अपने कार्यकाल में भारत निर्वाचन आयोग को एक नई पहचान देने में सफल रहे पूर्व निर्वाचन आयुक्त टीएन शेषन का इलाज केंद्र सरकार कराए!

loading...

1990 के दशक में बिहार में हुए चुनावों के दौरान निर्वाचन आयोग की ताकत का अहसास और चुनाव कई चरणों में कराने की प्रथा लागू करने वाले टीएन शेषन को देशवासी आज भी भूल नहीं पाए हैं। अपने कार्यकाल के दौरान पत्रकारों से यह कहने वाले की अगर मेंै इस नौकरी में नहीं होता तो बस कंडेक्टर की नौकरी करता होता। टीएन शेषन अभी पिछले दिनों अपना 85वां जन्म दिन 15 दिसंबर को मना चूके हैं। सांई बाबा के भक्त उस समय गहरे सदमे में पहुंच गए जब उन्हे सांई बाबा के निधन की सूचना मिली । वर्तमान समय में वो अपनी पत्नी के साथ चेन्नई के ओल्ड एज होम एसएस रेजिडेंसी में अपना समय बीता रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद चाहे वो कितना बड़ा अधिकारी या सरकारी पदों पर रहने वाला जन प्रतिनिधि ही क्यों न हों। लगभग उसे भूलाने की नीति तो अब ज्यादातर मामलों में दिखाई देने लगी हैं। इसलिये टीएन शेषन को इससे अलग रखकर सामान्य रूप से नहीं देखा जा सकता। लेकिन देश में चुनावी तंत्र में सुधार और आयोग क्या क्या कर सकता है मुठमर्दाें व बाहुबलियों को यह समझाने के साथ साथ आम आदमी को बिना पैसे और सुविधाओं के चुनाव लड़ने का मौका आसानी से मिल सकता है। यह समझाने में टीएन शेषन का अपना एक महत्वपूर्ण काम रहा है।
मेरा मानना है कि वैसे तो उन्हे एक अच्छी खासी पेंशन और सेवानिवृत्ति अफसरों को मिलने वाली सभी सुविधाएं मिल रही होंगी मगर टीएन शेषन जैसे जीवन प्रवत्ति का व्यक्ति जल्दी से कोई बात भूलेंगा या 85 वर्ष की उम्र में देश को कोई अच्छे सुझाव नहीं दे पाएगा ऐसा लगता नहीं है। इन तथ्यों और टीएन शेषन की देश सेवा तथा गरीब व कमजोर और निर्धनों को चुनाव लड़ने का मौका दिलाकर
लोकतंत्र में हर व्यक्ति की अपनी एक अलग आसित्व खड़ा करने में सफल रहे पूर्व निर्वाचन आयुक्त जिनका नाम लोकतंत्र में पारदर्शी व कानून और शांति व्यवस्था को स्थापित करने के लिये सर्विर्णम अक्षरों में लिखा जाना चाहिये। उन टीएन शेषन का इलाज उच्च स्तरीय व्यवस्था के तहत केंद्र की सरकार को देश व विदेश के अच्छे डाॅक्टरों से कराने की पहल कायम करनी होगी। जिससे सरकार की नीति के तहत हर व्यक्ति चाहे वो सरकारी अफसर हो या जनप्रतिनिधि आम आदमी हो या नेता। उसे देशहित और
समाजहित में काम करने की प्रेरणा मिल सकें।
मेरा तो यह भी मानना है कि सरकारी अफसरों में यह विश्वास जगाने ेक लिये कि अगर वो अपने कार्याें का ईमानदारी और सरकारी नीति के तहत निर्वाह करेंगे तो रिटायर्ड होने के बाद पेंशन व सुविधाओं के अतिरिक्त उनके कार्याें की सराहना तथा पहचान दोनों होगी तो वो शायद और भी मन लगाकर अपने काम को अंजाम दे सकेंगे।

इसे भी पढ़िए :  VIDEO: सपना चौधरी ने किया ऐसा DANCE, सभी देखते ही रह गए

– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

twelve − eleven =