अखिल भारतीय बिश्नोई मिलन की मांग, देशभर के स्कूलों में पढ़ाया जाए गुरू जम्भेश्वर जी एवं बिश्नोई समाज का गौरवशाली इतिहास

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दुनिया में जितनी भी जातियां और धर्म हैं। सभी सम्मानीय और आदर का प्रतीक हैं। इनमे से हर किसी से जुड़े किसी न किसी व्यक्ति अथवा समूह के द्वारा राष्ट्र हित में कोई न कोई ऐसा कार्य जरूर किया गया होगा जिससे उनके परिवार और समाज का नाम इतिहास के पन्नों में आदर और सम्मान के साथ अंकित होगा। राजस्थान के पीपासर में 1451 को राजपूत समाज के लौहाट पंवार तथा हंस्सा देवी के यहां पहलाद पंथी साथ भगवान विष्णु और कृष्ण के भक्त कहलाए गुरू जम्बेश्वर जी महाराज का जन्म हुआ के द्वारा दिये गए संदेश और उपदेश से प्रभावित विश्नोई समाज ने जो बलिदान वृक्ष और पशु सुरक्षा के लिये दिये वो किसी से छुपे नहीं हैं। वो बात दूसरी है कि हमारी सरकारों ने विश्नोई समाज के बलिदान को सही करके नहीं आंका। और इससे जुडे महापुरूषों के बारे में नई पीढी को समाजहित में अवगत कराने के लिये वो सब नहीं किया जो किया जाना चाहिये था। आज जिस पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने तथा वृक्षारोपण और हरियाली की स्थापना कर अनेक प्रकार के प्रदूषण से उत्पन्न बीमारियों से नागरिकों को बचाने के लिये विश्व भर में उल्लेखनीय प्रयास हो रहे हैं। उस पर्यावरण का श्री गणेश भगवान गुरू जम्भेश्वर जी महाराज के दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए बिश्नोई समाज द्वारा पहले ही किया जा चूका था। 1730 में 388 साल पहले 363 खजेड़ी वृक्ष को बचाने के लिये मारवाड़ के बाद खेजड़ी में यहां की निवासी अमृता देवी के नेतृत्व में विश्नोई समाज की महिलाओं द्वारा अपना बलिदान दे दिया गया था। तब से आजतक विश्नोई समाज पूरे देश में वृक्षों और जानवरों को बचाने तथा गुरू जी द्वारा दिखाए गए 29 नियमों पर चलकर जिन कार्याें से बचने का संदेश हमारी सरकारें और समाज का हर वर्ग दे रहा है उन पर चलने के लिये पहले से ही
पहचाना जाता है बिश्नोई समाज । गुरू जी के मार्गदर्शन में लगभग 400 साल पहले 1451 को बिश्नोई समाज के गुरू जम्भेश्वर जी द्वारा पर्यावरण का संदेश और इसका महत्व आम आदमी के जीवन में क्या है और भविष्य में क्या होगा? इसका एहसास करा दिया गया था। राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, हिमांचल, हरियाणा, उड़ीसा यूपी पंजाब आदि प्रदेशों में अलग अलग जगहों पर निवास करने वाले विश्नोई समाज को जितना महत्व राजनीतिक दलों व सरकारों को देना चहिये था वो नहीं दिया गया। इसके पीछे एक यह कारण भी हो सकता है कि यह समाज मांगने में कम और देने में ज्यादा तथा पर सेवा और जीव जन्तुओं की सुरक्षा में ही ज्यादा विश्वास करता है। मगर अब समय आ गया है कि हिंदी सहित अलग अलग जगहों पर अनेक भाषाओं का उपयोग करने वाले देश में मौजूद लगभग 10 लाख के करीब बिश्नोईयों की भावनाओं का आदर केंद्र व प्रदेश की सरकारों को करना चाहिये। भले ही इनकी तादाद कम हों लेकिन गुरूजी द्वारा प्रचालित
संदेशों और नियमों को विश्व के ज्यादातर लोग वो धर्मकर्म तथा ओरों की सेवा और जीव जंतुओं की सुरक्षा में विश्वास रखने वाले नागरिकों द्वारा माना जाता है इसलिये यह कहने में मैं कोई हर्ज महासूस नहीं करता हूं कि बिश्नोई समाज देश के अनेक प्रदेशों के संसदीय तथा विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की विजय सुनिश्चित करने के मामले में संतुलन की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में राजस्थान में श्री जसवंत सिंह बिश्नोई, अजय बिश्नोई मध्यप्रदेश तो हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई, यूपी में सलिल बिश्नोई सहित सभी प्रदेशों में इस समाज के नेता विभिन्न राजनीतिक दलों में रहकर उने जनाधार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भ्ूामिका निभा रहे हैं । आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित तमाम
प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से अखिल भारतीय बिश्नोई मिलन का आग्रह बिल्कुल सही है कि बिश्नोई समाज के पर्यावरण संतुलन के लिये वृक्षारोपण व जीव जन्तुओं की सुरक्षा तथा सबको शांति व भाईचारे का संदेश देने में हमेशा सक्षम रहे गुरू जम्भेश्वर जी महाराज और बिश्नोई समाज के गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को अवगत कराने तथा पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम करने के लिये उन्हे प्रेरित करने हेतु स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली हर प्रकार की शिक्षा में गुरू जी और विश्नोई समाज के इतिहास को शामिल किया जाए जिससे हर समाज के बच्चे निस्वार्थ भावना से हरियाली है धरा का परिधान, 10 वृक्ष एक पुत्र के समान की भावना को आत्मसात कर समाज में वृक्षारोपण और जीव सुरक्षा का संकल्प ले सकें।

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-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

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