लोकायुक्त की नियुक्ति से साफ इनकार कर चुके सीएम ने कहा- SC के आदेश का होगा अध्ययन

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से कहा है कि विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक पारित होने के तीन माह के अंदर राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति की जाए। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानविलकर और जस्टिस धनंजय चंद्रचूड की बेंच के समक्ष उत्तराखंड सरकार ने कहा कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर नया एक्ट लाया जा रहा है और नया बिल विधानसभा में पेश हो चुका है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नया एक्ट आने के तीन महीने के भीतर लोकायुक्त की नियुक्ति की जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय की याचिका का निस्तारण कर दिया।

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गौरतलब है कि पांच जुलाई, 2017 को हुई पिछली सुनवाई में उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि लोकायुक्त बिल को लेकर कुछ संशोधन किए गये हैं और ये बिल अगले विधानसभा सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। उस सत्र में बिल को पास करवा कर लोकायुक्त की नियुक्ति की दी जाएगी लेकिन अभी इसमें छह महीने का समय लगेगा।

क्या है लोकायुक्त?
*लोकायुक्त का एक अध्यक्ष होगा जो राज्य के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या फिर हाई कोर्ट के रिटायर जज या फिर कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति हो सकता है।
*लोकायुक्त में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से आधे न्यायिक पृष्ठभूमि से होने चाहिए।
*कम से कम आधे सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जाति, अल्पसंख्यकों और महिलाओं में से होने चाहिए।

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किसकी हो सकती है लोकायुक्त में नियुक्ति?

*अगर व्यक्ति हाई कोर्ट के जज हों या पूर्व जज हों।
*पूरी तरह ईमानदार, भ्रष्टाचार निरोधी नीति, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, सतर्कता, बीमा, बैंकिंग, कानून और प्रबंधन के मामलो में कम से कम 25 साल का विशेष ज्ञान और विशेषज्ञता हो।

कौन नहीं बन सकता लोकायुक्त?
*संसद सदस्य या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा का सदस्य, किसी पंचायत या निगम का सदस्य लोकायुक्त नहीं हो सकता।
*नैतिक भ्रष्टाचार का दोषी, नौकरी से बर्ख़ास्त व्यक्ति लोकायुक्त नहीं हो सकता।
*किसी राजनीतिक दल से संबंध हो, व्यापार करता हो, पेशेवर के रूप में सक्रिय हो।
*ऐसा व्यक्ति जिसकी उम्र अध्यक्ष या सदस्य का पद ग्रहण करने तक 45 साल न हुई हो।
*लोकायुक्त कार्यालय में अपने पद के अलावा किसी लाभ या विश्वास के पद पर बैठा व्यक्ति।

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