है कि बहुत से बच्चे ऐसे बाल देखभाल केन्द्रों में हैं जो Central Adoption Resource Authority (सीएआरए) से पंजीकृत नहीं हैं। बाल दत्तकग्रहण संसाधन सूचना एवं दिशानिर्देश तंत्र (Careings) के अनुसार भारत में एक बच्चे के लिए नौ भावी अभिभावक हैं। आंकड़ों के अनुसार इनमें से अधिकतर बच्चे 0-2 आयुवर्ग के हैं। इन बच्चों की कुल संख्या 417 है जिनमें 246 लड़कियां शामिल हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल देखभाल केन्द्रों से Caara से लिंक करने को कहा है ताकि गैरपंजीकृत केन्द्रों में रह रहे बच्चों को गोद देने की प्रक्रिया में लाया जा सके। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 4,000 बाल देखभाल केन्द्रों का पंजीकरण होना है।

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