आपके सस्ते घर का सपना होगा साकार

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नई दिल्लीः नोटबंदी के बाद और 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वित्त मंत्री अरुण जेतली ने आज सदन में 2017-2018 का आम बजट पेश कर दिया। इस बजट से लोगों को बड़ी उम्मीदें थी। सरकार ने आम लोगों को हर मूमकिन राहत देने की कोशिश की है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बजट से बाद आम लोगों के सस्ते घर का सपना साकार हो सकता है।

जेतली ने बजट में सस्ते घरों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दे दिया है। इससे गरीब नागरिकों के लिए सस्ते घरों की आपूर्ति तेजी से बढ़ेगी। अब तक बिल्डरों को बैंकों से कर्ज मिलने में काफी दिक्कतें होती थी। बिल्डरों को बैंक कर्ज नहीं देते थे और उन्हें बाजार से महंगी दरों पर कर्ज लेना पड़ता था जिसकी वजह से मकानों के दाम बढ़ जाते थे लेकिन सरकार के इस फैसले से उन्हें अब बैंकों के कर्ज मिलने में आसानी होगी।

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दरअसल, सरकार ने 2022 तक गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को आवास देने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने में यह फैसला काफी मददगार होगा लेकिन सरकार के इस कदम से यह महत्वाकांक्षी योजना रफ्तार पकड़ सकती है। इसके अलावा सस्ते घरों की श्रेणी में पहले 4 महानगरों में 30 वर्ग मीटर के घर ही शामिल होते थे। इसके अलावा पूरे भारत में यह एरिया 60 मीटर था। इसमें पहले पूरा बिल्डअप एरिया गिना जाता था (बिल्ड अप एरिया वो एरिया होता है जिस पर मकान बना होता है इसमें नींव दीवारें शामिल होती हैं)। अब इस को कारपेट एरिया (चार दीवारों के बीच घिरा रहने योग्य एरिया)में बदल दिया गया है। सरकार के इस फैसले से अब लोगों को अब बड़े मकान मिल पाएंगे।

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