AIDS का प्रजनन क्षमता पर गंभीर प्रभाव

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नई दिल्ली। आज एड्स ऐसी भयानक बीमारी है जिससे हर इंसान वाकिफ है। एड्स इंसान को धीरे-धीरे मारता है। ऐसे में ‘‘AIDS/HIV’ बांझपन (बच्चे न पैदा कर पाने) का संभावित कारण हो सकता है। एड्स, प्रजनन क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। ‘‘WHO’ की र्पिोट के अनुसार, एचआईवी वायरस की मां से बच्चे में जाने की दर 15 फीसद से 45 फीसद होती है। यह दर गर्भावस्था के चक्र, प्रसव और स्तनपान के दौरान असरदार इलाज के साथ पांच फीसद से कम की जा सकती है। इन हस्तक्षेपों में मुख्य रूप से ‘‘Antiretroviral’ उपचार शामिल है।

महिला के साथी और नवजात में स्थानांतरित होने का उच्च जोखिम : अत्यधिक सक्रिय ‘‘Antiretroviral’ उपचार (एचएएआरटी) को शुरू करने से पहले, माता-पिता बनने की उम्मीद रखने वाले एचआईवी वाले लोगों के लिए अनेक समस्याओं को उठाया गया है। इसमें साथी और साथ में नवजात में स्थानांतरित होने का उच्च जोखिम शामिल है। ‘‘‘‘hIV संक्रमित महिला गंभीर ‘‘PID’ (पेल्विक इंफ्लेमेटोरी डिजीज) का सामना कर सकती है क्योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसीलिए, ‘‘फस्र्ट स्टेप आईवीएफ क्लीनिक’ की डॉ. प्रीति गुप्ता का कहना है कि प्रजनन के इलाज के बजाय एड्स की रोकथाम करना ज्यादा उचित रहता है’’।

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इन महिलाओं को माहवारी बंद होने की संभावना ज्यादा रहती है : एचआईवी-पॉजिटिव महिलाओं में ‘‘एनोवुलेटरी सायकल’ और ‘‘अमनोरिया’ या माहवारी चक्र का पूरी तरह बंद होने की ज्यादा संभावना रहती है। एचआईवी संक्रमित महिलाओं में बांझपन के कारणों के अलावा तनाव, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, वजन घटना, और विभिन्न यौन संक्रमित बीमारियों की मौजूदगी शामिल है।

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उपचार कराने से बचने पर परेशानियां आ सकती हैं : जो महिला ‘‘एंटीरेट्रोवायरल’ उपचार कराने से बचती हैं उनमें गर्भावस्था के साथ ज्यादा अतंराल पर परेशानियां आ सकती हैं। ‘‘एचएएआरटी’ के विकास के साथ, एचआईवी-पॉजिटिव महिलाओं की बढ़ती संख्या सुरक्षित योनि प्रसवों को अपना सकती हैं। हालांकि योनि प्रसव की सिफारिश केवल तभी की जाती है यदि एचआईवी-पॉजिटिव गर्भवती महिला को सही प्रसव-पूर्व देखभाल मिल रही है और वायरल लोड 36 महीने के गर्भ में 1000 कॉपीज प्रति एमएल से कम है।

HIV संक्रमित पुरुषों को ऐसी परेशानियां होती हैं : शुक्राणु की कार्यशीलता भी एचआईवी द्वारा प्रभावित हो सकती है। एचआईवी संक्रमित पुरुषों में अंडकोषों की सूजन और अपर्याप्त ‘‘टेस्टोस्टेरोन लेवल्स’ का बनना की घटना भी हो सकती है। ऐसे लोग यौन इच्छा में कमी और ‘‘इरेक्टाइल’ या ‘‘एजाकुलेटरी डिसफंक्शन’ का अनुभव भी करते हैं।

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जिन्हें प्रजनन संबंधी समस्याएं हैं : सहायता प्राप्त प्रजनन विकल्प (असिसटेड रीप्रोडक्शन ऑप्शंस) उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकते हैं जिन्हें प्रजनन संबंधी समस्याएं हैं और ‘‘एचआईवी सेरोडिस्कोर्डेन्ट कपल्स’ (यानि ऐसा कपल जिनमें से एक पार्टनर एचआईवी पॉजीटिव है और दूसरा एचआईवी निगेटिव है) का सुरक्षित चुनाव कर सकते हैं। तीन सबसे आम सहायता प्राप्त प्रजनन विकल्प है ‘‘Intrauterine insemination’, ‘‘इन विट्रो र्फटलिाइजेशन’, और ‘‘इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन’। इन सभी तकनीकों ने रिसर्च के अनुसार सफल नतीजे प्रदान किए जा सकते हैं।

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