विश्व महिला दिवस पर विशेष, हम किसी से कम नहीं

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विश्व महिला दिवस के इस अवसर पर में एक महिला होने के नाते आप सभी से अपने मन की बात करना चाहती हूँ। एक महिला यदि स्वयं के लिए कुछ करने में सक्षम होगी तभी अपने और परायो के हित में कुछ कर सकती है। मेरी सोच है कि महिलाओ को स्वयं की रक्षा करने के लिए अपने आप में आत्म विश्वास पैदा करना सीखना व सिखाया जाना चाहिए, जिससे उन्हे किसी व्यक्ति पर अपनी सुरक्षा के लिए निर्भर नहीं होना पड़े चाहे वो भाई हो पिता हो या पति उस पर आश्रित होने के बजाए वो उसके साथ हर छेत्र में कंधे से कंधा मिलकर चलने के लिया हमेशा तैयार रहे यह बात आज की नारी के लिया सबसे महत्वपूर्ण  है।
महिलाओ को छोटी-छोटी उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया जाना वक़्त की मांग है क्योकि अगर नारी चाहे बहन पत्नी मां अथवा अन्य किसी भी रूप में क्यो ना हो उसे सशक्त बनाना समाज को जोड़े रखना हर प्रकार से मानव समुदाय को सशक्त बनाना है। पूरे विश्व में नारी एक चाणक्य नीति अपनाकर जो मेनेजमेंट बनाती है वो ही समाज को एक सूत्र में बांधे रखने में सफल है।
मजबूत महिला किसी भी जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत हर व्यक्ति में पैदा कर सकती हैए और यह ताकत ही परिवार को जोड़ने तथा प्रमुख स्थान पर स्थापित रखने का जोश और जज्बा पैदा करने मैं सफल भूमिका निभा सकती है। हमारे समाज मैं महिलाओ की वीरता की कहानिया नानी और दादी हमेशा सुनती रही है जो इस बात का प्रतीक है हर छेत्र में घर हो या बाहर हम महिलाएं ममता माई रूप में अपना महत्वपूर्ण योगदान किसी भी छेत्र में करने में किसी से पीछे नहीं है।
सहेलियों आप हो या मैं प्रत्येक महिला के दिल के किसी ना किसी कोने में अभूतपूर्व उत्साह और जोश इतना समाया रहता है की अगर वो कुछ अच्छा करने में उतर आए तो हर छेत्र में सफलता का डंका बजने से उसे कोई नहीं रोक सकता। बस आवश्यकता उसे खोजने व बढ़ावा देने की है। अगर एक महिला किसी भी मामले में अपनी पर आजाए तो वह ब्रह्माण्ड को भी खोज सकती है। शायद इसलिए कहा जाता है की कोई भी सफल कहानी महिला प्रोत्साहन के बिना आसानी से पूरी नहीं होती। जब हम सफलता की अपनी यात्रा पर चलती है तो हम हमेशा औरों के मुक़ाबले हर तरह से मजबूत होती है! बहनों हम महिलाओ में वह साहस और प्यार का खजाना है जो किसी को भी अपना बना सकता है। अगर पूर्व में देखे तो उन महिलाओ की हमेशा जय हुई है जिन्होने आगे बढ़कर अपने परिवार को बंधे रखने के साथ साथ अपनी काबिलियत से परिवार और समाज दोनों को जोड़े रखने के लिए उन्हे सदमार्ग दिखने का काम किया है।
वैसे तो हमारे लिए हर दिन महत्वपूर्ण है क्योकि हमारे पास कहने और करने के लिए सब के हित में बहुत कुछ है लेकिन आज विश्व महिला दिवस पर में तो आप सब से एक ही अग्रह कर सकती हूँ की हर छेत्र में आगे बड़ने का जज्बा कायम रखते हुए अपने घर और परिवार के सदस्यों की उपेक्षाओ पर खरे उतर अगर हम कुछ करने का सोचेंगे तो हमे सफलता मिलना तय है क्योकि उस काम में परिवार के स्दस्ये भी चाहे वो पीहर का हो या ससुराल का उनका सहयोग पूर्ण रूप से हमारे साथ होगा।
आज महिला दिवस पर बस इतना और कहना चाहती आगे भी अपनी भावनाओ से जड़े शब्दो के साथ आपका और हमारा तालमेल बना रहेगा। महिला दिवस पर मुझे और आप दोनों को बधाई।

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आ ले चलु तुझे
अंधेरों से कहीं दूर
आ ले चलु दूर कही आसमां में
आ चल मेरे संग तू
प्रगति की ओर…..अराती अंकित सिंह

सम्पादक – मासिक पत्रिका वेअहेड

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