नेता प्रस्तुत करें उदाहरण : पूर्व मुख्यमत्री समय से खाली करे दें आवास

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पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वीपी सिंह साहब द्वारा 1986 में अपने यूपी के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कई बार मुख्यमंत्री गवर्नर और केंद्र में मंत्री रह चुके नरेंद्र तिवारी को एक माल ऐवन्यू में आवास आवंटित किया गया था जिसके बाद यह परम्परा चल निकली। पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह, रामनरेश यादव, श्रीपति मिश्रा, राम प्रकाश गुप्ता, जी को भी बंगले मिले।
वर्तमान में पूर्व मुख्यमत्री नारायण दत्त तिवारी को एक माल ऐवन्यू मुलायम सिंह यादव को पांच विक्रमादित्य मार्ग, कल्याण सिंह को दो माॅल ऐवन्यू राजनाथ सिंह को चार कालीदास मार्ग मायावती जी को 13 माल ऐवन्यू तथा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को चार विक्रमादित्यमार्ग पर बंगले आवंटित हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदेश सरकार के उस कानून को रद कर दिया गया जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री को आजीवन बंगला देने का प्रावधान किया गया था। वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य संपत्ति विभाग द्वारा 15 दिन में सभी पूर्व मुख्यमंत्री से बंगले खाली करने को कहा गया है।
पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगले आवंटन करने के खिलाफ लोकप्रहरी संस्था द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर कोर्ट ने बीती सात मई को उप्र मंत्री वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण संशोधन अधिनियम को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया जाता था।
वर्तमान समय में पूर्व जिन मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी करना बताया गया है उनमे श्री राजनाथ सिंह जी केंद्र में गृहमंत्री, कल्याण सिंह जी राजस्थान के राज्यपाल के पद पर विराजमान है जबकि बाकी नेता अपनी अपनी पार्टियों के प्रमुख पदों पर आसीन है।
गत दिनों कई बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकात कर चर्चा कर उनसे आग्रह किया गया था कि विक्रमादित्य मार्ग पर उनके और अखिलेश यादव के नाम पर आवंटित बंगले को पार्टी नेताओं राम गोविंद चैधरी और अहमद हसन के नाम पर आवंटित कर दिया जाए। रामगोविंद चैधरी व अहमद हसन यूपी विधान परिषद व विधानसभा में नेता विरोधी दल के पद पर आसीन है। इसलिये इन्हे यह बंगले आवंटित किया जाना शायद गलत भी नहीं होगा।
मगर उच्चतम न्यायालय के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगले देने के प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए नियम को निरस्त कर मुझे लगता है कि जनहित का निर्णय अच्छा काम किया गया है। क्योंकि
लोकतंत्र में किसी को भी जनता के पैसे से प्राप्त किसी भी सुविधा का पद पर न रहते हुए उपयोग नहीं किया जाना चाहिये। चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो।
मुझे लगता है कि नियम अनुसार संपत्ति विभाग द्वारा जो अवधि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकार आवास खाली करने के नोटिस दिये गए हैं उन्हे अपने पद और पूर्व में रहे पदों की गरिमा को कायम करते हुए तुरंत अपने आवास खाली कर देने चाहिये। क्योंकि वैसे भी जितने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम सामने है वो सब पूर्ण रूप से सक्षम और बड़े जनाधार वाले नेता है उनके लिये सरकारी आवास मिलना या न मिलना कोई बडी बात नहीं।
वैसे तो सबके पास अपने घर भी लखनउ में हो सकते हैं। और न भी होंगे तो इनके प्रशंसकों की संख्या इतनी हैे कि यह जब चाहंेगे वो उन्हे मकान बडे़ घर बनाकर दंे सकते हैं।
स्मरण रहे कि शुरू में 600 रूपये माह में आवंटित हुए और फिर इनका किराया 1800 और फिर 3600 और अब 2014 में बढने के बाद 4600 रूपये है। इतने रूपये में तो वर्तमान समय में किसी गली मोहल्ले में दो कमरो का मकान भी उपलब्ध नहीं होता है। ऐसे में पाॅश कालोनियों में 15 से 20 बड़े बडे कमरों और सुविधाओं से युक्त बंगले इतने किराये में दिया जाना किसी भी प्रकार से लोकतंत्र में उचित नहीं कहा जा सकता। और वैसे भी यह कहां का इंसाफ है कि जब आप पद पर रहे तो भी मौज और जब उतर जाए तो भी मौज आखिर जनता को कब ऐसा मौका मिलेगा। जो वो निर्भिक होकर अपनी कमाई पर कुछ समय शांति के साथ जीने का अवसर प्राप्त कर पाएगी। इस संदर्भ में भी हमारे वर्तमान व पूर्व नेताओं को सोचना होगा। अब समय आ चुका है क्यांेकि जितना विभिन्न तरीको से नियम कानून लागू करने के नाम पर अफसर उत्पीड़न कर रहे हैं इतना ही जनता मुखर और जागरूक हो रही है। ऐसे में सरकारी धन का कुछ व्यक्तियों उपयोग की व्यवस्था ज्यादा दिन चलने वाली नहीं। यह बात हमे हमारे नेताओं सबको ध्यान में रखनी होगी।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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