छात्राओं के कपड़े उतरवाने वाले शिक्षकों!

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स्कूल के प्रधानध्यापक अन्य दोषियों की नौकरी तथा स्कूल की मान्यता की जाए रदद

माता पिता के बाद शिक्षा देने वाले गुरूजनों का स्थान जीवन में महत्वपूर्ण होता है। इसलिये उन्हे भी अपनी गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिये पूर्ण सयम से काम लेने के साथ साथ वक्त की मांग और समय की नजाकत को देखकर चलना ही होगा। क्योंकि अब समय बदल रहा है। स्कूल मोटी फीस अभिभावकों से ले रहे हैं। जिससे एक ऐसा माहौल समाज में बन गया है कि अब शिक्षक गुरूजन कम पैसा के लिये शिक्षा की दुकान चलाने वाले प्रतिष्ठान के मैनेजर के रूप में देखा जाने लगा है। मगर शायद स्कूल संचालक और शिक्षक आदि यह बात समझने को तैयार नहीं है। और यही कारण है कि आये दिन शिक्षकों के समक्ष अनेक कठनाईयां या तो शिक्षा संस्थान उत्पन्न कर रहा है अथवा छात्र पैदा कर देते हैं परेशानी।
गुरूजनों को अब समय की पहचान करते हुए छात्र छात्राओं को चाहे वो छोटे हो या बड़े उन्हे अपने बच्चों की तरह ही समझना होगा और समय अनुकूल निर्णय लेने के लिये सोच विचार भी करना होगा। इस संदर्भ में छपी एक खबर के अनुसार अरूणाचल प्रदेश में एक गल्र्स स्कूल की 88 छात्राओं को तीन शिक्षकों ने सजा के तौर पर कथित तौर पर अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया। इन छात्रओं ने प्रधानाध्यापक के खिलाफ कथित तौर पर अश्लील शब्द लिखे थे। पुलिस ने बताया कि पापुम पारे जिला में तनी हप्पा (न्यू सागली) स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छठी और सातवीं कक्षा की 88 छात्रओं को 23 नवंबर को इस सजा का सामना करना पड़ा। हालांकि यह मामला 27 नवंबर को प्रकाश में आया, जब पीड़िताओं ने आॅल सागली स्टूडेंट्स यूनियन पद के अधिकारियों से संपर्क किया, जिसने फिर स्थानीय पुलिस के पास एक प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक दो सहायक शिक्षकों और एक जूनियर शिक्षक ने 88 छात्रओं को अन्य छात्राओं के सामने अपने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया। दरअसल, इन छात्रओं के पास से कागज मिला था जिस पर प्रधानाध्यापक और एक छात्रा के खिलाफ अश्लील शब्द लिखे थे। जिले के पुलिस अधीक्षक तुम्मे अमो ने छात्र संगठन (एएसएसयू) द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामला यहां महिला पुलिस थाना को सौंप दिया गया है। पीड़िताओं और उनके माता पिता के साथ साथ शिक्षकों से पूछताछ की जाएगी।
मेरा मानना है कि पूछताछ होती रहनी चाहिये। जांच भी हो विवरण के साथ लेकिन वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया में महिला अधिकारों की लड़ाई उनके साथ पुरूष भी लड़ रहे हैं तो ऐसे में एक छोटी सी बात को लेकर बिना जांच पड़ताल के दोषी मानते हुए सामुहिक रूप से छात्राओं के कपड़े भरी क्लास में उतरवाना उचित नहीं कहा जा सकता। इसके लिये दोषियों को सीधे सीधे जेल भेजा जाना चाहिये और स्कूल की मान्यता रद कर प्रधानाध्यापक के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाए तथा घटना वाले प्रदेश की सरकार और जिले के प्रशासनिक ओर अधिकारियों को चाहिये कि वो इस संदर्भ में पूरे मामले की विस्तार से जांच कराए। और इससे पूर्व स्कूल की सभी तरह की मान्यता भी निरस्त करते हुए घटना में मुख्य रूप से शामिल शिक्षकों की नौकरी भी समाप्त की जाए और कुछ ऐसा भी किया जाए कि भविष्य में छोटी बच्चियों के साथ इस प्रकार की क्रूरता करने वाले शिक्षकों को कहीं भी नौकरी न मिल पाए। जिससे अन्यों को यह सबक मिल सकें कि छोटे बच्चे छात्र हो या छात्रा उनके साथ अपने पद के मद में कोई भी ऐसा कार्य न करें जिससे बाल मन को ठेस पहुंचे।

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– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com

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