नवजात शिशुओं को सिखाने और समझाने के लिए महिलाएं बदलती हैं अपने स्वर, मां से अच्छा गुरु कौन होगा

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हाल ही में एक अध्यन में पाया गया कि महिलाएं अपने नवजात शिशु से स्वर बदल कर बात करती हैं, ताकि वो जन्म से ही अपनी मां को पहचान सकें. न्यूजर्सी की Princeton University के मुताबिक, सभी महिलाएं अपने बच्चों से बात करते वक़्त ‘Motherese’ और ‘Baby Talk’ का उपयोग करती हैं, जो कि काफ़ी हद एक संगीत वाद्ययंत्र से निकलने वाली मधुर ध्वनि की तरह सुनाई देता है.

हांलाकि, कुछ लोगों को ये बातें बेहद अजीब लग सकती हैं, पर अध्यन से पता चला है कि महिलाओं की ये बोली शिशुओं की ज़िंदगी में काफ़ी महत्वपूर्ण रोल अदा करती है. इससे बच्चों को भाषा सीखने में मदद मिलती हैं, साथ ही वो मां से भावनात्मक रूप से भी जुड़े रहते हैं. इतना ही नहीं, मां द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से बच्चों को पहेली सुलझाने में भी मदद मिलती है.

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रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया, एक मां ने लंबे समय तक अपनी आवाज़ में परिवर्तन किया. परीक्षण के लिए सात महीने से लेकर 12 महीने तक के नवजात शिशुओं को चुना गया. व्यस्कों की अपेक्षा बच्चों से बात करते वक़्त महिलाएं अपने स्वर बदल लेती हैं, जो कि गणतीय रूप से काफ़ी स्ट्रांग थे.

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शोधकर्ता एलिज़ पियाज़ा कहती हैं, उनकी टीम ने एक नए क्यू की खोज़ की है, जिसमें पाया गया कि माताएं काफ़ी हद तक बच्चों को तरह-तरह की भाषाएं सिखाने में मददगार साबित हुई हैं. Timbre का परीक्षण उन महिलाओं पर भी किया गया, जो 10 तरह की भाषाओं English, Cantonese, French, German, Hebrew, Hungarian, Mandarin, Polish, Russian and Spanish में बात कर सकती हैं.

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