स्वच्छता ही जीवन है, गंदगी है हमारे लिये अभिशाप, पानी में प्लास्टिक का घुलना है व जमीन में दबाना है खतरनाक, प्रधानमंत्री मोदी, जनता और स्वच्छता अभियान, अपने हित में सोचों!

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रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम। जैसे महान शब्दों आदि के माध्यम से अंहिसक आंदोलन चलाकर देश की आजादी का बिगुल बजाने और हमे स्वतंत्र माहौल में खुली हवा और सांस लेने का अवसर उपलब्ध कराने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी द्वारा कम संसाधनो और व्यवस्थाओं के बावजूद देश को आजादी दिलाने में सफलता प्राप्त की।
आज हमारे पास व्यवस्था भी है संसाधन भी है और सोच व ढृढ़ निश्चय भी है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्र में अपनी सरकार बनते ही दो अक्टूबर गांधी जयंती के पावन पर्व पर देशभर में स्वच्छता अभियान चलाया गया था। आज भले ही दो साल होने को आ रहे है मगर अभियान पूर्ण रूप से सफल नहीं हो पाया हो लेकिन उसे किसी भी रूप में असफल नहीं कहा जा सकता। अगर गिलास में पानी की कहावत पर चलते हुए हम उसे आधा खाली न समझकर आधा भरा समझ स्वच्छता अभियान की तुलना करते हैं तो देश में कई स्थान खुले में शोच से मुक्त हो गए। तथा कितने ही एनजीओ स्वच्छता अभियान को कामयाब बनाने में अपनायोगदान दे रहे हैं। वो बात दूसरी है कि कुछ सरकारी मशीनरी कई खासकर भाजपा के नेता इस अभियान में सरकारी पैसा खर्च करने के साथ साथ इसे फोटो खिचवाने और मीडिया द्वारा काफी कुछ उसे प्रचारित करने का माध्यम बना चुके है, लेकिन आम आदमी इस क्षेत्र मे कर रहा है।
उदाहरण के रूप में सपनो की नगरी मुंबई में अफरोज शाह द्वारा अपने साथियों के साथ अभी तक संमुंदर के किनारे शुरू किये गए सफाई अभियान में सात हजार टन कूड़ा उठवाकर उसे उचित स्थान पर भिजवाया जा चुका है। तो दूसरी ओर फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेटटी का एनजीओ भी जूहू बीच पर काफी काम कर रहा है। यूपी के मेरठ में राहुल शर्मा नामक नौजवान स्वच्छ भारत के बेनर पर अपने साथियों के साथ सफाई अभियान में जुटे है और ऐसा अपने देश में लगभग सब जगह हो रहा है इसलिये स्वच्छ भारत की जो नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी वो धीरे धीरे परवान चढ़ने लगी है। पिछले सप्ताह पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता पखवाड़ा मनाने की शुरूआत की गई। जिसके तहत एक अभियान जागरूकता से चलाने के साथ साथ कुछ श्लोगन इस संदर्भ में जागरूकता देने हेतु शुरू किये गए।
हम आलोचना सरकार किसी की भी हो कितना ही कर ले लेकिन यह अटल सत्य है कि हर काम सरकार के दम पर नहीं हो सकता। अगर हम अपना और अपनी भावी पीढी का भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं और सोचते हैं कि वो पूरे जीवन निरोगी व स्वच्छ रहे तो हमें सरकार के उपर न रखकर स्वच्छता अभियान की जो अलख पीएम ने जगाई हैे उस मिसाल को सही रूप देने हेतु खुद साफ सफाई की ओर ध्यान देना होगा।
मुझे लगता है कि हम बड़े स्तर पर अभियान चलाने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे। जहां भी कूडा या प्लास्टिक आदि दिखाई दे तो उसे उठाकर उचित जगह फेंकवाते रहें लेकिन भविष्य में कहीं सड़को व सार्वजनिक स्थानों और घरों में कूड़ा नजर नहीं आए तो उसके लिये हमें अपने बच्चों को बालकपन से ही सफाई के प्रति जागरूक करने के साथ साथ वृक्षों व पहाडों के कटान और जल जमीन के दोहन के प्रति साक्षर और जागरूक करना ही होगा। इस अभियान की स्वर्णिम सफलता के लिये।
हम जहां भी हैं और जिस हालत में है अकेले व अपनी विचार धारा को लेकर छोटे बच्चों के स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे नौजवानों के काॅलिज व इंस्टीयूट में जाकर बच्चों व नौजवानों को स्वच्छता अभियान के फायदे और गंदगी के नुकसान से अवगत कराते हुए प्लास्टिक जलाने और उसे जमीन में दबाने व पानी में फेंकने से होने वाले नुकसान से अवगत कराए। तो मेैं समझता हूं कि हम अपने आप को निरोगी रखने व पीएम के स्वच्छता अभियान को सफलता प्रदान करने में सफल तो होंगे। जो मछलियां समुंद्र की इस कारण मर रही है और उत्पादक योग्य भूमि प्लास्टिक दबाने के कारण बंजर हो रही है उससे उत्पादन में जो कमी होगी उसको लेकर भविष्य में खाद्यान की होने वाली कमी से भी बचा जा सकता है।
इसलिये हमें देशभर में पूर्व में जो हमारे तालाब थे जिन्हे कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा कब्जा लिया गया है उससे खाली करवाने के साथ साथ नए तालाब खोदने और जलाश्य में जल स्तर बढ़ाने के लिये भी प्रयास करने होंगे। जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी आॅफ एग्रीकल्चर आॅफ टेक्नाॅलोजी टीयूएटी द्वारा कराए गए सर्वें में जो तथ्य उभरकर आए है उससे पता चलता है कि दक्षिण एशियाई देशों की मछलियों के पेट में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है। तथा इससे पानी में प्लास्टिक घुलने का भी पता चला है। अगर यह सही है तो मछलियों की बीमारी और प्लास्टिक घूले पानी से भविष्य में कई नई बीमारियां उत्पन्न होने का खतरा पैदा हो जाएगा। कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि हम नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छता अभियान को सरकार का अभियान न समझकर जनहित का एक कार्यक्रम मानते हुए भविष्य में सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती बीमारियों का कारण कूड़ा करकट बने उससे पहले ही इसकी सफाई अफरोज शाह जैसे मानव हित की सोचने वाले व्यक्तियों की तरह जहां भी कूड़़ा मिले उसे उठाकर उचित स्थान पर डलवाने या डालने तथा नागरिकों को जगह जगह कूड़ा न फैलाने और साफ साफाई रखने के लिये प्रोत्साहित करे तो हमारा यही प्रयास बुराईयों पर अच्छाई की विजय का प्रतीक साबित होगा और भगवान राम के द्वारा दिखाए गए प्रेरणा स्त्रोत मार्ग और आदर्शाें को अपनाते हुए हमारे द्वारा सकारात्मक कार्य करने की कोशिश और सफलता कहीं जा सकती है।

– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
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