प्रधानमंत्री जी की डिजिटल इण्डिया की भावनाओं से जुड़ी नेट व्यवस्था पर रोक सही नही….

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नई दिल्ली/ लखनऊ /मेरठ 15 अप्रैल । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश को डिजिटल इण्डिया बनाने पर जोर देे रहें है। और उनका प्रयास है कि देशभर में सारा काम डिजिटल हो और लोग नेट के माध्यम से हर काम को अनजाम दे दर सबेर अब आम आदमी पीएम सहाब की भावना को ध्यान रखतें हुए , इस व्यवस्था को अपनानें लगा है। परिणाम स्वरूप 60 प्रतिशत कार्य सरकारी हो या घरेलु , व्यापारिक हो या उद्ययोगीेक नेट के माध्यम से पूरे हो रहें है। प्रदेशों की सरकारें भी इस व्यवस्था को अपना रही है। मगर अब जब आम आदमी नेट से जुड़कर प्रार्दशी वातावरण में काम करने की कोशिश कर रहा है तब देश के कुछ जिलो के अधिकारी छोटी मोटी समस्या से घबराकर और अपनी कामियों को छुपानें के लिए जब चाहे तब नेट व्यवस्था को जाम कर देतें है।
और जो देखने ंमें आ रहा हैं उसें यह लगता है कि खुद अफवाहों को बढ़ावा देने और विवाद पैदा करनें वाले वो लोग जिनकी मीडिया के नाम पर चलनें वाली धमक से रोजी रोटी चलती थी लेकिन अब वह प्रभावित होने लगी है। तो उनके द्वारा व्यवस्था बनानें के लिए सुझाव देकर नेट पर प्रतिबंध का सुझाव को बिना ये सोचें की इससें कितना नुकसान होनंे वाला है कुछ अफसर चाहे तब कुछ समय के लिए बन्द करा देते हैं

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इस माह 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट को लेकर हुए भारत बन्द का पूर्व में सज्ञान ने लेकर मजबूत व्यवस्था न कर पायें सरकारी अफसरों के चलतें जो बवाल व हिंसा हुई उसनें सब को हिलाकर रख दिया तो बाद में बाबा साहब डाॅ0 भीम राव अमबेडकर जी की जयंती पर जब सब लोग एक दूसरें को बधाई और शुभकामना देकर अपनीे खुिशयंा व्यक्त करतें तो नेट पर 13 तरीख शुक्रवार रात 10 बजें से 14 अप्रैल रात 8 बजें तक नेट की व्यावस्था पूरी तरह बन्द कर दी बिना यह सोंचे की इसका आम आदमी पर क्या असर पड़गा। पूरे दिन बैक बन्द होने केे बाद आन लाइन पैसा निकालनें वालें , बिजली, जलकल,टिलीफोन बील, आॅन लाइन जमा करानें तथा हवाई जहाज और रेलवें आदि के टिकट बुक करानें वालें तों परेशान रहें ही पढनंें वाले छात्रों को भी परेशानी को सामना करना पड़ा और कुछ परीक्षाओं की तिथि भी आगे बढानी पडी जिससें आन लाइन कार्याे को पूरा करनें वाले आपने आप को ठगा से महसुस कर रहे ं है तथा 15 दिन दो बार जीवन की मुख्य धीरा से जुड़ी नेट व्यवस्था को बंद कर दियें जानें से जिदंगी 22 घण्टें के लिए यूपी के कुछ जिलें में ठाठ से गई जानकारों का कहना है।कि इतिहासिक जिला मेरठ में 15 करोड़ रूपयें का नुकसान सरकार को मिलनें वाले राजस्व का होनें की सम्भवाना बताई जा रही है।
सुरक्षा व्यवास्था का मुददा सर्वप्रथम है। आम आदमी को भयमुक्त वातावरण भी प्राप्त होना अनिवार्य है यह भी जरूरी है कि अफवाहें न फेैलें मगर इसके लिए नेट व्यवस्था पूरी तरह से ठप करना उचित नही कहा जा सकता।ऐसें मौकों पर अधिकारी अगर बहुत ही अवश्यकता समझेे तो वाॅटसऐप और मैसेज कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर सकतें है। मगर वो भी बिना किसी कारण के समस्या का कोेई हल ढूढनें की बजाए 22-22 घण्टें नेट पर रोक लगाना ठीक नही क्योकि ऐसे अवसरों पर अगर कही जरूरत भी पड़ती है। तों सुबह 6 बजे से 2, 3 बजे तक ही ऐसा होना चाहिए । 14 के बंद के लिए नागरिको का माना है कि सही मायनों में व्यावस्था करनें मे असफनल अफसरों की नेट पर प्रतिबंध नाकामी का नतीजा है। क्योकि नेट संबधित प्रचलन मानव अधिकारों से जुड़ गया है। इसलिए इससें संबध कोई भी निर्णय सोच समझकर लेना चाहिए।रही बात किसी समाचार व खबर को लेकर अफवाह फैलनें की तो वो चैनलों पर दिखाई जानें वाली खबरों से भी फैल सकती है वो लैन्ट लाइन व मोबाइल फोनों से भी ऐसा कर सकते है अफवाहों के नाम पर नेट संचालान पर कुछ घण्टों प्रतिबंध लगानें वालें ये कैसें भूल गयें कि जब नेट संचालन की व्यावस्था नही थी तब अफवाहें भी आग की तरह यहा से वहा और वहा से यहा फैल् जाती थी कुल मिलकर नेट व्यवस्था बंद करनें के निर्णय को कोई भी उचित नही बता रहा ।सिवाहें इस व्यावस्था से पीड़ित हीन भावनाओं के शिकारों के अलावा जगरूक नागरिको का माना है कि पुलिस प्रशासन और शसन ऐसें मौके पर हर खबर प्राप्त करनें के लिए आपने खुफिया तंत्र तथा सूत्रों को सक्रिया बनाए। सोशल मीडिया एसोसियेशन के सदस्यों का माना है कि प्रधानमंत्री जी की डीजिटल इण्डिया की भावनाओं से जुड़ी नेट व्यावस्था को बंद करनें के वजह ।क्या वाॅटसप व मैसेज का कुछ समय के लिए रोक लगाए जानें की अगर जरूरत हो तों…
जगरूक नागरिको की राय।

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