प्रधानमंत्री व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष दे ध्यान!सामूहिक रूप से पुरूषों को जलील करने का किसी को नहीं अधिकार!

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राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा के शब्द है अपमानजनक

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश दुनिया में मातृ शक्ति का गुणगान और उनकी उपलब्धियां गिनाए जाने के साथ साथ गांव के गली मोहल्लों से लेकर शहर व कस्बों तक नारी शक्ति का सम्मान और सुरक्षा करने की कसमे खाई गई ओर मंचों से बड़े बड़े दावे भी किये गए। ऐसा हो भी क्यों ना। हमारे समाज में शायद आदिकाल से महिला हर रूप में पूजनीय रही है। और पुरूष उसके पैर छूने और पूजा करने के साथ ही उनको घर के मुखिया का दर्जा हमेशा देता रहा है।
लेकिन यह अधिकार किसी को नहीं है कि महिला सम्मान और रक्षा के नाम पर वो पुरूषों की भावनाओं को आहत करें। चाहे वो कोई भी हों। महिला एवं बाल विकास की ओर से जयपुर में आयोजित अंतराष्ट्रीय महिला दिवस में एक खबर के अनुसार राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने लड़कों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज कल के लड़कों की जींस कमर पर नहीं संभलती। लोवेस्ट जींस पहनकर घूमते हैं जो जींस नहीं संभाल सकता वो अपनी बहनों की रक्षा कैसे करेगा?
वैसे तो सुमन शर्मा जी के यह शब्द ही और सम्मानजनक नहीं थे। महिला आयोग के सम्मानित पद पर आसीन किसी भी महिला को ऐसा कहना शोभा नहीं देता। लेकिन वो पता नहीं किस रो में बोलते बोलते वो इससे भी आगे बढ़ गईं और कहा कि चैड़ी छाती वाले पुरूषों की कल्पना तो अब कल्पना ही बनकर रह गई है। यह देश है वीर जवानों का अब गीत बनकर रह गया।
आजकल के पुरूषांें में वो दम नहीं रहा जो पहले के पुरूषों में हुआ करता था। मेरा मानना है कि हो सकता है कि सुमन शर्मा जी के परिवार में इसी श्रेणी में आने वाले पुरूष हों और चैड़ी छाती या दम की बात वो अपने अनुभव के आधार पर कह रही हों। यह भी हो सकता है कि कुछ पुरूष उनकी सोच के मापदंड पर खरे उतरने वाले हों। मगर पूरे पुरूष समाज पर इस प्रकार की टिप्पणी को उचित नहीं कहा जा सकता।
मुझे लगता है कि राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा जी को अपने शब्द वापस लेते हुए पुरूष से ही नहीं पूरे समाज से माफी मांगी चाहिये। और अगर वो ऐसा नहीं करती है तो वहां की मुख्यमंत्री को उन्हे उनके पद से निष्काशित कर देना चाहिये। क्योंकि जो माननीय और उच्च सम्मानित महिला शब्दों का सही उपयोग नहीं कर सकती और पुरूषों के बारे में इतनी कड़वाहट अपने मन में रखती हो उन्हें इतने महत्वपूर्ण पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं।
शायद वो भूल गई हैं कि जिस पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। उसकी भागडोर भी पुरूषों के हाथ में है और वो सब अपने अपने क्षेत्रों में सफलता के साथ काम कर रहे हैं। तथा 56 इंच को चैड़ा सीना लेकर हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का झंडा बुलंद करने में लगे हैं।
इतना ही नहीं सुमन शर्मा जी के बयान को पढ़कर अगर वो सही है तो यह सोचने के लिये भी मजबूर होना पड़ रहा है कि वो अपने कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मामलों में किसी विशेष भावना से प्रोत्साहित होकर पुरूषों का उत्पीड़न करने का सामूहिक अभियान भी चला सकती हैं। जिसे किसी भी रूप में सही नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इससे समाजिक संतुलन भी बिगड़ सकता है।
मुझे लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सुमन शर्मा जी के संबोधन का पूर्ण विवरण मंगवाकर उसका अवलोकन करना चाहिये। और जो शब्द समाचार पत्रों में छपे हैं अगर वो सही निकलें तो उन्हे पद से तुरंत हटाने के साथ साथ सामुहिक रूप से पुरूष समाज का अपमान करने के लिये उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सुमन शर्मा जी का दैनिक जागरण के पहले पृष्ठ पर एक काॅलम में छपा बयान इस प्रकार है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने लड़कों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आजकल के लड़कों की जींस कमर पर नहीं संभलती। लड़के लो-वेस्ट जींस पहनकर घूमते हैं,जो जींस नहीं संभाल सकता, वो अपनी बहनों की रक्षा कैसे करेगा। सुमन शर्मा ने कहा कि चैड़ी छाती वाले पुरुषों की कल्पना, कल्पना बनकर ही रह गई है । ‘ये देश है वीर जवानों का गाना भी’ अब गीत बनकर ही रह गया है। उन्होंने कहा कि आजकल के पुरुषों में वो दम नहीं रहा, जो पहले के पुरुषों में हुआ करता था। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सुमन शर्मा ने लड़कियों से खुद की रक्षा खुद ही करने का आह्वान करते हुए कहा कि नारी सशक्तीकरण को नारा ही नहीं रहने देना, बल्कि अमल में लाकर दिखाना है।प्रधानमंत्री व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष दे ध्यान!
ुराजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा के शब्द है अपमानजनक सामूहिक रूप से पुरूषों को जलील करने का किसी को नहीं अधिकार!

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अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश दुनिया में मातृ शक्ति का गुणगान और उनकी उपलब्धियां गिनाए जाने के साथ साथ गांव के गली मोहल्लों से लेकर शहर व कस्बों तक नारी शक्ति का सम्मान और सुरक्षा करने की कसमे खाई गई ओर मंचों से बड़े बड़े दावे भी किये गए। ऐसा हो भी क्यों ना। हमारे समाज में शायद आदिकाल से महिला हर रूप में पूजनीय रही है। और पुरूष उसके पैर छूने और पूजा करने के साथ ही उनको घर के मुखिया का दर्जा हमेशा देता रहा है।
लेकिन यह अधिकार किसी को नहीं है कि महिला सम्मान और रक्षा के नाम पर वो पुरूषों की भावनाओं को आहत करें। चाहे वो कोई भी हों। महिला एवं बाल विकास की ओर से जयपुर में आयोजित अंतराष्ट्रीय महिला दिवस में एक खबर के अनुसार राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने लड़कों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज कल के लड़कों की जींस कमर पर नहीं संभलती। लोवेस्ट जींस पहनकर घूमते हैं जो जींस नहीं संभाल सकता वो अपनी बहनों की रक्षा कैसे करेगा?
वैसे तो सुमन शर्मा जी के यह शब्द ही और सम्मानजनक नहीं थे। महिला आयोग के सम्मानित पद पर आसीन किसी भी महिला को ऐसा कहना शोभा नहीं देता। लेकिन वो पता नहीं किस रो में बोलते बोलते वो इससे भी आगे बढ़ गईं और कहा कि चैड़ी छाती वाले पुरूषों की कल्पना तो अब कल्पना ही बनकर रह गई है। यह देश है वीर जवानों का अब गीत बनकर रह गया।
आजकल के पुरूषांें में वो दम नहीं रहा जो पहले के पुरूषों में हुआ करता था। मेरा मानना है कि हो सकता है कि सुमन शर्मा जी के परिवार में इसी श्रेणी में आने वाले पुरूष हों और चैड़ी छाती या दम की बात वो अपने अनुभव के आधार पर कह रही हों। यह भी हो सकता है कि कुछ पुरूष उनकी सोच के मापदंड पर खरे उतरने वाले हों। मगर पूरे पुरूष समाज पर इस प्रकार की टिप्पणी को उचित नहीं कहा जा सकता।
मुझे लगता है कि राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा जी को अपने शब्द वापस लेते हुए पुरूष से ही नहीं पूरे समाज से माफी मांगी चाहिये। और अगर वो ऐसा नहीं करती है तो वहां की मुख्यमंत्री को उन्हे उनके पद से निष्काशित कर देना चाहिये। क्योंकि जो माननीय और उच्च सम्मानित महिला शब्दों का सही उपयोग नहीं कर सकती और पुरूषों के बारे में इतनी कड़वाहट अपने मन में रखती हो उन्हें इतने महत्वपूर्ण पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं।
शायद वो भूल गई हैं कि जिस पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। उसकी भागडोर भी पुरूषों के हाथ में है और वो सब अपने अपने क्षेत्रों में सफलता के साथ काम कर रहे हैं। तथा 56 इंच को चैड़ा सीना लेकर हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी का झंडा बुलंद करने में लगे हैं।
इतना ही नहीं सुमन शर्मा जी के बयान को पढ़कर अगर वो सही है तो यह सोचने के लिये भी मजबूर होना पड़ रहा है कि वो अपने कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मामलों में किसी विशेष भावना से प्रोत्साहित होकर पुरूषों का उत्पीड़न करने का सामूहिक अभियान भी चला सकती हैं। जिसे किसी भी रूप में सही नहीं कहा जा सकता। क्योंकि इससे समाजिक संतुलन भी बिगड़ सकता है।
मुझे लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी जी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सुमन शर्मा जी के संबोधन का पूर्ण विवरण मंगवाकर उसका अवलोकन करना चाहिये। और जो शब्द समाचार पत्रों में छपे हैं अगर वो सही निकलें तो उन्हे पद से तुरंत हटाने के साथ साथ सामुहिक रूप से पुरूष समाज का अपमान करने के लिये उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सुमन शर्मा जी का दैनिक जागरण के पहले पृष्ठ पर एक काॅलम में छपा बयान इस प्रकार है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने लड़कों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आजकल के लड़कों की जींस कमर पर नहीं संभलती। लड़के लो-वेस्ट जींस पहनकर घूमते हैं,जो जींस नहीं संभाल सकता, वो अपनी बहनों की रक्षा कैसे करेगा। सुमन शर्मा ने कहा कि चैड़ी छाती वाले पुरुषों की कल्पना, कल्पना बनकर ही रह गई है । ‘ये देश है वीर जवानों का गाना भी’ अब गीत बनकर ही रह गया है। उन्होंने कहा कि आजकल के पुरुषों में वो दम नहीं रहा, जो पहले के पुरुषों में हुआ करता था। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सुमन शर्मा ने लड़कियों से खुद की रक्षा खुद ही करने का आह्वान करते हुए कहा कि नारी सशक्तीकरण को नारा ही नहीं रहने देना, बल्कि अमल में लाकर दिखाना है।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

 

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