आॅल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन की मांग, आधार डाटा लीक मामले में संबंधित अधिकारियों के रचना खैरा मामले में प्रेस की स्वतंत्रता बचाए रखने हेतू प्रधानमंत्री जी दे ध्यान

आधार डाटा लिक मामले में पत्रकारों में बढ़ते रोष और रोहतक में प्रेस क्लब में इस संदर्भ में प्रधान सुनीत धवन की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस मामले को खारिज न करने पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किये जाने एवं देशभर में पत्रकार रचना खैरा के विरूद्ध रिपोर्ट को लेकर पत्रकारों में व्याप्त रोष के चलते यूटीआई के डिप्टी डायरेक्टर बीएम पटनायक ने कहा कि उन्होंने दिल्ली पुलिस से कहा है कि इस मामले में जरूरी जानकारी के लिये अखबार से मदद लें। कि उन्हे यह जानकारी कहां से मिली। इसे लेकर पूछताछ भी करे तो दूसरी ओर इस मामले में देश के कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद जी का कहना है कि यूटीआई ने एफआईआर किसी व्यक्ति पर नहीं बल्कि अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज करायी है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रेस की स्वतंत्रता के साथ भारत के विकास के लिये आधार की सुरक्षा को बनाए रखने हेतु पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। अंग्रेजी समाचार पत्र दैनिक ट्रिब्यून की पत्रकार के खिलाफ दर्ज करायी गई एफआईआर को लेकर अखबारों के परिसंघ व समाचार एजेंसी कर्मचारी संगठन द्वारा इसका पूर्ण विरोध किया गया। आॅल इंडिया न्यूज पेपर एसोसिएशन आईना  का मानना है कि रचना खैरा के विरूद्ध यूटीआई के डिप्टी डायरेक्टर के द्वारा जो दिल्ली पुलिस से कहा गया है वो भी किसी एफआईआर से कम नहीं है। इसलिये हम इस कार्रवाई का सख्त विरोध करते हैं।
आईना के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मेरा मानना है कि रवि शंकर प्रसाद साहब जो कह रहे हैं हो सकता है कि वो ठीक हो और सरकार प्रेस की स्वतंत्रता के लिये प्रतिबद्ध हो। मगर केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद सूचना मंत्री के रूप में अरूण जेटली साहब द्वारा जो कानून मीडिया को लेकर बनाया गया। उसे इस क्षेत्र के लोगों ने काले कानून की संज्ञा दी और अब कुछ माह पूर्व जुलाई 2017 में वित मंत्री के रूप में अरूण जेटली साहब ने जो जीएसटी के प्रचंड में फंसा कर देश में पहली बार मीडिया का उत्पीड़न और मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न शुरू कराया है वो किसी से छुपा नहीं है।
ऐसे में रवि शंकर प्रसाद साहब का यह कहना कि प्रेस की स्वतंत्रता के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। कुछ समझ से बाहर लगता है। न्याय मंत्री जी यूटीआई के डिप्टी डायरेक्ट को चाहिये था कि यह खबर कहां से लीक हुई इसकी खोज अपने सहयोगियों के बीच करते तो ज्यादा अच्छा था लेकिन मुझे लगता है कि मामले को टालने और उस पर लीपा पोती करने के लिये और प्रेस इस प्रकरण में और ज्यादा कुछ न लिखे इसके लिये दबाव बनाने के दृष्टिकोण से शायद दिल्ली पुलिस को कहा गया जिसे किसी भी रूप में उचित नहीं माना जा सकता।
मैं रवि शंकर प्रसाद साहब की बात का विरोध नहंी कर रहा हूं लेकिन यूटीआई की कार्रवाई पूरी तौर पर प्रेस की आजादी का हनन है समाचार कैसे लीक हुआ इसके लिये यूटीआई के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये न की पत्रकार के।
जनप्रतिनिधि चाहे सरकार में हो या उससे बाहर। हर मंच पर उनके द्वारा यह कहा जाता है कि प्रेस बुराई और कमियों को उजागर करे और समाज को सही दिशा दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहे है और जब एक बुराई को उजागर उसके द्वारा किया गया है तो इतना बवाल पत्रकार के खिलाफ क्यों।
हरियाणा के पत्रकारों का कहना ठीक है अगर पत्रकार रचना खैरा का उत्पीड़न हुआ तो हरियाणा प्रदेश में नहीं बल्कि देशभर में इसके खिलाफ गांधीवादी तरीके से शांतिपूर्ण विरोध मीडिया से जुड़े सभी लोग करेंगे। अपनी स्वतंत्रता को बचाने के लिये। मैं समझता हूं कि मीडिया से संबंध हर संगठन और संस्था रचना खैरा के साथ खड़े नजर आएगा। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को सही मायनों में मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा और विभिन्न मौकों पर समाचार संचालकों पर होने वालो उत्पीड़न की कार्रवाई पर रोक लगाने हेतु कोई सकारात्मक निर्देश अपने सहयोगी मंत्रियों व उनके मंत्रालय के अधिकारियों को देने चाहिये। मेरी पीएम साहब से यह भी मांग है कि गौरी लंकेश सहित जितने भी पत्रकारों की बीते पांच साल में हत्याएं हुई या उन पर हमले उन मामलों को पुनः खुलवाकर उनकी जांच कराए और दोषियों को सजा दिलाने के साथ साथ इससे प्रभावित मीडिया के लोगों को मुआवजा और उनके बच्चों को सरकारी नौकरियां दिलायी जाई।
– रवि कुमार विश्नोई
राष्ट्रीय अध्यक्ष – आॅल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन आईना
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
MD – www.tazzakhabar.com
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