नितिन गडकरी जी भारी जुर्माना लगाने से सड़क दुर्घटनाएं रूकने वाली नहीं, शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के लाईसेंस हो निलंबित प्राईवेट क्षेत्र के ड्राईवर के गुजारे हेतु बने योजना!

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देश में हर वर्ष सड़क दुघर्टनाओं में करीब डेढ़ लाख के लोग मौत का शिकार हो जाते हैं। इसे उसकी मौत आ गई थी यह कहकर संतोष कर लो या अकाल मौत हुई जो भी हों। अपने परिवार से इतने लोग हर वर्ष बिछड़ जाते हैं। दुख की बात तो यह है कि इनमे मरने वालों में ड्राइवर व कंडेक्टर होते है उनके मरने के बाद उनके परिवार को देखने वाला काई नहीं होता। प्राइवेट क्षेत्र में तो और बहुत ही बुरा हाल है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इन दुघर्टनाओं को रोकने के लिये एक मजबूत सड़क सुरक्षा कानून लाने के लिये प्रयासरत हैं। ऐसा होना भी चाहिये क्योंकि यह उनकी जिममेदारी भी है। मगर मेरा मानना है कि एसी कमरो में बैठकर मंत्रियों द्वारा अपने सहयोगी अधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर दुघर्टनाओं को रोकने लिये जो भारी भरकम जुर्माना लगाने की योजना बना रहे हैं। वो किसी भी रूप में उचित नहीं और न हीं उससे दुर्घटनाएं रूकने वाली है। मैं समझता हूं कि सड़क सुरक्षा विधेयक पर संसद की परिवहन पर्यटन एवं सांस्कृतिक संबंधी स्थायी समिति के द्वारा दिये गए सुझावों पर सर्व प्रथम विचार हों। और फिर इसके संदर्भ में सड़क दुर्घटनाओं से पीडित और जिन के परिवार के लोग हादसों का शिकार हो गए उन चालक व परिचालक तथा वाहन मालिकों से सलाह मशवरा हर स्तर पर किये जाने के बाद इस बारे में अगर कानून बनाया जाए तो वो वाकयी महत्वपूर्ण और लाभकारी होगा। इस संदर्भ में दिये गए सुझाव की 3 से पांच बजे तक परिवहन परिचालन पर पूरी तौर पर रोक लगें बिल्कुल सही है। मैं तो इससे दो कदम आगे चलकर यह कहना चाहता हूं कि रात्रि दो बजे से सुबह छह बजे तक खासकर टकोें के परिचालन पर रोक लगायी जाए। तथा 500 किलो मीटर से अधिक दूरी पर चलने वाले भारी वाहनों पर दो चालकों की व्यवस्था होनी चाहिये। एंव छोेटे चार पहिया वाहनों वाहन जो टैक्सी आदि में चलते हैं उनके तथा व्यक्तिगत वाहनों पर काम करने वाले चालकों को 60 साल के बाद उनका पूर्ण चैकअप हो और अगर वो नेत्रो तथा शरीर से स्वस्थ हैं तो उन्हे वाहन चलाने की अनुमति हो वरना 60 साल के बाद उन्हे सेवानिवृति दी जाए और उसके बाद उन्हे बेरोजगारी भत्ता पेंशन के रूप में दे जिससे वो अपना व परिवार का गुजर बसर कर सकें।
क्योंकि प्राईवेट सेक्टरों से यह उम्मीद नहंीं की जा सकती है कि वो नौकरी छोडने के बाद जीवन में किसी को हर माह कोई भत्ता दे सकें। इस बात को दृष्टिगत रखते हुए यह जरूरी है कि इन क्षेत्रों में ड्राईवरों का काम करने वाले व्यक्तियों के ड्राईविंग लाईसेंस मिलते ही उनका बैंक में खाता खुलवाया जाए जिसमे हर माह पगार के अतिरिक्त एक हजार रूपये चालक की तनख्वाह से जमा कराया जाए और यह हो कि 60 साल तक यह व्यवस्था चालक स्वयं न निकाल पाए।
इससे वाहन चलाने के काबिल रहने पर वो कोई भी व्यक्ति जो रकम जमा है उससे छोटा मोटा काम कर या बैंक में ब्याज कर अपना खर्चा चला सके और परिवार के पालन पोषण में भी सहयोग दे सकें। यह कितने दुख की बात है कि केंद्र में चाहे जो भी सरकार हो उसके द्वारा चुनाव लडते समय बडे बडे दावे जनहित के किये जाते हैं और चुनाव जीतने के बाद जो योजनाएं बनती है उनमे प्राईवेट क्षेत्र के चालकों के लिये कोई योजना शायद अभी तक लागू नहीं। नितिन गडकरी जी आप सडक दुर्घटना रोकने के लिये योजना बना रहे हैं बात तो बहुत अच्डी है लेकिन भारी भरकम जुर्माना लगाने के नाम पर इसमे सुधार के कुछ ऐसे काम करें जिससे प्राईवेट वाहनों के चालक व परिचालक 12 घंटे की यात्रा के बाद 8 घंटे सो सकें वो बात ओर है कि यह आराम अगर लंबी दूरी पर जा रहे हैं तो वो अपने वाहन में सोकर भी कर सकते हैं।
इसके साथ वाहन चलाते समय अगर कोई ट्रक चालक शराब व अन्य किसी के नशे में लिप्त पाया जाए तो दो बार उसे चेतावनी और तीसरी बार में उसका लाईसेंस निलंबित कर दिया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मैं समझता हूं कि काफी सफलता मिल सकेगी।

-रवि कुमार विश्नोई
संस्थापक व राष्ट्रीय सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना

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