फूलपुर, गोरखपुर के बाद कैराना व नूरपुर में भी भाजपा को मिली पराजय क्यों? केंद्रीय नेतृत्व को सोचना के साथ ही जनहित की योजनाएं बनानी होंगी

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एक लोकसभा एक विधानसभा के यूपी में हुए उपचुनावों के परिणाम आ गए हैं। कैराना में रालोद से तब्बसुम व नूरपुर में सपा के नईमुल हसन ने भाजपा उम्मीरदवारों को हराकर विजय प्राप्त की। परिणाम स्वरूप अब तक जीत के निरंतर दावे कर रहे सत्ताधारी नेताओं को यह आईना दिखाई देने लगा होगा की सिर्फ बातों व घोषणा तथा भाषणों से चुनाव नहीं जीते जा सकते। इसके लिये जनहित में नीतियां तैयार करनी होंगी। यूपी में फूलपुर और गोररखपुर व कैराना लोकसभा व नूरपुर विधानसभा उपचुनाव के बाद अब यह साफ हो गया है कि जनता बदलाव चाहती है। वरना केंद्र की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यूपी में पूर्व में हुए लोकसभा व विधानसभा चुनाव में यहां से इस पार्टी को भारी बहुमत मिला था ओर जहां अब भाजपा उपचुनाव हारी है वहां वहां उसके उम्मीदवार जीते थे।
यूपी में अब रालौद और पूर्व में सपा के उम्मीदवार जीते उससे अब यह स्पष्ट हो रहा है कि अगर विपक्ष अभी छोटे मोटे लाभों को छोड़कर एक होकर 2019 के चुनाव लड़ता है तो वो सरकार बनाने के निकट पहुंच सकता है।
मगर यह बात भी सही है कि सत्ताधारी दल के उम्मीदवारों की जो हार हो रही है उसे अगर ध्यान से देखे तो भाजपा व केंद्र सरकार की पराजय कम इस सरकार में शामिल निरंकुश मंत्रियों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा बनाई जा रही जनविरोधी नीतियों तथा पार्टी व सरकार के मुखिया की इस ओर से बेरूखी का परिणाम है।
दूसरी तरह अपनी पार्टी के प्रमुख नेता यशवंत सिंहा, शत्रुघन सिंहा जो भी सही बोले या गलत नीतियों की ओर इशारा करते हुए आईना दिखाने की कोशिश करे तो उसे हांसिया पर ले जाने के अतिरिक्त नोटबंदी व जीएसटी तथा सरकार की नौकरशाही के माध्यम से जो गलत नीतियां बनाई जा रही है और जनता का उत्पीड़न किया जा रहा है यह उसकी हार है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपसे अनुरोध है कि अभी भी समय है क्योंकि जनता सीधे सीधे आपके खिलाफ नहीं है। इसलिये आप जो मंत्री जमीन की सच्चाई को समझकर जनहित की नीतियां न बनाकर उन लोगों की सलाह से काम कर रहे है जिन्हे आम आदमी की समस्या का कोई ज्ञान नहीं है उन पर अंकुश लगाते हुए अगर किसान व्यापारी मजदूर और आम आदमी तथा लघु व भाषाई समाचार पत्र के संचालकों की जो बढी कठिनाईयां उनके सामने कई रूपों में आ रही है जनता के बीच भेजकर अपने विश्वस सूत्रों की जानकारी कराकर उन्हे दूर कर लिया जाए तो 2019 के लोकसभा चुनाव में नहीं बडी कठिनाई जो होनी वाली है सत्तापक्ष उससे बच सकता है।
केदं्र सरकार के नेताओं को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजैंसी व उसमे बरती गई तानशााही से सबक लेना चाहिये वरना जिस प्रकार जनता यूपी में तीनों सीटो पर विपक्ष के उम्मीदवार जिताकर और विधानसभा में भी सत्ताधारी पार्टी को नकार कर चुनाव परिणाम दे रही है वो सकंेत सत्ता पक्ष के लिये ठीक नहीं है।
इसलिये रोजगार देन, घोटाले खोलने व भ्रष्टाचार को दूर करने की बात करने से मतदाताओं को प्रभावित नहीं किया जा सकता। इन क्षेत्रों में सकारात्मक रूप से सरकारों को कार्रवाई करनी पड़ेंगी। जो परिणाम यूपी में हुए वो पूरे देश में भी हो सकते हैं। क्योंकि मतदाता अब समझदार हो गया है वोट डालने और परिणाम आने तक किसी को यह महसूस नहीं होने देता की उसने वोट किसे दिया।

– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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