सेना की वर्दी की निजी दुकानों पर बिक्री पर रोक लगाने की याचिका

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एक एनजीओ द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर सेना की वर्दी की निजी बिक्री पर रोक की मांग करते हुए कहा गया है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है। मामला क्योंकि कोर्ट में हैं। इस संदर्भ में कोई भी टिप्पणी करना मैं उचित नहीं समझता हूं, मगर  इस याचिका का समर्थन करने में भी कोई हर्ज नजर नहीं आता है। क्योंकि पूर्व में ऐसे खबरे समाचार पत्रों में पढ़ने और सुनने को मिलते हैं कि सैना या पुलिस की वर्दी अथवा उनसे मिलते कलर वाहनों पर सवार लाल या नीली बत्ती लगे वाहन में आए लोगों ने फला अपराधिक घटना को अंजाम दिया। ऐसे में इनका आतंकवादी मामलों में उपयोग किये जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इसलिये जनहित की याचिका वाकई में जनता के हित की है। समाज ओर सरकार शासन व प्रशासन को इसका समर्थन करना चाहिये। पूर्व में कई बार पहले भी यह मुददे उठ चुके हैं। अब मगर उम्मीद बनी है कि माननीय न्यायालय द्वारा इस संदर्भ में जो भी निर्णय लिया जाएगा वो जनहित का होगा। एनजीओ व उसके संचालकों को देश हित की याचिका दायर करने के लिये मैं समझता हूं कि बधाई और शुभकामना तो दी जानी चाहिये।
अखबार में छपी दायर याचिका पर एक नजरः दिल्ली हाईकोर्ट में गत 15 जुलाई को दायर एक जनहित याचिका में कहा गया है कि सेना की वर्दी की निजी बिक्री से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है । इस भारत में आतंकवादियों द्वारा सुरक्षाकर्मियों के वेष में हमलों का जिक्र है जिनमें वायुसेना का पठानकोट अड्डा शामिल है। जनहित याचिका में ऐसी सामग्री की सार्वजनिक बिक्री और विनिर्माण पर रोक के लिए कदम उठाए जाने की मांग की गयी है और दलील दी गयी है कि सशस्त्र बलों की वर्दी, जूते, बैज आदि चीजें पंजाब के अमृतसर और लुधियाना में निजी उद्योगों द्वारा तैयार की जा रही हैं तथा पूरे देश में उनकी बिक्री होती है।एक एनजीओ की याचिका मे कहा गया है कि पठानकोट में रेलवे मार्केट ऐसा ही एक स्थान है जहां ऐसी चीजें बिकती हैं। एनजीओ ने कहा कि भारतीय सेना द्वारा आठ जनवरी को जारी दिशानिर्देश में नागरिकों और निजी दुकानदारों को निर्देश दिया गया है कि वे सेना के युद्धक परिधान नहीं पहनें या बेचें।इसमें रक्षा मंत्रालय को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि युद्धक परिधान एवं संबंधित अन्य चीजों की निजी बिक्री, विनिर्माण आदि पर रोक के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए।

-रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com

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