सबकी खुशी के लिये खेलों होली !

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मस्ती, उमंग का त्यौहार होली का नाम जब आता है तो उमंग और उत्साह का संचार अपने आप में होने लगता है। आपसी भाईचारे और सदभाव की मजबूती के इस त्यौहार के बारे में कहा जाता है कि लोग एक दूसरे से गले मिलकर अपनी पुरानी बातों को भुलाकर दिलों के गिले शिकवे को दूर कर गले मिलकर उन्हे मिटा देते है और फिर एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए आगे बढ़ते हैं।
होली मनाने को लेकर हर व्यक्ति का अपना अलग अलग विचार एवं सोच है। प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अपने हिसाब से होली मनाने का संदेश देते है तो समाज के विद्वान और जनप्रतिनिधि इससे अलग कुछ भाईचारा मजबूत करने का संदेश देते हैं धार्मिक क्षेत्रों के विद्वानों द्वारा होली का त्यौहार कैसे मनाया जाए। और कब होली का दहन किया जाए और उसकी विधि को समझाते हैं।
मैं समझता हूं कि यह सब जो भी जिस तरह से हमे समझाते है और बताते हैं उसमे कहीं न कहीं हमारा ही भला होता है, लेकिन मुफ्त की सलाह चाहे वो कितनी ही सकारात्मक व लाभकारी क्यों न हों। कम लोग उसे आत्मसार करना चाहते हैं।
इसलिये मेरा मानना है कि जैसा आपको अच्छा लगे वैसे होली के रंगों का यह रंग बिरंगा त्यौहार खूब जमकर मनाए। जो लोग नहंी चाहते उनपर रंग और गुलाल न डालने के अलावा आप अपनी सोच के अनुरूप खुब होली खेलों जो आपको और दूसरो को भी अच्छी लगे। वो मस्ती करें बस मन के गिले शिकवो को हटाकर चेहरे की मुस्कुराहट बनाकर किसी को जबरदस्ती परेशान करने के बजाए अपनी मस्ती में नाचो गाओ और होली मनाओ। इतना ध्यान जरूर रखों की अगर हमे किसी चीज से कोई परेशानी हो सकती है तो दूसरे को भी जरूर होगी। इसलिये एक तो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले रंग और गुलाल तथा चेहरे को विक्रत करने वाले तरल लोशन, पदार्थ अथवा ऐसे रंग जो आसानी से चेहरे और शरीर से छुट न पाए उनसे दूरी बनाकर रखे नाले और नालियों की कीचड़ का उपयोग उत्साह में भरकर न करें और जो सबसे बड़ी बात है वो यह है कि इस त्यौहार का मेन उददेश्य आपसी भाईचारा और सद्भाव तथा कानून व्यवस्था व शांति बनी रही। इसलिये स्वयं तो कोई ऐसा कार्य न करे जिसे बदमनी पैदा होने की संभावना हों। दूसरों को भी न करने दें।
और अगर ऐसा लगता है कि कहंी कोई कुछ गलत करने वाला है तो उसकी सूचना जिम्मेदार नागरिकों और अफसरों को देें हम हमारे अपने पूरी तौर पर निर्भिक वातावरण में शांति के साथ होली के रंगों में तर होकर एक दूसरे के गले मिल सकंे। इसके लिये जरूरी है कि व्यवस्था बनाने में लगे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों व स्वयं सेवकों को पूरी मदद करते हुए अपना सहयोग उन्हे दें। और इस बात का भी ध्यान रखे कि किसी को कोई कष्ट न हों।
आज देश भर में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिये हर स्तर पर अभियान चल रहे हैं। हमारे पेड़ पौधे इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हमे स्वच्छ सांस लेने का अवसर देते हैं इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हम होली का दहन तो जरूर करे लेकिन भक्त पहलाद की सोच के समान सबके हित में उसमे लकड़ियों का उपयोग कम करे हां अपनी सोच में होलिका की विक्रत मानसिकता को त्यागने का संकल्प ले तो कम लकड़ियों का होली का दहन भी हमारे लिये वरदान साबित हो सकतो है।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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