क्या दा होस्ट बिल्डिंग का अवैध निर्माणकर्ता एमडीए के अधिकारियों का रिश्तेदार है जो उसे बचाने के लिये अपनाए जा रहे हैं नए नए पैतरे,कमिश्नर व डीएम साहब दे ध्यान! उच्च स्तर पर शासन की निर्माण निति का पालन कराने और राजस्व की हुई चोरी को वसूलने के लिये करायी जाए जांच ,

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निजी उपयोग के लिये बना बैसमेंट हीरा स्वीट्स को दिया किराये पर बने मिटिंग हाॅल में आने वाले 200 लोगों की गाड़ियां कहां खड़ी होंगी,नियम विरूद्ध निर्माण शुरू में क्यों नहीं रोका गया?

एमडीए के अधिकारियों की विभाग के प्रति सत्यनिष्ठा है संदेह में

एमडीए के अधिकारी आये दिन समाचार पत्रों में खबर छपवाकर फलां अवैध निर्माण पर बुल्डोजर चलवाया व सील लगवाई या नोटिस भेजा। अथवा काम रूकवाया। जैसी खबरें छपवाकर वाह वाही लूटने में लगे हैं। मगर जो दिखाई दे रहा है। उससे जो नजर आता है। उसके हिसाब से एमडीए के अफसर अवैध निर्माण रोकने से संबंध सिर्फ उच्चाधिकारियों को गुमराह कर इस शहर के नागरिकों के सामने आये दिन जाम आदि से जूझने की परेशानियां अवैध निर्माणों को बढ़ावा देकर परोसने में लगे हुए हैं। अब तो स्थिति भी कुछ ऐसी हो गई है कि कितने ही नागरिक एमडीए से संबंध जब कोई खबर उपाध्यक्ष द्वारा विकास या सौंदर्यकरण आदि के लिये योजना बनाने हेतु बैठकें करने की खबर पढ़ने को मिलती है तो एक छोटी सी मुस्कराहट के साथ कहते सुने जाते हैं। की चलो एक ओर घपला करने का मौका शायद आने वाला है।
लेकिन फिलहाल हम बात अवैध निर्माणों की कर रहे है शहर में कुछ ऐसे निर्माण हो रहे हैं और हो गए हैं। जिन्हे देखकर यह लगता है कि सरकार को अपनी निर्माण नीति में कुछ बदलाव कर प्राधिकरण के अधिकारियों को अवैध निर्माण कराने का ठेकेदार नामित करना चाहिये। इससे विभाग और सरकार को काफी उच्च स्तर पर राजस्व प्राप्त हो सकता है। जो वर्तमान में एमडीए के अवैध निर्माण रोकने से संबंध अधिकारियों की जेब में सीधे सीधे या घूमा फिराकर जा रहा बताया जाता है। और क्योंकि मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बार बार शिकायतें आने तथा समाचार पत्रों में खबरें छपने के बाद भी तथ्य परख जांच कराकर कार्रवाई करने के बजाए अवैध निर्माण कराने के लिये चर्चित विभाग के अफसरों को ही जांच की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। जो फाईलों मंे दबकर या पत्रावलियों के चक्र व्यहू में फंसाकर छोड़ दिया जाता है। इसके जीते जागते उदाहरण के रूप में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्य सचिव आवास कमिश्नर मेरठ डीएम और एसएसपी जनहित में थाना लालकुर्ती के क्षेत्र में स्थित मेरठ कालेज के समीप टेलीफोन एक्सचेंज के बराबर में बन रही दा होस्ट नामक बिल्डिंग के निर्माण और नियमों को तोड़े जाने का नजारा देेखा जा सकता है।
बताते हैं कि दा होस्ट के निर्माण के विरूद्ध रिहायशी भूमि पर कार्यालय के नाम पर मानचित्र छोटा मोटा पास कराया गया। और बाद में अवैध निर्माण रोकने से संबंध अधिकारियों की मिलीभगत के चलते वहां काॅमर्शियल निर्माण कराया गया। जिसमें बेसमेंट व ग्राउंड फ्लोर पर बताया जाता है हीरा स्वीट्स की दुकान भी खुलने वाली है तो उपर सागर रत्ना रेस्टोरेंट खुलना बताया जा रहा है। सरकार की निर्माण नीति को ताक पर रखकर साढ़े चार मंजिला निर्माण कर दिया गया है।
मजे की बात तो यह है कि सबकुछ नियम विरूद्ध होने के बाद भी छोटे छोटे निर्माण को तोड़कर या उन पर कार्रवाई कर अपने आप को तीस मार खां दर्शाने वाले विभाग के कुछ अधिकारी इसका नाम चैंज कर काॅमर्शियल में तब्दील करने की तैयारी में लगे हुए हैं। शहर में यह बात चर्चाओं का विषय बनी हुई है कि आखिर इसके निर्माणकर्ता से कौनसी रिश्तेदारी या दोस्ती विभागीय अधिकारियों की है जो पूर्व मंडलायुक्त द्वारा जांच कर कार्रवाई किये जाने के आदेश भी दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गईं । बताया जाता है कि रोटरी क्लब मेरठ विराट की पत्रिका के एक अंक में दा होस्ट बिल्डिंग के अवैध निर्माणकर्ता आदि की ओर से एक विज्ञापन छपावाया गया कि की 200 लोगों की मिटिंग के लिये उपलब्ध है हाॅल। सवाल यह उठता है कि बेसमेंट तो व्यक्तिगत उपयोग के बजाए हीरा स्वीट को दे दिया गया। और अब 200 लोगों के मिटिंग की व्यवस्था है तो कम से कम 40 से 50 गाड़ियां आनी अनिवार्य है आखिर वो कहां खड़ी होंगी।
लोगों का मानना है कि सड़क पर लगने और 24 घंटे में 18 घंटे की जाम की पृष्ठ भूमि बिल्डिंग निर्माणकर्ता द्वारा कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के सहयोग से तैयार की जा रही है। उच्चाधिकारी पहले तो इस निर्माण से संबंध फाईल निकलवाएं और फिर शासन की निर्माण निति की समीक्षा कर इसके संदर्भ में पूर्ण जानकारी प्राप्त कर जनहित में कार्रवाई करें। क्योंकि प्राधिकरणके अधिकारी तो इसे बचाने के लिये ऐडी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं बता जाते हैं इसलिये कमिश्नर, डीएम व एसएसपी साहब कोई जनहित में इस संदभ्ज्र्ञ में कार्रवाई करें।
मेरा मानना है कि जो जानकारी मिल रही हैं उसके अनुसार
1 मानचित्र कितनी जगह में और किस किस चीज का पास हुआ, मौके पर क्या बना है।
2 इसका भू उपयोग बदले जाने से पहले ही कार्यालय में पास मानचित्र के विपरीत काॅमर्शियल निर्माण हो जाने के बाद भी भूमि के उपयोग बदलने की कार्रवाई कैसे की जा रही है निर्माण कर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाए।
3 कितनी मंजिल का नक्शा पास हुआ। और कितनी बनी तथा मानचित्र के विपरीत चाढ़े चार मंजिल तक का बिल्कुल सड़क पर निर्माण कैसे हो गया।
4 बेसमेंट जो बना उसकी चर्चा नक्शे में थी या नहीं। और निजी उपयोग अथवा यहां आने वालों के वाहन खड़े करने के बजाए हीरा स्वीट को मौखिक जानकारी के अनुसार कैसे किराये पर दे दिया बैसमेंट
5 क्या बिल्डिंग का चार मंजिला नक्शा पास हुआ। नहीं तो कैसे बिना मानचित्र के निर्माण हो गया।
6 बताया जाता है कि कार्यालय में 1500 स्कवायर फिट में कार्यालय निर्माण होना था। वर्तमान में कितनी जगह में निर्माण हुआ।
7 पूर्ण निर्माण जो हुआ शासन की निर्माण नीति के साथ साथ इसमे एनजीटी पर्यावरण प्राधिकरण के नियमों का पालन हुआ या नहीं। नियम अनुसार साइड,बैक और फ्रंट में जगह छोड़ी गई अथवा नहीं।
8 अगर कोई निर्माण कंपाउंड हुआ तो इसका क्या आधार रखा गया। निर्माण के अनुसार फीस जमा करायी गई या नहीं। और जो कंपाउंड प्लान बना उसकी उच्च स्तर पर समीक्षा हुई हो या नहीं।
9 दा होस्ट के निर्माण में जो प्रभारी जेई, ऐई और अन्य अधिकारियों की भूमि का कहीं संदिग्ध तो नहीं। किसी भी विषय को लेकर
10 पूर्व मंडलायुक्त के निर्देश पर शुरू हुई जांच का क्या परिणाम रहे जिम्मेदार अधिकारियों ने नियम अनुसार ईमानदारी से जांच कर रिपोर्ट सौंपी या नहीं।
11 आये दिन समाचार पत्रों में इस अवैध निर्माण की खबर छापने के बाद भी मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तथा अन्य उच्चाधिकारियों द्वारा निर्माण का स्थलीय निरीक्षण क्यों नहीं किया गया और अगर किया गया तो उसमे क्या क्या कमी पाई गई। एमडीए के अधिकारियों की विभाग के प्रति सत्यनिष्ठा ….

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और उनके खिलाफ क्या कदम उठाए गए।
12 दा होस्ट बिल्डिंग का निर्माण करने वाले व्यक्ति द्वारा वाहन खड़े करने की क्या व्यवस्था की गई है। कहीं ऐसा तो नहीं की आने वाले वाहन सड़क पर खड़े कराए जाए और आम जनता के लिये एक नई मुसीबत इनसे लगने वाले जाम के रूप में आने वाली हों।
यह कुछ ऐसे तथ्य हैं जिन पर अगर ईमानदारी से जांच करायी जाए तो नागरिकों के अनुसार एमडीए के अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल खुलकर तो सामने आएगी ही और गलत तरीके से निर्माण क्यों होने दिया और अगर निर्माणकर्ता पर सख्ती हुई तो यह तथ्य भी खुलकर सामने आ जाएंगे।
इसलिये जनहित में जनता की मांग है कि दा होस्ट बिल्डिंग निर्माण की जांच किसी प्रशासनिक अधिकारी से समय सीमा के अनुसार करायी जाए से मैं भी सहमत हूं क्योंकि सामने देखने से यह लगता है कि इस निर्माण प्रकरण में सरकार की नीति का तो उल्लंघन हुआ ही सरकार को एमडीए के माध्यम से मिलने वाले राजस्व की भी चोरी कहीं न कहंी हुई लगती है। इसलिये जनता और शासन हित में पूर्ण रूप से कार्रवाई तो समय से होनी ही चाहिये।
मेरठ काॅलिज और लालकुर्ती स्थित टेलीफोन एक्सचेंज के बीच खसरा नम्बर 43-44 पर स्थित भूखंड संख्या 1 व 41 बाउड्री रोड सिविल लाईन, मेरठ के क्षेत्रफल 477.85 वर्गमीटर पर बनकर तैयार हुई बिल्डिंग दा होस्ट को लेकर वर्तमान मे काफी चर्चाएं व्याप्त है। कुछ जानकारों का कहना है की यहां छोटा सा मानचित्र पास कराया गया और उस पर बेसमेंट तथा 4 मंजिला ईमारत उप्र सरकार की सभी निर्माण नीति के बिल्कुल विपरित अवैध निर्माण कर लिया गया। और अब शासन की सभी नीतियों को नजर अंदाज कर इसका भूउपयोग अवैध निर्माण होने के बवाजूद परिवर्तन कराने के प्रयास जोन प्रभारी द्वारा कराये जा रहे बताये जाते है। अब इसमें कितनी सत्यता है यह तो जांच का विषय है ।

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-निवेदक
रवि कुमार बिश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष
आॅल इंडिया न्यूज पेपस एसोसिएशन आईना

 

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