वो कौन सा सक्षम अधिकारी है जिसकी संतुति पर पीआरओ करा रहा है 10 गुना दर पर विज्ञापन भुगतान

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कमिश्नर साहब दे ध्यान! वीसी से तो नहीं है कोई उम्मीद

मेरठ 14 जून। केंद्र व प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में फिजुल खर्च रोकने और लापरवाही बरतने तथा भ्र्रष्टाचार व रिश्वतखोरी को समाप्त करने के लिये हर संभव प्रयास कर रही हैं। उसके बावजूद जानकारों के अनुसार कुछ विभाग ऐसे हैं जिनके अधिकारी सुधरने का नाम तो ले ही नहीं रहे । सरकारी पैसों की बर्बादी रोकने में सुधार करने को भी तैयार नहीं हैं।
ऐसे विभाग व अफसरांे के संबंधित व जागरूक नागरिकों में सबसे ज्यादा मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का नाम पहले लिया जाता है। इनके द्वारा मौखिक रूप से की जाने वाली चर्चाओं से पता चलता है कि कार्यालय पीआरओ द्वारा विज्ञापन भुगतान के नाम पर विभाग को मोटा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इस संदर्भ में जब पूर्व में शिकायतें हुई तो जिन अधिकारियों को बताते हैं कि पीआरओ माल कमावते हैं और उनसे मिलीभगत कर इनके द्वारा यह दर्शाकर की सक्षम अधिकारियों की संतुति पर किया जाता है भुगतान। मामले को रफा दफा करने की कोशिश भी की जाती है। आज मेरठ विकास प्राधिकरण के कार्यालय में मौजूद कुछ पत्रकारों के बीच चर्चा सुनने को मिल रही थी कि पीआरओ विभाग के मुखिया के नाम पर डीएवीपी या सूचना विभाग द्वारा निर्धारित दरों के मुकाबले कुछ समाचार पत्रों को आठ से 10 गुना काॅमर्शियल कार्ड दर पर भुगतान कराकर विभाग केा अब तक लाखों करोड़ों का नुकसान पहुंचा चूका हैं। इनका कहना है कि आज तक कहीं से भी कुछ समाचार पत्रों को व्यवसायिक दरों पर भुगतान देने के लिये कोई प्रस्ताव शायद पास नहीं हुआ और न हीं सरकार से इनके पास ऐसा कोई पत्र भेजा गया पत्र है जिसमे आठ से दस गुना महंगे पर विज्ञापन छपवाया जाए। उसके बाद भी सक्षम अधिकारी से स्वीकृति प्राप्त करने के नाम पर सरकारी पैसों की बंदरबांट पीआरओ द्वारा करायी जा रही बताई जाती है। क्योंकि कई बार यह मुददा उठ चुका है उसके बाद भी जब प्राधिकरण उपाध्यक्ष द्वारा इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं जाती जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कहंी न कहंी इस प्रकरण में कुछ ओर बड़े अधिकारी भी लिप्त हो सकते हैं। क्योंकि करोड़ों रूपये का भुगतान विज्ञापन के नाम पर कराकर मोटा कमिशन लेने की मौखिक चर्चा वाले पीआरओ आज तक यह बताने को मौखिक रूप से यह बताने को तैयार नहीं की वो सक्षम अधिकारी कौन हे जो सरकार को अपनी संतुति करके करोडों का नुकसान पहुंचा रहा हैं। वीसी सहित विभाग के बड़े अधिकारी इस संदर्भ में चुप्पी क्यों लगाए हुए हैं वो भी एक चर्चा का विषय है जबकि कुछ के द्वारा तो मौखिक रूप से यह भी कहा जा रहा है कि पैसों की बर्बादी के लिये उपाध्यक्ष सहित विभाग के प्रमुख अधिकारी भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
माननीय मुख्यमंत्री जी यूपी और केंद्र की सरकार हर सरकारी विभाग में खर्चाें पर अंकुश लगाने और मित्तव्यता बरतने की बात करते हैं और मेरठ विकास प्राधिकरण समक्ष अधिकारी के नाम पर 8 व 10 गुना दर पर विज्ञापन छपवाकर सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहा हैं। आखिर इनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। यह विषय आये दिन चर्चाओं में बना रहता हैं। कमिश्नर साहब ! सरकारी पैसों की मर्जी से पीआरओ द्वारा करायी जा रही बर्बादी और वीसी के द्वारा इस बंदरबांट को रोकने के बजाए अब तक सादी जा रही चुप्पी के पीछे क्या कारण हो सकता है यह तो वो ही जाने लेकिन नो फ्रोफिट नो लाॅस पर जरूरतमंदों को घर बनाकर देने के लिये बने विकास प्राधिकरण के अफसर द्वारा जनता से विभिन्न मदों में प्राप्त पैसों की बर्बादी रोकने और अब तक जो पैसा बर्बाद किया गया है उसकी वसूली के लिये पीआरओ व अन्य अधिकारियों के खिलाफ आप ही कोई कार्रवाई जनहित में कर सकते हैं एमडीए के अफसरों से तो पत्रकारों के अनुसार किसी को कोई उम्मीद नहीं है क्योंकि जो पैसा जाता है उसमे जो की गई सुविधा शुल्क मिलता है उसमे बताया जाता है कि हिससा होता है अब इसमे कितनी सत्यता है यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स से सहभार

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