उलमा की राय से बने संसद में कानून….

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रामपुर : सपा नेता आजम खां ने कहा कि हम फैसले का सम्मान करते हैं। कोर्ट ने संसद में कानून बनाने को कहा है। यह कानून इस्लामिक विद्वानों और उलमा की राय से बनना चाहिए क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल को किसी के मजहब में दखलअंदाजी करने का कोई हक नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट के बाद भी जनता की अदालत है। देश में लोकतंत्र है तो धार्मिक आस्थाओं का खिलवाड़ नहीं होगा। वरना यह बड़ा मुश्किल हो जाएगा। किसी भी धर्म के पेशवा राजनीति से प्रेरित नहीं होते हैं। न ही वह किसी भी राजनीतिक दल के वफादार होते हैं।

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