प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जी देर रात समीक्षाओं के नाम पर होने वाली बैठकों से परेशान, पंचायत अधिकारी का इस्तीफा बन सकता है गंभीर समस्या

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हरदोई जिले में तैनात एक ग्राम पंचायत अधिकारी नितांत रसतोगी जो एडीओ का कार्य भी देख रहे थे। उन्होंने देर रात तक होने वाली बैठकों से परेशान होकर गत रविवार को व्हाटसऐप के माध्यम से अपने क्षेत्र के डीपीआरओ को संबोधित इस्तीफा भेज दिया। नितांत रस्तोगी का कहना है कि दिनभर रूटीन के काम और फिर देर रात तक समीक्षा बैठकों में जाने के झंझट से परेशान हूं। दूसरी तरफ डीपीआरओ द्वारा एक खबर के अनुसार उनके इस्तीफे की पुष्टि की गई है। वर्तमान में शाहाबाद में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी का इस्तीफा कोई बड़ी बात अगर सामान्य दृष्टिकोण से देखे तो नहीं है क्योंकि एक छोडे़गा तो कई बेरोजगार पढ़े लिखे काम पर आने को तैयार है, लेकिन अगर व्यवस्था के हिसाब से देखा जाए तो यह समस्या मात्र रस्तोगी की नहीं बल्कि सरकारी नौकरी में तैनात हर बडे छोटे अधिकारी की है। बस फर्क इतना है कि कुछ कह देते हैं तो रस्तोगी जैसे अधिकारी इस्तीफा दे सकते हैं। बाकी शायद कारण कोई भी हों। ऐसे मामलों में बोल नहीं पाते। अंदर ही अंदर घुटते रहते हंैं। और जहां तक मुझे लगता है कि वो गलत भी हो सकता है लेकिन आये दिन विभिन्न स्तरों के जो अधिकारी व कर्मचरी आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं तो उसके पीछे भी कभी न कभी इन आये दिन होने वाली बैठकों व उनमे मिलने वाली लताड़ भी कहीं न कहीं जिम्मेदार हो सकती है।
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ग्राम पंचायत अधिकारी का इस्तीफा भविष्य में चलकर किसी न किसी रूप में कुछ समस्या भी खड़ी कर सकता है क्योंकि उन्होंने इस्तीफा देने का कदम उठाया तो कल को और भी अधिकारी व कर्मचारी इस्तीफा देने की बात कर सकते हैं। वैसे भी पुराने समय में तैनात अफसर कुछ समय बाद सेवानिवृत्ति प्राप्त कर नौकरी की अन्य सुविधाएं तो उठा सकते हैं। ऐसा अगर होता है तो कई बडी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।
पिछले दिनों माननीय मद्रास हाईकोर्ट द्वारा किसी मामले में यह शब्द भी कहा गया कि आखिर
पुलिसवालों को सप्ताहिक छुटटी क्यों नहीं मिल सकती और पुलिस की ड्यूटी को लेकर आवाज उठती रही है। कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि जिस प्रकार भूसे के ढेर को राख में बदलने के लिये एक चिंगारी महत्वपूर्ण होती है उसी प्रकार सारी सुविधाएं होने के बाद भी कुछ लोग अपनी नौकरी को लेकर शिकायत करते नजर आते हैं। ऐसे में पंचायत अधिकारी का इस्तीफा किसी बडी इस्तीफा देेने वालों की श्रंृखला का कारण बने उससे पूर्व भी मेरी निगाह में हर स्तर के अधिकारियों को यह निर्देश आदेश व संदेश दिया जाए कि बहुत जरूरी हो तो देर रात में बैठकें बुलाई जाए वरना यह कार्य आवश्यक व्यवस्थाओं को छोड़कर सरकारी समय में ही पूर्ण की जाए तो अच्छा है।
क्योंकि अनेकों मौको पर यह देखने को मिला है कि कई बडे अफसर कार्य दिवस में तो अन्य कार्याें में लगे रहते हैं जनता या उनकी नौकरी से संबंध नहंी होते। और फिर अपने अधिकारांे का लाभ उठाकर सहयोगी अधिकारियों को कभी भी किसी भी समय समीक्षा बैठकों में बुला लिया जाता है और कई मौकों पर तो यह भी देखने को मिला कि विभिन्न मामलों को लेकर मिलने हेतु अधिनस्तों को उच्चपद पर बैठे पत्रावाली के साथ बुलाते हंै और फिर घंटो उन्हे बैठाकर कई अधिकारी दूसरे दिन बुलाने की बात कहकर सहयोगियों को वापस भेज देते हैं। कुल मिलाकर शासन व सरकार की व्यवस्था बनी रहें। और ऐसा असंतोष कहीं न पनप पाए जिसे लेकर ऐसे समय मंे जब सरकारी तो दूर प्राईवेट नौकर भी मिलना मुश्किल है। कोई अफसर किसी भी पद का हो इस्तीफा देने के लिये मजबूर न हों।

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-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

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