जिम्मेदार पदों पर आसीन नेता व जनप्रतिनिधि शासन प्रशासन व पुलिस के अधिकारी! आईआईएमटी में उपमुख्यमंत्री क्या जाने से पहले जांच करायी गई?

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प्रदेश देश के उप्र मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा गंगानगर स्थित आईआईएमटी के स्थापना समारोह में भाग लेने तथा उच्च शिक्षा प्राप्त छात्र छात्राओं को सम्मानित करने के लिये पहुंचे। यह कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसा हमेशा ही होता है। क्योंकि आयोजकों का प्रयास होता है कि सत्ताधारी दल के प्रमुख लोगों को बुलाकर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि में अपना दबदबा कायम किया जा सकेें। और अगर ध्यान से सोचे तो इसमे कोई बुराई भी नहीं है।
सवाल यह उठता है कि केंद्र व प्रदेश सरकारों के द्वारा एक नियमावली शायद बनाई गई है। जिसमे अगर कोई शासन पुलिस प्रशासनिक अधिकारी अथवा सरकारी पद पर आसीन जनप्रतिनिधि किसी के यहां जाता है तो उस संगठन और संस्था तथा कालेज व उसके संचालकों आदि के बारे में पूर्व में जानकारी करायी जाती है कि आयोजक या संस्था विवादित तो नहीं है। और उस पर कोई सरकारी बकाया या सरकारी भूमि घेरने अथवा जिस उपयोग के लिये जगह ली गई उसके विपरीत तो जमीन का उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे ही कुछ बिंदुओं से संबंध जानकारियां इसलिये एकत्रित की जाती है जिससे बाद में जाने वाले जनप्रतिनिधि व अधिकारी के सामने कोई विवाद खड़ा न हों।
जब से आईआईएमटी विस्तार में आयी है तब से अधिकारिक रूप से तो नहीं बल्कि अनाधिकारित रूप इसको लेकर कभी खरीदी गई जमीन घेरने तो कभी एमडीए का बकाया भुगतान पूरी तौर पर न करने शुरू शुरू में घरेलू बिजली का उपयोग करने तो प्राईमरी स्कूल के लिये ली गई भूमि पर हाॅस्टल बना देने तथा यहां बनाए गए अस्पताल के लिये बने सभी नियमों का पालन न किये जाने जैसी खबरें मौखिक रूप से सुनने को मिलती रही हैं ।
यह सब सही होंगी यह तो मैं नहीं कह सकता लेकिन इतना जरूर है कि जब कोई वीआईपी यहां आए तो ऐसे तथ्यों की जांच जरूर की जानी चाहिये जिन्हे लेकर बाद में कोई विवाद खडा ना हों और अगर मौखिक चर्चा सही निकले तो जो संबंधित कार्रवाई हो सकती है वो की जाए तथा लाभ के पदों पर विराजमान जनप्रतिनिधियों को पूर्ण जांच रिपोर्ट आ जाने से पहले ऐसे स्थानों पर जाने से बचना चाहिये और संस्था व आयोजन की गोपनीय जांच कराई जाए जनहित में क्योंकि इससे जहां सरकारी नियमों का उल्लंघन होता है वहीं सत्ताधारी दल के बड़े जनप्रतिनिधियों के आगमन से नेताओं तथा आयोजकों के हौंसले बुलंद होते हैं।
मैं यह तो नहीं कहता कि जो चर्चाएं हैं वो सही होगी मगर जनहित में क्योंकि यहां हमेशा किसी न किसी सत्ताधारी दल के प्रमुख जनप्रतिनिधि को बुलाया जाता रहता है। इसलिये एक बार एमडीए की जमीनों व भुगतान तथा अन्य बिंदु जो मौखिक चर्चाओं के आधार पर उपर उजागर किये गए हैं उनकी शासन सरकार, और जनहित में विस्तार के साथ जांच जरूर करायी जाए। क्योंकि सत्ता से बाहर रहने के दौरान जो कार्यकर्ता और नेता वर्तमान में सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों के साथ लगे रहते थे ऐसे मामलों से उनका मनोबल टूटता है क्योंकि सभी जगह मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री आदि जा नहीं सकतें। और आईआईएमटी के संचालक जैसे आयोजक हमेशा शाम दाम दंड भेद की नीति अपनाकर बडे नेताओं व जनप्रतिनिधियों को अपने यहां बुला लेते है और सत्ताधारी दल के लिये जो कार्यकर्ता सड़क पर रहकर पार्टी की जीत के लिये संघर्ष करता है वो कार्यकर्ता व नेता किसी भी प्रकार का सम्मान न मिलने पर हताश हो सकते है। इस बात को दृष्टिगत रख मेरा मानना है कि आईआईएमटी ही नहीं माननीय मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शासन, पुलिस और प्रशासन के अधिकारी या केंद्र सकरार के मंत्री व पार्टी के बडे नेताओं को खासकर वो जिन्हे पूर्व में जानते न हों। उनके यहां जाने से परहेज करना चाहिये। और अपनी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं को बढावा देने के लिये उनके आयोजनों में जाने की प्राथमिकता दी जानी चाहिये। रही बात आईआईएमटी में आयोजन की तो यहां का अगर इतिहास देखा जाए तो सिर्फ उन ही व्यक्तियों को अतिथि बनाकर बुलाया जाता है जो किसी न किसी रूप में या तो संस्था के लिये लाभदायक हो या फिर स्वयं आयोजकों का रूतबा बढ़ाने के लिये ऐसा खासकर भाजपा के आम कार्यकर्ता और जनता का कहना जिससे मैं भी सहमति रखता हूं।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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