आध्यात्मिक भैय्यू महाराज ने क्यों की आत्महत्या, किस कारण से विनायक के नाम की सारी संपत्ति पता तो चलना ही चाहिये!

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जीवनभर आध्यात्मिक व समाजिक रूप से सबको जीने और खुश रहने का संदेश देते रहे तथा अपने अभूतपूर्ण गुणों के कारण देश के जाने माने लोगों के साथ संबंधों वालों हाईप्रोफाईल गुरू भैय्यू जी महाराज का अंत ऐसा होगा कि उन्हे तनाव के चलते खुद को गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त करनी होगी ऐसा किसी ने सोचा भी न होगा। आत्महत्या जैसा कदम कहा जाता है कि कठिनाईयों के चलते कभी कभी मानसिक तनाव में लोग उठा लेते हैं। सवाल यह उठता है कि भैय्यू जी महाराज जैसे जीवन के शुरूआती दौर से ही मस्त और हर क्षेत्र में सक्रिय आध्यात्मिक गुरू को गोली मारकर आत्महत्या क्यों करनी पड़ी? कुछ लोगों का कहना है कि पत्नी और बेटी के बीच संपत्ति केा लेकर जारी जंग में ऐसा हुआ। तो कई का मानना है कि पिछले वर्ष कर्ज में डूबे होने का ऐलान करते हुए उनके द्वारा सार्वजनिक जीवन से भी संयास ले लिया गया था तो कई यह भी कहते हैं कि मध्य प्रदेश की सरकार ने उन्हे सिंहस्थ कुंभ से पहले हुए धर्म सम्मेलन में नहीं बुलाया था। इसलिये वो काफी नराज व तनाव में चल रहे थे। जिसके चलते उनके द्वारा मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दिया गया राज्यमंत्री का दर्जा भी ठुकरा दिया गया था। एक संतव विख्यात व्यक्ति के रूप में उन्होंने आत्महत्या क्यों की इसका खुलासा होना ही चाहिये।
मर्सिडीज जैसी महंगी गाड़ियों तथा रोलेक्स जैसी कीमती घड़ियों के शोकीन आलीशान जिदंगी जीने में विश्वास रखने वाले भैय्यू जी महाराज का जन्म 1968 में एक किसान परिवार में हुआ। जीवन के शुरूआती दौर में माॅडलिंग में भी उनके द्वारा प्रवेश किया गया। उनकी पहली पत्नी माधवी थी जिनका 2015 में निधन हुआ। पिछले साल अप्रैल में ही महाराज ने मध्यप्रदेश के ग्वालियर निवासी डा. आयुषी शर्मा से दूसरी शादी की। वर्तमान में परिवार में दूसरी पत्नी और 18 वर्षीय बेटी कुहू जो पुणे में पढाई कर रही है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 6.67 करोड़ पौधे लगाने के दावे को महा घोटाला बताते हुए नर्मदा घोटाला रथ निकालने की धमकी जब संतों द्वारा दी गई तब पांच संतों को इसका सदस्य नियुक्त कर राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था उसमे भैय्यू जी महाराज भी शामिल थे मगर विवाद खुद उठाने के चलते उनहोंने यह पद लेने से इंकार कर दिया था।
अपने जीवन काल में वो अनेक बड़े लोगों के संपर्क में थे। जिनमेे पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पटिल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह प्रसिद्ध गायिक लता मंगेशकर आदि के संपर्क में रहें। मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जी ने सितंबर माह 2011 में अहमदाबाद में उपवास किया था तो उसे खुलवाने के लिये भैय्यू जी महाराज को आमंत्रित किया था। समाजसेवी अन्ना हजारे का अनशन खत्म कराने के लिये भी महाराष्ट्र के उस समय के मुख्यमंत्री के साथ यूपीए की सरकार ने भैय्यू जी महाराज को अपना दूत बनाकर भेजा था और उन्होंने ही जूस पिलाकर अन्ना हजारे का अनशन भी तुड़वाया था। यह तथ्य इस बात का प्रतीक है कि भैय्यू जी महाराज का क्या कद समाज व राजनीतिक क्षेत्रों में था। मध्यप्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता माणिक अग्रवाल ने भैय्यू जी की खुदकुशी की सीबीआई जांच की मांग की है। संत की खुदकुशी पर सीएम शिवराज सिंह चैहान सहित तमाम राजनीतिक नेताओं ने पार्टी की गाइड लाईन से उपर उठाकर आध्यात्मिक गुरू के निधन पर सोशल मीडिया केे माध्यम से शोक प्रकट किया। जिसमे एमपी के सीएम शिवराज सिंह चैहान, संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत, शरद पंवार, आशा भोसले, स्वर्गीय विलासराय देशमुख उद्धाव ठाकरे, राज ठाकरे, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आदि ने अपनी श्रद्धांजलि देने के साथ ही दुख जताया और भैय्यू महाराज को भूमि सुधार, जल संरक्षण किसान कलयाण बच्चों की शिक्षा को लेकर किये गए कार्याें को याद किया गया। आत्महत्या से पूर्व आध्यात्मिक गुरू ने गोली मारने से पहले अपने अनुयायियों के नाम एक टवीट भी किया था। भैय्यू जिसमे अपने आप को तनाव में बताया गया। दिवंगत संत का असली नाम उदयसिंह देशमुख था।
भैय्यू जी महाराज आज हमारे बीच नहीं है। गोली मारकर आत्महत्या करने के कारण क्या रहें उनका अंदाजा ही लगाया जा सकता है क्योंकि सच्चाई तो वो ही जानते होंगे। मगर क्योंकि पिछल्ेा कुछ सालों से देश में आये दिन अच्छे सरकारी पदों पर तैनात अफसरों और बड़े लोगों के द्वारा आत्महत्या किया जाने की खबरे सुनने और पढ़ने को मिलती रही है। आध्यात्मिक गुरू और संत के रूप मंे हो सकता है कि ओर घटना हो मगर मुझें पहला प्रकरण भैय्यू जी महाराज का ही पढने और सुनने को मिला। कहा जाता है कि लोग कष्टों और अपनी उपेक्षा के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि भैय्यू जी महाराज के सामने जैसा की पता चल रहा है शायद आर्थिक कठिनाई तो अभी ऐसी नहीं होगी जिसके चलते वो आत्महत्या जैसा कदम उठाए। मगर क्योंकि ऐसा हुआ है। इसलिये जनता के सामने यह तो आना ही चाहिये कि उनको आत्महत्या करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। यह भी नहीं था कि वो अकेले पड़ जाते हो क्योंकि 2, 12,753 फोलोवर उनके फेसबुक पर थे जिनसे यह पता चलता है की वो आधुनिक संचार माध्यमों व सोशल मीडिया से भी संपर्क में रहते थे। दूसरी तरह यह विषय भी काफी गंभीर व सोचनीय है कि भैय्यू जी महाराज ने अपने सेवादार विनायक के नाम सारी संपत्ति क्यों की। सुसाईड नोट के दूसरे पेज पर पुलिस के अनुसार स्पष्ट रूप से उन्होंने विनायक को अपनी फाईनेंस और संपत्ति विनायक के नाम की। आखिर ऐसा क्यों किया गया।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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