समुद्र की अनंत लहरों को गिनें बेकल किले से

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लगभग 40 एकड़ में फेला समुद्रतल से 130 फीट ऊपर बेकल किला केरल का सबसे बड़ा किला है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह समुद्र किनारे है, जहां से अनंत लहरों और शांत वातावरण में गूंज रहे प्राकृतिक संगीत का आनंद लिया जा सकता है। तीन सौ साल पुराना यह किला इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए बरसों से आकर्षण का केंद्र रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से भी यह किला दर्शनीय है। इस किले ने सदियों पुराने अतीत को संजो कर रखा है, जिसे देखने दूर-दूर से पर्यटक आते रहते हैं। किले के बाहर का खास तरह का प्रवेश द्वार किले की सुरक्षा करता था। किले के प्रवेश द्वार पर हनुमान जी का प्राचीन अंजेनय मंदिर है ऐसा कहा जाता है कि यह उतना ही पुराना मंदिर है, जितना यह किला। दूर-दूर से इस मंदिर को देखने भक्त आते हैं। इसके साथ ही एक पुरानी मस्जिद भी है, जिसका हाल में पुनरुद्धार किया गया है। ऐसा कहा जाता हैं कि इस मस्जिद को टीपू सुल्तान ने बनवाया था।

बेकल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रवेश द्वार के आगे एक सुरंग है, जो दक्षिण की तरफ खुलती है। इस सुरंग में गोला-बारूद रखे जाते थे। इस किले से आप आसपास के महत्वपूर्ण जगह जैसे कान्हागढ़, पैलीकैटे, कोटि्टकुलम वगैरह देख सकते हैं। किले के बाहर से अरब सागर भी देखा जा सकता है। इस किले के आसपास 35 एकड़ में फैली सफेद बालू और ढेर सारे खजूर के पेड़ों की कतार कुछ अलग ही दृश्य प्रस्तुत करते हैं। दूसरे भारतीय किलों की तरह बेकल किला ऐसे किलों में शामिल नहीं जिसके अंदर कोई पैलेस, मैनसन या कोई इमारत हो। इस किले को सिर्फ सुरक्षा के लिए बनया गया थ। किले में किए गए छेदों से दुश्मनों पर दूर तक नजर रखी जाती थी। इस किले से सुरक्षा की बेहतरीन तकनालॉजी को समझा जा सकता है।

शिवप्पा नायक ने 1650 से 1670 तक कई किले बनवाए। जिसमें बेकल और चन्द्रगिरी किला भी शामिल है। बेकल किला टीपू सुल्तान का महत्वपूर्ण सैनिक ठिकाना रहा। हाल ही में वहां पर सिक्के ओर पुरातत्व खनन में मिली चीजें इस को साबित करती हैं कि यहां मैसूर साम्राज्य भी था। 1799 में टीपू सुल्तान की मौत के बाद यह किला ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन हो गया। 1992 में भारत सरकार ने इस किले को विशेष पर्यटन स्थल बनाया। 1995 में इसे पर्यटन विभाग ने अंतराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र में तब्दील किया। इस किले से सूर्योदय और सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। दिसम्बर और जनवरी का सूर्यास्त यहां के बेहतरीन दृश्यों में से एक है।

बेकल किला को देखने किसी भी मौसम में जाया जा सकता है। यहां से आठ किलोमीटर दूर नजदीकी शहर कान्हा-गढ़ और 18 किलोमीटर दूर है कसरगॉड। इन शहरों से आप बस या ट्रेन से यहां पहुंच सकते हैं। मंगलौर अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा यहां से सिर्फ 60 किलोमीटर की दूरी पर है।

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