महानगर व मंडलों में बदले जा सकते हैं पदाधिकारी,कैंट उपाध्यक्ष हो सकता है भाजपा का कोई सदस्य,डा. सरोजनी अग्रवाल, व लक्ष्मीकांत वाजपेई जा सकते हैं विधान परिषद ……

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राष्ट्रोदय समागम की सफलता के लिये धन्न्नज्य सिंह को संघ में मिल सकती है बडी जिम्मेदारी ,कैंट उपाध्यक्ष हो सकता है भाजपा का कोई सदस्य,डा. सरोजनी अग्रवाल, व लक्ष्मीकांत वाजपेई जा सकते हैं विधान परिषद 

जिले में भाजपा के 6 विधायक और उस समय में मेयर भाजपा का होने के बाद भी नगर निगम माहापौर के चुनाव में पार्टी को मिली पराजय ने जहां बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया था वहीं भाजपा के प्रमुख नेताओं को जिले से लेकर लखनउ तक हिलाकर रख दिया था। लेकिन समझदारी और कूटनीति का परिचय देते हुए पार्टी इस हार के साथ ही पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के कददावर नेता डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई को शहर विधानसभा सीट पर मिली हार को भी चुपचाप पचा गई और उस समय निचले स्तर पर भले ही कुछ सुगबुगाहट चली हो मगर उच्च स्तर पर बिल्कुल कहीं यह महसूस नहीं होने दिया गया कि पार्टी को हुए इस नुकसान से वो विचलित हैं ।
बीती 25 फरवरी को शहर के जाग्रति विहार में संघ परिवार के समुदायिक समागम को आईटीआई कानपुर से पास आउट तथा 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सोशल मीडिया से जोड़कर सूत्रों के अनुसार अभूतपूर्व सफलता दिलाने में योगदान निभाने वाले धन्नजय सिंह के प्रयासों से समागम अत्यंत सफल और अभूतपूर्व रहा। इस दौरान पार्टी के नेताओं को कई माध्यमों से बताते हैं कि यह भी पता चलता रहा कि किस नेता व कार्यकर्ता में कितना दम हैं। ओर उसका इसमे कितना योगदान रहा।
बताते हैं कि उच्च कमान के सूत्रों ने विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई की हार और मेयर चुनाव में हरिकांत अहलुवालिया को मिली पराजय के कारणों को भी समागम के दौरान यहां रहे नेताओं ने खूब खंगाला। इसी समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान अश्वनी त्यागी को सौंपी गई। तथा 2014 के चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों को जनसमर्थन प्राप्त करने में कोई परेशानी न हों। इस दृष्टि से जो व्यूह रचना कर शहरों से निकलकर गांव तक में आरएसएस को सक्रिय करने तथा भाजपा की मजबूती हेतु जो निर्णय हुए मुझे लगता है कि उन्ही का परिणाम है कि राज्य सभा के लिये यूपी के 18 प्रत्याशियों में से मेयर का चुनाव हारी मजबूत भाजपा महिला नेता कांता कर्दम तथा किसान राजनीति से जुड़े रहे सरधना के पूर्व विधायक ठाकुर विजय पाल सिंह सहित दो नेताओं को राज्य सभा प्रत्याशी घोषित कर शायद पार्टी ने यह संदेश दिया है कि पिछले काफी समय से उपेक्षित धार्मिक और स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि से जुड़े इस जनपद की अवहेलना अब आगे नहीं होगी। पार्टी कार्यकर्ता मजबूती से जनता के बीच अपनी पैंठ स्थापित करे।
केंद्र व प्रदेश भाजपा नेतृत्व के द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शहर को प्राथमिकता देने और फिर राज्य सभा में गांव किसान से जुड़े हसमुंख और मिलनसार हमेशा कार्यकर्ताओं के निकट रहने वाले ठाकुर विजय पाल सिंह और कांता कर्दम को राज्यसभा में पहुंचाने का रास्ता खोला। अब चर्चा जो मौखिक रूप से सुनाई दे रही है उससे जो तथ्य उभरकर आते हैं उन पर अगर गंभीरता से सोचा जाए तो भाजपा के जनपद और महानगर तथा मंडलों के पदाधिकारियों में तो बदलाव होना तय माना ही जा रहा है यह भी सुनने को मिल रहा है कि समागम की सफलता में 60 प्रतिशत भूमिका निभाने वाले धननजय सिंह को भी अब किसी उच्च पद पर ले जाकर बैठाया जा सकता है क्योंकि देश में इतना बड़ा और सफल संघ का आयोजन एक बड़ी बात थी। इससे पूर्व इस शहर में जन्में आरएसएस के बड़े नेता के रूप में स्थापित सूर्य प्रकाश टांक को वेस्ट क्षेत्र के संघ संचालक बनाया जा चुका है। जो इस बात का प्रतीक है कि परिवर्तन की व्यवस्था लागू कर लोकसभा के चुनाव आने तक हर कार्यकर्ता में एक आत्मविश्वास तथा नेताओं में नेतृत्व की क्षमता को बढ़ाया जा सकें। इस कड़ी में बताते हैं कि इस महीने के आखिर तक जिला शहर और मंडल प्रमुख व पदाधिकारियों में बदलाव हो सकता है।
तो दूसरी ओर सूत्रों भाजपा के क्षेत्र में सक्रिय बिंदुओं से जो खबर छनकर बाहर आ रही है वो अगर सही है तो बहुत जल्द कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर कोई भाजपा का छावनी सदस्य विराजमान हो सकता है।
इस संदर्भ में जानकारों का कहना है कि विपिन सोढी रिंकी जैन, धर्मंेद्र सोनकर अनिल जैन व नीरज राठौर भाजपा के पांच सदस्य कैंट बोर्ड में चुनकर गए। लेकिन मंजू गोयल बुशरा कमाल, के दम पर बीना वाधवा पूर्व उपाध्यक्ष सुनील वाधवा, के द्वारा चली गई शतरंज की गोठियों दम पर उपाध्यक्ष बन बैठी। जिससे पार्टी को एक बड़ा झटका लगा था। लेकिन भले ही उपर से कोई कुछ न कहे अंदर ही अंदर कई गुटों में बंटी बताई जा रही पार्टी के उन नेताओं के उपर से जो पेंच कसे गए उनसे अब सब लोकसभा चुनाव में संगठित होकर नरेंद्र मोदी और भाजपा को मजबूत करने के लिये तैयारी कर रहे बताए जाते हैं। इसलिये इस चर्चा में दम नजर आता है कि अनिल जैन या विपिन सोढी में से कोई एक वर्तमान उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उपाध्यक्ष के पद पर विराजमान हो सकता है।
अब रही बात प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री रहे भाजपा के नेता पूर्व भाजपा अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई को राज्यसभा न मिलने से टूटी उम्मीद को उंचाईयों की उड़ान देने के लिये विधान परिषद से सपा सदस्य के रूप में इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुई डा. सरोजनी अग्रवाल, डा. लक्ष्मीकांत वाजपेई को विधान परिषद में भेजकर इस चुनाव से पूर्व किसी न किसी रूप में उन्हे मंत्री बनाने या अन्य बडी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
मौखिक सूत्रों और चर्चित बिंदुओं से से जो जानकारी प्राप्त हुई तथा आये दिन जो खबरे पढने को मिल रही है और संघ पार्टी एवं उच्च सदन में जनपद को महत्वपूर्ण स्थान देने हेतु जो नेता पहुंचाए जा रहे हैंें उनको देखते हुए यह बाते कहीं जा रही हैं। होगा क्या यह तो समय ही बताएगा अथवा पार्टी के राजनेता ही जान सकते हैं।
मगर एक बात विश्वास के साथ कहीं जा सकती है की कांता कर्दम और ठाकुर विजय पाल सिंह को राज्य सभा उम्मीदवार घोषित कराने में कहीं न कहीं मेरठ हापुड लोकसभा क्षेत्र के सांसद राजेंद्र अग्रवाल का बडा योगदान रहा होगा। दोनों के माध्यम से भाजपा दलित, किसान और ठाकुर व महिला वोटों को साधने का काम मजबूती से कर सकते हैं। अब जैसा की जानकारी मिल रही है कि भाजपा के गढ़ छावनी में जो बिखराव चल रहा था उसे रोकने के लिये कैंट बोर्ड में जो गोठियां बैठाई जा रही है इसके पीछे भी कहंी न कहंी संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने के लिये काम करने वाले वर्तमान सांसद राजेंद्र अग्रवाल की ही भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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