जब सभी उम्र के पुरुष मंदिर जा सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं

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नई दिल्ली 19 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए सभी आयु वर्ग के पुरुष जा सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं। केरल के सबरीमाला मंदिर में पूजा करने का महिलाओं को संवैधानिक अधिकार है। मंदिर में प्रवेश करने और पूजा के मामले में महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, अजय खानविलकर, धनंजय चंद्रचूड अर इंदु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने कहा कि यदि कोई कानून नहीं भी हो, तब भी मंदिर में पूजा-अर्चना करने के मामले में महिलाओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता। संविधान पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर प्रतिबंध के देवस्वोम बोर्ड के फैसले को चुनौती दी गई है। अदालत ने कहा कि जब कोई
पुरु ष प्रवेश कर सकता है तो महिला भी जा सकती है। जो पुरु षों पर लागू होता है, वह महिलाओं पर भी लागू होता है। अदालत ने कहा कि मंदिर में प्रवेश का अधिकार किसी कानून पर निर्भर नहीं है। यह संवैधानिक अधिकार है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में निहित है। केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने भी मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया है। इस पर अदालत ने केरल सरकार की ओर से 2015 और 2017 में दायर विरोधाभासी हलफनामों की तरफ इशारा किया। साल 2015 में दायर हलफनामे में केरल सरकार ने महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था जबकि 2017 में यू-टर्न लेते हुए महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया था। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि वह अपने पहले हलफनामे के पक्ष में है और महिलाओं के मुद्दे का समर्थन करते है। अदालत ने केरल सरकार से कहा कि बदलते वक्त के साथ आप भी बदल रहे हैं।

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