पीएम सहित सभी प्रदेशो के मुख्यमंत्री व जनप्रतिनिधि दे ध्यान पीड़ित व्यक्तियों की बात सुन शिकायतों पर तुरंत कार्यवाही का माहौल बनने?

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अफसर समस्याओं के समाधान पर दें ध्यान तो देश में होने वाली हिंसा व दंगों में आ सकती है कमी

हिंसा और जातिवाद के दंगों से किसी को लाभ नही होता यह बात हर नागरिक जानता है छोटा हो या बड़़ा उसके बावजूद हजारों करोड़ का आर्थिक नुकसान और कितने ही परिवारों के बच्चों और बड़ो की असमय मृत्यु का कारण बनने वाले दंगें और हिंसा आखिर क्यो होती है। इस विषय में अब देश के स्वर्णिम विकास और राष्ट्रीय एकता तथा सदभाव ओर भाई चारें एवं शांति ओर कानून व्यवस्था बनी रहे इस पक्ष में सोचने की आवश्यकता अत्यंत जरूरी हो गयी है।
क्योकि हर साल देश में कही ना कही बिना सोचे समझे कारण कुछ भी रहा हो कुछ जगहों पर हिंसा एकदम भड़क उठती है। जबकि ऐसा होना नही चाहिए अगर कोई बिंदू है तो उसके बारें में सोच विचार कर समाज और अपनों के हित में सोचने की आवश्यकता से इंकार नही किया जा सकता।
लेकिन अखबार और समाचारों के माध्यम से यह पता चलते ही कही किसी ने मूर्ति खड़ित कर दी तो कही किसी बच्चें को पीट दिया तो उससे सबंध जाति और धर्म को मानने वाले लोग सड़कों पर उतर आते है और इतने उन्हे असलियत बताने का प्रयास हो इतने दंगे और हंगामें शुरू हो जाते है। जिन्हे पुलिस प्रशासन और हमारे जनप्रतिनिधि काबू कर पाने में जब तक सफल होते है तब तक काफी कुछ नुकसान जनधन का हो चुका होता है।
आये दिन ऐसी खबरें पढ़ने को मिलने और उनका खामियाजा बिना किसी दोष के हर नागरिक के साथसाथ हमें भी उठाना पड़ता है भविष्य में ऐसी घटनाएं ओर नुकसान ना हो और सब तरह की आर्थिक हानि से हर आदमी बचा रहे ऐसा क्या किया जाये तो कुछ बातें विषेश रूप से उभर कर आयी जिनमें सबसे महत्वपूर्ण बिंदु जो दिखायी दिया वो यह है की हर प्रकार की हिंसा के पीछे आम आदमी में अपनी बात ना सुने जाने और उस पर ध्यान ना दिये जाने को लेकर उत्पन्न हुआ असंतोष मौका पड़ने पर उग्र हो जाता है परिणाम स्वरूप कुछ विकृत मानसिकता के लोगो की भीड़ में शामिल होकर परेशान नागरिक जिम्मेदारों को सबक सिखाने का हर सम्भव प्रयास करने की कोशिश करते है।
वर्तमान समय में भाजपा के नेता और एक समय उप्र के डीजीपी रहे श्री बृजलाल और अपने समय में जहां भी रहे एडीजीपी के पद से रिटायर श्री गुरू दर्शन सिंह व डीआईजी अलीगढ़ के पद से सेवानिवृत गोविंद अग्रवाल का कथन की कभी भी आम आदमी और समस्या को फेस करने से बचना नही चाहिए यह कुछ बातें कि फुंसी को कभी फोड़ा मत बनने दो और छोटी से छोटी सूचना पर तुंरत ध्यान दे तथा मिलने आने वाले व्यक्ति की बातें जरूर सुने तो कितनी ही ऐसी समस्याओं का समाधान हो सकता है जो आगे चलकर विकराल बनती है उनमें उबाल आने से पहले ही वो समाप्त हो जाती है।
मै सबकों तो नही कहता क्योकि हाथ की पांचों उंगली भी एकसार नही होती उसी प्रकार सबकी सोच एक सी हो वो नही है मगर 40 साल के तजुर्बे से तो तथ्य उभकर आये अगर उन्हे ध्यान में रखकर निष्पक्ष तरीके से सोचा जाये तो दंगों और हिंसा के लिए पूरी तौर पर हमारे प्रशासन पुलिस सहित सभी सरकारी विभाग में तैनात कुछ अफसर और कई वो जनप्रतिनिधि जिम्मेदार होते हैं जो पीड़ित और त्रस्त व्यक्ति की बात ध्यान पूर्वक सुन उनका निस्तारण करने से बचतें है और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का प्रयास नही करते।
जागरूक नागरिक यह बात अच्छी तरह समझते होगे की कोई परेशान व्यक्ति अगर अपनी समस्या लेकर किसी के पास जाता है और सोचता है की उसकी परेशानी का समाधान होगा मगर वहां पर उसकी सुनवाई भी ठीक प्रकार से ना हो और वो पीड़ित दुखी मन से वापस लौटता है जो बात एक सर्वे में उभरकर आयी की फिर वो अपनी पीड़ा और उसका समाधान न ढुंढने वाले से बदला लेने की सोच बना लेता है तो समाप्त होने की बजाय धीरे धीरे बढ़ती ही जाती है और एक समय आकर विकराल रूप ले लेती है।
पीएम नरेन्द्र मोदी जी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ जी सहित तमाम देशों के मुख्यमंत्री और सभी दलों के जनप्रतिनिधि अगर अपने प्रभाव का उपयोग कर निरकुंश सोच और जनता की कठिनाईयों को न समझने वाले अफसरों की सोच बदलने की कोशिश करे और अगर ऐसा नही होता है तो ऐसे अफसरो को जनसस्मयाओं के समाधान से सबंध किसी भी विभाग में तैनाती ना दी जाये और अगर हो सके तो जिम्मेदारियों पर खरा ना उतरने की बात को ध्यान में रखते हुए इनकी सरकारी सेवा ही समाप्त कर दी जाये।
कुल मिलाकर कहने की मतलब सिर्फ इतना है की सभी प्रकार की हिंसा दंगों और आगजनी को रोकने एवं सामान्य नागरिकों की सोच विकृत ना हो इसके लिए सरकार को अपने अधिकारियों की सोच सबकी बात सुनने और उनसे प्यार से मिलने और शिकायत पर तुरंत कार्यवाही करने की बनानी होगी तथा जन प्रतिनिधियों को ऐसे अफसरों पर निगाह रखनी होगी जो जनता की बात ना सुन अपने आप को आधुनिक युग का शंहशाह समझने की भूल कर काम करने की बजाय माल कमाने और टेरेर पैदा करने की कोशिश में लगे रहते है अगर सरकार ऐसी व्यवस्था कर ले तो देशभर में हिंसा और दंगों की संख्या में अभूतपूर्व कमी हो सकती है।

-रवि कुमार विश्नोई
संस्थापक व राष्ट्रीय सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना

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