मुख्यमंत्री जी और अपर प्रमुख सचिव आवास दें ध्यान! अवैध निर्माणों पर सील लगाना और नोटिस देना बन गया लगता हैै अफसरों के बैंक बैंलेंस बढ़ाने का माध्यम

loading...

वीसी साहब जितनी तनख्वा और सुविधा ले रहे कम से कम उसका कुछ तो उपयोग तो जनहित में दो चार अवैध निर्माणों की जांच तो आप खुद ही कराएं

मेरठ 18 मई। मेरठ विकास प्राधिकरण के क्षेत्र में अधिकारियों के अवैध निर्माण रोकने के दावों के बावजूद आये दिन केाई न कोई अवैध निर्माण नया होता नजर जरूर आता है। समय समय पर इनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर नोटिस देने और सील लगाने की खबरे भी पढ़ने को मिलती है। मगर कुछ दिन बाद जिन भवनों पर सील लगाई होती है वहां पुनः काम होता नजर आता है। इसी प्रकार संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों द्वारा बड़े दावो किये जाते हैं कि अवेध निर्माणकर्ता को नोटिस दिया गया है और कार्रवाई की जा रही हैं कुछ दिन बाद पता चलता है कि जिसे नोटिस दिया गया वो निर्माण बनकर पूर्ण हो गया है। और जिस पर सील लगाई गई थी वहां बडे बडे शोरूम और 40 40 दुकानों के मार्केट या कार्यालय चल रहे हैं।
एक अनुमान के अनुसार और मौखिक सूत्रों से जो खबर सामने आ रही है वो यह है कि शहर में एमडीए के कार्य क्षेत्र में लगभग 400 निर्माणों पर कागजों में सील लगी है और उप्र के बडे बड़े माॅल और व्यापारिक केंद्र चल रहे हैं।
इसी प्रकार बताया जाता है कि हजारों की तादाद में निर्माणकर्ताओं को नोटिस दिये गए। लेकिन किसी काम बंद नहीं हुआ। हो सकता है कि यह संख्या कुछ कम हों या ज्यादा। मगर सवाल यह उठ रहा है कि सील लगाने और नोटिस देने के बाद अवैध निर्माण पूरे होकर उनमे व्यवसायिक गतिधियां कैसे चलने लगती है। नोटिस देने वाले वाद चुप क्यों बैठ जाते हैं और सील तोडने व नोटिस के बाद भी निर्माणकर्ता के खिलाफ थाने में एफआईआर कराने के अतिरिक्त अन्य कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। अब ऐसी चर्चा आम आदमी है की कुछ बहरी क्षेत्रो या मुस्लिम इलाकों में तो अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई अभियान के दौरान की जाती है । जब इस संदर्भ में कुछ खोज की कोशिश की तो पता चला कि सील लगाने और नोटिस देने का कार्य तो अवैध निर्माण से संबंध अधिकारियों के लिये माल कमाने और बैंक बैलेंस बढाने का माध्यम हो गए हैं। इसमे कुछ गलत गलत भी नहीं लगता मौखिक रूप से होने वाली चर्चाओं में कितनी सत्यता है यह तो जांच का विषय है लेकिन कहा जाता है कि एक एक अधिकारी एमडीए का लाखों रूपए तनख्वाह के अतिरिक्त अवैध निर्माणें के माध्यम से कमाकर ले जाता है। क्योंकि कार्रवाई इनके द्वारा किसी के खिलाफ सख्ती से की नहीं जाती इसलिये ऐसा नहीं होगा यह भी विश्वास से नहीं कहा जा सकता।
मगर जो सबसे बडा बिंदु सामने सुरसा के मुंह की भांति मुंह बाय खडा है वो यह है कि इतना सब होने पर भी एमडीए के वीसी अपने एसी दफ्तरों से बाहर निकलकर कुछ अवैध निर्माण और जिन भवनों में सील लगाई गई उनका मौका मुआयना क्यों नहीं करते। इस पर जागरूक नागरिकों के इस कथन में दम नजर आता है कि सरकार द्वारा वीसी के पद पर तेनात अवसर को अच्छी तनख्वाह, गाड़ियां व सुविधाएं उपलब्ध करायी गई है उनका उपयोग अधिकारी विभागीय नियमों को लागू कराने और संस्था के हित में जो सारी सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं उसके हित में काम करने के बजाए अपने व्यक्तिगत कार्याें में या अवैध रूप से बनी रिहायशी व व्यवासयिक कालोनियों में जाकर दावतें खाने अथवा व्यक्तिगत कार्याें को निपटाने में करते ज्यादा नजर आते हैं।अगर ध्यान से सोचे तो इसमे कोई बुराई भी नहीं है अगर कोई आदमी जो सरकारी कर्मचारी और फिर वो भी प्राधिकरण का तो कुछ न कुछ तो पद का उपयोग करने की लालसा होती है। मगर वीसी साहब कम से कम जो घोड़ा गाडी गार्ड और चपरासी मिले इनके ही साथ सप्ताह में दो चार अवैध निर्माणों का मौका मुआयना तो आपको भी करना ही चाहिये जो शायद नहीं किया जा रहा और यही कारण लगता है कि मेरठ विकास प्राधिकरण का क्षेत्र ईट रोडी और सिमेंट के अवैध निर्माणों का जंगल बन रहा है जिससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है तो जाम की स्थिति भी बिगड रही है। वीसी साहब जनहित में जो तनख्वाह आप ले रहे हैं ऐसी कमरो में फाइलों को देखने के साथ ही सडक पर आकर विभाग हित में कम से कम थाना लालकुर्ती के क्षेत्र पीएल शर्मा रोड पर स्थित किंग बेकरी व इसी क्षेत्र के टेलीफोन एक्सचेंज के बराबर में हो रहे । भव्य अवैध निर्माण का मौका मुआयना पूर्ण पत्रावलियों के साथ कर लें तो आपको पता चलेगा की किस तरह से आपके सहयोगी आपको धोखा देकर अवैध निर्माण करने वालों को बचा रहे हैं। वैसे भी ऐसा कथन नागरिकों के मुंह से आये दिन सुनने को मिलते हैं और जिन्हे किसी भी रूप में गलत नहीं कहा जा सकता। मौखिक सूत्रों व जन चर्चा पर आधारित

इसे भी पढ़िए :  हाउसफुल 4 में काम करेंगी कृति खरबंदा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

17 − twelve =